रोज 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर दूध… गामा पहलवान की ऐसी थी डाइट, रोज इतना सब कैसे पचा लेते थे?

गामा पहलवान (Gama Pehlwan) जिनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट था, अपनी भारी-भरकम डाइट के लिए जाने जाते थे. वह रोजाना इतनी हैवी डाइट कैसे पचा लेते थे, इस बारे में विस्तार से जानेंगे.

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लंबी बीमारी के बाद 1960 में 82 वर्ष की आयु में गामा पहलवान का निधन हो गया था. (Photo: ITG) लंबी बीमारी के बाद 1960 में 82 वर्ष की आयु में गामा पहलवान का निधन हो गया था. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

देश-दुनिया में कई पहलवान हुए हैं जिनमें से कई भारत से भी हैं. जब भी सबसे ताकतवर पहलवान का नाम आता है तो हर किसी की जुबान पर सबसे पहला नाम आता है 'गामा पहलवान'. 22 मई 1878 को अमृतसर के जब्बोवाल गांव में जन्मे गामा पहलवान का असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट था. 5 फीट 7 इंच लंबे गामा पहलवान उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने अपने करियर में एक भी कुश्ती नहीं हारी. गामा पहलवान की डाइट सुनकर आज भी लोग चौंक जाते हैं. कहा जाता है कि वे रोजाना 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर दूध और 300 ग्राम बादाम और घी खाते थे. 

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पहली नजर में ये किसी भी आम इंसान के लिए असंभव लगता है लेकिन गामा पहलवान के लिए इतनी सारी डाइट हजम करना काफी आसान था.  उनका शरीर इस डाइट को सिर्फ पचाता ही नहीं था, बल्कि उसे ताकत में बदल देता था. आखिर वे इतना अधिक प्रोटीन कैसे पचा लेते थे, ये भी हर कोई जानना चाहता है.

गामा पहलवान की डाइट 

रिपोर्ट्स के मुताबिक 133 किलो वजन गामा पहलवान की रोजाना की डाइट में करीब 7.5–10 लीटर दूध, 6 देसी मुर्गे और करीब 300 ग्राम कुटे हुए बादाम शामिल थे. ये डाइट उनकी रोजाना की ट्रेनिंग का हिस्सा थी. गामा पहलवान की इतनी भारी-भरकम डाइट कोई जादू नहीं थी बल्कि उनकी सालों की कड़ी मेहनत और बॉडी के साइंस का कमाल था. 

गामा जो डाइट लेते थे, उसमें करीब 10 हजार से अधिक कैलोरी होती थीं. चिकन, दूध आदि  चीजों से उन्हें काफी अधिक प्रोटीन मिलता था और हैरानी की बात ये है कि उनका शरीर उस प्रोटीन को डाइजेस्ट भी कर लेता था.

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इतना प्रोटीन कैसे पचता था?

Frontiersin में पब्लिश हुए एक रिव्यू के मुताबिक, स्ट्रेंथ एथलीट्स को भी आम तौर पर 1.6–1.8 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट प्रोटीन काफी माना जाता है लेकिन अगर ट्रेनिंग वॉल्यूम बहुत ज्यादा हो और कैलोरी अधिक बर्न होती हो तो शरीर समय के साथ प्रोटीन इंटेक को मैनेज करना सीख जाता है.

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, हाई प्रोटीन और हाई कैलोरी डाइट (जैसे दूध, मीट और बादाम) जब पूरे दिन में कई बार बांटकर खाई जाए और साथ में काफी अधिक फिजिकल एक्टिविटी की जाए तो डाइजेस्टिव सिस्टम की एंजाइम एक्टिविटी और गैस्ट्रिक कैपेसिटी भी बढ़ सकती है जिससे शरीर अधिक प्रोटीन पचाने में सक्षम हो जाता है. ऐसा ही गामा पहलवान के मामले में दिखाई देता है.

जर्नल ऑफ स्पोर्ट साइंस एंड मेडिसन का भी कहना है जो एथलीट हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग करते हैं, उनका मेटाबॉलिज्म काफी तेज हो जाता है. यानी उनका शरीर खाना जल्दी पचाता है और उसे एनर्जी में बदल देता है. इसी तरह इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ स्पोर्ट न्यूट्रिशन (ISSN) बताती है कि ज्यादा मेहनत करने वाले लोगों को मसल्स की रिकवरी के लिए ज्यादा प्रोटीन की जरूरत होती है, जो गामा की डाइट में भरपूर था.

1200 किलो के पत्थर से करते थे एक्सरसाइज

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कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि गामा पहलवान रोजाना अपने 40 साथियों के साथ कुश्ती की प्रैक्टिस करते थे. सयाजीबाग में बड़ौदा संग्रहालय में एक 2.5 फीट क्यूबिकल पत्थर रखा हुआ है जिसका वजन लगभग 1200 किलो है. बताया जाता है कि 23 दिसंबर 1902 को गामा ने 1200 किलो के इस पत्थर को गामा पहलवान ने उठा लिया था.

6 देसी मुर्गे पचाने का फॉर्मूला क्या था?

Menshealth के मुताबिक, गामा पहलवान सालों तक रोज 5–9 घंटे की बॉडीवेट ट्रेनिंग, दौड़ और अखाड़े की कुश्ती करते थे. इतनी अधिक ट्रेनिंग से उनके मसल्स ही नहीं बल्कि लिवर, किडनी और डाइजेशन सिस्टम भी हाई-वॉल्यूम डाइट की आदि हो गई थीं. गामा बचपन से ही दिन में सैकड़ों दंड-बैठक लगाते थे जो आगे चलकर 5000 बैठक और 3000 दंड तक पहुंच गई थीं यानी वो रोजाना 8000 से ज्यादा रेप्स करते थे.

देसी दूध, मुर्गा, घी और बादाम जैसी नेचरल, अनप्रोसेस्ड चीजें उन्हें धीरे-धीरे एनर्जी, अमीनो एसिड और फैट देती थीं जो पूरे दिन मसल रिपेयर, ताकत और रिकवरी में फ्लूल की तरह काम करता था. बस ऐसे ही इतना हैवी वर्कआउट और डाइट बैलेंस होता था.

आप यदि जिम जाते हैं तो आपको कितने प्रोटीन की जरूरत है ये आपका सर्टिफाइड फिटनेस कोच से जरूर पूछें और कभी भी अपने मन से कोई भी चीज बिना गाइडेंस के शामिल न करें.

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