दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए साफ हवा अब सिर्फ सपना बनती जा रही है. कई सालों में की गई स्टडीज, कोर्ट के आदेश, सरकारी निर्देश और आपातकालीन कदमों के बावजूद भी हर साल सर्दियों में हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है. ये हवा उन बच्चों, बुजुर्गों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी खतरनाक हो जाती है, जिन्हें पहले से सांस संबंधी या दिल से जुड़ी कोई समस्या होती है.
हाल ही में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की रिपोर्ट ने फिर से चेतावनी दी है कि दिल्ली-एनसीआर भारत के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है. रिपोर्ट के अनुसार, यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई बार खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों की रोज की जिंदगी प्रभावित होती है.
क्यों हमेशा प्रदूषण से जूझता है दिल्ली-एनसीआर?
दिल्ली-एनसीआर साल-दर-साल और ज्यादा प्रदूषित होता जा रहा है. हर साल सर्दियों में प्रदूषण और ज्यादा गंभीर समस्या बनकर सामने आता है, और इसके पीछे सिर्फ वाहनों या धुंध का ही कारण नहीं है. दिल्ली-एनसीआर की जगह और यहां कितने लोग रहते हैं उनकी संख्या इसे प्रदूषण के लिए ज्यादा सेंसिटिव बनाती है.
दरअसल, दिल्ली-एनसीआर इंडो-गैंगेटिक प्लेन (IGP) में आता है. ये मैदान भारत के कुल भूभाग का महज 18% हिस्सा है, लेकिन यहां देश की लगभग 40% आबादी रहती है. इतनी ज्यादा आबादी का मतलब है बहुत सारे वाहन, बढ़ती फैक्ट्री, कंस्ट्रक्शन और रोजाना के कामों से होने वाला प्रदूषण.
इतनी घनी आबादी और तेजी से बढ़ते शहर के चलते, हवा में मौजूद प्रदूषक आसानी से फैलते नहीं है बल्कि एक ही जगह स्थिर हो जाते हैं. खासकर सर्दियों में, ठंडी हवा के कारण ये प्रदूषक स्थानीय स्तर पर जमा होकर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाते हैं. यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर हर साल प्रदूषण के हॉटस्पॉट के रूप में उभरता है.
इसके अलावा, इंडो-गैंगेटिक प्लेन की भौगोलिक बनावट भी इसकी वजह बनती है. ये मैदान चारों तरफ से पहाड़ों और नदियों से घिरा है, जिससे हवा का नेचुरल बहाव धीमा हो जाता है और प्रदूषण को फैलने का अवसर नहीं मिलता है.
हवा प्रदूषित होने के मुख्य कारण
1. तेजी से बढ़ता शहर और ट्रैफिक: दिल्ली-एनसीआर का शहर बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सड़कें उतनी तेजी से नहीं बढ़ीं. लोग ज्यादातर अपनी पर्सनल गाड़ियों पर निर्भर हैं. इसके चलते सड़क पर गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती रहती है और उससे निकलने वाला धुआं हवा में हानिकारक गैसों के साथ मिलकर प्रदूषण बढ़ा देता है. शहर की बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक ने हवा को लगातार गंदा और जहरीला बना दिया है.
2. पेट्रोल-डीजल और कोयला: दिल्ली-एनसीआर में ज्यादातर वाहन, फैक्ट्रियां और पावर प्लांट पेट्रोल, डीजल और कोयले पर चलते हैं. इन ईंधनों के जलने से हवा में हानिकारक गैसें और पार्टिकुलेट मैटर फैलते हैं. इन गैसों की वजह से सांस लेने के लिए हवा खतरनाक बन जाती है. इसकी वजह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
3. कंस्ट्रक्शन और धूल: शहर में बड़े-बड़े कंस्ट्रक्शनंस लगातार चल रहे हैं. पुरानी बिल्डिंग्स के ध्वस्त होने से भी धूल का लेवल बढ़ जाता है. ये धूल हवा को गंदा कर देती हैं और सांस लेना मुश्किल बना देती है. खासकर सर्दियों में, ये धूल और प्रदूषक हवा में लंबे समय तक टिक जाते हैं, जिससे AQI खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है.
4. सर्दियों का मौसम: सर्दियों का मौसम इसकी बहुत बड़ी वजह बनता है. इस मौसम में हवा बहुत धीमी हो जाती है. टेंपरेचर इनवर्जन की वजह से प्रदूषण जमीन के पास अटक जाता है और फैल नहीं पाता. इसकी वजह से घना कोहरा होता है और हवा जहरीली हो जाती है, जो बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए और भी खतरनाक बन जाती है.
दो अलग-अलग चरण में होता है प्रदूषण का मौसम
चरण 1: अक्टूबर से नवंबर
अक्टूबर से नवंबर तक के महीने में खेत की पराली जलाई जाती है, जिसकी वजह से हवा में प्रदुषण बढ़ता है. ये इन महीनों में प्रदुषण का स्तर बढ़ने का मुख्य कारण होता है. इतना ही नहीं इनमें हवा धीमी चलती है और धूल और धुआं जमीन पर जमा रहता है. PM2.5 और PM10 कण हवा में घुलकर हेल्थ के लिए खतरनाक हो जाते हैं.
चरण 2: दिसंबर से जनवरी
दिसंबर से जनवरी तक सर्दियां अपने चरम पर पहुंच जाती है. इन महीनों में कोहरा, कम धूप और ठहरी हुई हवा के कारण प्रदूषण फैल नहीं पाता. इसके कारण शहर में प्रदुषण बढ़ जाता है. घरों और गांवों में गर्माहट के लिए लकड़ी और बायोमास जलाना भी प्रदूषण बढ़ाता है.
कौन कितना प्रदूषण करता है?
| सेक्टर | सर्दियों में कॉनट्रिब्यूशन | गर्मियों में कॉनट्रिब्यूशन |
| ट्रांसपोर्ट | 23% | 19% |
| इंडस्ट्री (पावर प्लांट आदि) | 9% | 14% |
| सड़क और निर्माण धूल | 15% | 27% |
| बायोमास जलाना | 20% | 12% |
| सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर | 27% | 17% |
| अन्य | 65 | 11% |
कैसे प्रदुषण करें कम?
1. ट्रांसपोर्ट में बदलाव: दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक और जीरो-एमिशन गाड़ियों का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए. भीड़भाड़ वाली सड़कों और डीजल गाड़ियों को कंट्रोल करने से हवा साफ होगी.
2. फैक्ट्रियां और पावर प्लांट: छोटी और पुरानी फैक्ट्रियों को साफ-सफाई का ध्यान रखने और साफ तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए जरूर कहना चाहिए. कोयले और गंदा फ्यूल छोड़कर साफ एनर्जी का इस्तेमाल करना चाहिए.
3. कचरा और बायोमास जलाना: कचरे का सही तरीके से निपटान और रीसाइक्लिंग करनी चाहिए. खुले में जलाने की बजाय साफ फ्यूल का इस्तेमाल करना सही रहता है.
4. सड़क और कंस्ट्रक्शन से धूल: सड़कों को पक्का करें और समय-समय पर सफाई करें. हरे पौधे और मशीन से सफाई धूल कम करने में मदद करते हैं.
5. हवा में सूक्ष्म कण (PM): जिन चीजों से हवा में प्रदूषण बढ़ता है उन पर ध्यान देना बहुत ज्यादा जरूरी है. हवा में बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण सूक्ष्म कण होते हैं, तो उन्हें कंट्रोल करने के तरीके अपनाएं. इससे हवा में छोटे-छोटे प्रदूषक कण भी कम होंगे.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क