Genz & Gen Alpha Marriage Trend: पिछले कुछ सालों तकनीक और लाइफस्टाइल में आए बदलाव ने लोगों की सोच को काफी बदल दिया है. इस सोच का सबसे ज्यादा असर नई पीढ़ी में देखने को मिला है. नई पीढ़ी यानी जेन जी (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) अब शादी को जीवन का खास लक्ष्य नहीं मानती है, बल्कि इसे एक ऑप्शन के तौर पर देख रही है. हाल ही में हुआ सर्वे भी इसी ओर इशारा करता है कि युवाओं की शादी में रुचि धीरे-धीरे कम हो रही है. अब युवा पहले करियर, पैसा और मानसिक शांति को प्राथमिकता दे रहे हैं, और उसके बाद ही किसी रिश्ते के बारे में सोचते हैं. चलिए इस मुद्दे को लेकर एक्सपर्ट्स की राय जानते हैं.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
लेस्ली त्रिपाठी (एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर)
'यह दौर ‘सेल्फ पार्टनरशिप’ का है. अब लोग खुद के साथ और अकेले रहकर खुश रहना सीख रहे हैं. पहले सोसाइटी का दबाव होता था, लेकिन अब लोग अपनी पसंद से फैसले ले रहे हैं. करियर, पैसा, ट्रैवल और सेल्फ केयर आज के दौर में पहले हैं और रिलेशनशिप बाद में आते हैं.'
प्रो. दीप्ति रंजन साहू (प्रेसिडेंट, इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी) के मुताबिक, 'शादी एक सामाजिक संस्था है, लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आना स्वाभाविक है. अब शादी 'दो परिवारों' के बजाय 'दो व्यक्तियों' के बीच का रिश्ता बनकर रह गई है. व्यक्तिवाद (Individualism), आर्थिक बदलाव और शहरी जीवनशैली ने इस सोच को काफी ज्यादा प्रभावित किया है. अब लोग पारंपरिक ढांचे से हटकर अपनी शर्तों पर रिश्ते तय करना चाहते हैं.'
इसी विषय को लेकर डॉ. निशा खन्ना (मैरेज काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट) कहती हैं कि, 'नई पीढ़ी की सोच पूरी तरह गलत नहीं है. पहले शादियों में महिलाओं से ज्यादा समझौते की उम्मीद की जाती थी. अब महिलाएं एजुकेटेड और फाइनेंशियल तरीके से इंडिपेंडेंट हैं, इसलिए वे समानता चाहती हैं. लेकिन रिश्तों में 'इंटरडिपेंडेंसी' भी जरूरी है. पूरी तरह अकेले रहना या हाइपर-इंडिपेंडेंट होना भी सही नहीं है. इसलिए सही पार्टनरशिप जरूरी है, चाहे शादी देर से ही क्यों न हो.'
डॉ. मनीषा सिंघल (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) के मुताबिक, 'आज के समय में युवाओं में 'कमिटमेंट का डर' बढ़ रहा है, जिसे हम 'गेमोफोबिया' कहते हैं. वे जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं और पहले खुद को स्थिर करना चाहते हैं. सोशल मीडिया, परिवार के अनुभव और रिश्तों में देखी गई परेशानियां भी इस सोच को प्रभावित करती हैं. यही कारण है कि आजकल लोग शादी को टाल रहे हैं या उससे दूर रहना चाहते हैं.'
शादी से जुड़ा डेटा क्या कहता है?
लेटस्ट डेटा के मुताबिक, बेबी बूमर पीढ़ी में लगभग 96% लोगों में ही शादी हो रही है.
जेन एक्स (Gen X) में यह संख्या घटकर 82% रह गई.
मिलेनियल्स (Millennials) में यह लगभग 67% तक पहुंच गई.
जेन जी (Gen Z) में यह 56-58% के बीच बताई जा रही है और अनुमान है कि जेन अल्फा (Gen Alpha) में यह आकड़ा और नीचे जा सकता है.
शादी को लेकर सोच क्यों बदल रही है?
1. करियर और आर्थिक स्वतंत्रता
आज की पीढ़ी पहले खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहती है. नौकरी, बिजनेस और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी उनकी पहली प्राथमिकता है.
2. महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता
महिलाएं अब ज्यादा पढ़ी-लिखी और स्वतंत्र हैं. वे रिश्तों में बराबरी और सम्मान चाहती हैं, सिर्फ जिम्मेदारी नहीं.
3. सोशल मीडिया और ग्लोबल एक्सपोजर
दुनिया भर के लाइफस्टाइल देखने से लोगों की सोच बदल रही है. अब 'अपना रास्ता खुद चुनो' वाली सोच बढ़ रही है.
4. रिश्तों में बढ़ते तनाव और तलाक
तलाक और टॉक्सिक रिलेशनशिप के अनुभवों ने नई पीढ़ी को ज्यादा सावधान बना दिया है.
5. मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता
आज युवा अपनी मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दे रहे हैं और अनहेल्दी रिलेशन से दूरी बना रहे हैं.
शादी: परंपरा या व्यक्तिगत पसंद?
जहां पहले शादी को जीवन का अनिवार्य हिस्सा माना जाता था, वहीं अब नई पीढ़ी इसे एक व्यक्तिगत निर्णय मान रही है. कुछ लोग इसे आजादी और आत्मनिर्भरता का संकेत मानते हैं, तो कुछ इसे सामाजिक संरचना के लिए चुनौती भी मान रहे हैं.
फ्यूचर में क्या होगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में शादी का स्वरूप पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन इसका मतलब और तरीका जरूर बदल जाएगा. अब शादी मजबूरी नहीं, बल्कि समझदारी और सही समय पर लिया गया निर्णय बनती जा रही है.
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