हरी मिर्च काटते वक्त नहीं जलेंगे हाथ, आजमाएं मास्टरशेफ का बताया ये आसान नुस्खा

खाना बनाते समय लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत अगर किसी चीज से होती है, तो वो हरी और लाल मिर्च काटने से होती है. मिर्च को काटने के बाद हाथ में काफी जलन महसूस होती है, जिसकी वजह से लोग इससे बचने की कोशिश करते हैं. लेकिन मास्टरशेफ ने बताया है कि डेयरी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से जलन महसूस नहीं होती है.

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हरी मिर्च का अचार बहुत लाजवाब लगता है (PHOTO:ITG) हरी मिर्च का अचार बहुत लाजवाब लगता है (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

How to stop chili burn on hands: भारतीय खाने में हरी मिर्च का बहुत अहम रोल होता है, लेकिन इसे काटने से लोग उतना ज्यादा ही डरते हैं. हरी हो या लाल मिर्च दोनों को ही जब काटते हैं तो हाथों में एक जलन सी होती है और यह जलन जल्दी ठीक भी नहीं होती है. मिर्च की जलन वाकई किसी बुरे सपने से कम नहीं होती, खासकर तब जब आप गलती से अपनी आंखों को छू लें.

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इस वजह से लोग हरी मिर्च काटने के नाम से ही दूर भागते हैं और उनको मिक्सर में पीस लेते हैं. मिर्च काटने के बाद जलन को कम करने के लिए लोग कई तरीके के नुस्खे अपनाते हैं, लेकिन अब आपकी इस मुश्किल का हल मिल गया है. मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने अपने लेटेस्ट इंस्टाग्राम वीडियो में हरी मिर्च काटने के बाद होने वाली जलन से बचने के लिए आसान उपाय बताया है. 

हरी मिर्च काटने से पहले आजमाएं ये नुस्खा

मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो बताया है कि हरी और लाल मिर्च काटने से लगने वाली जलन से बचने के लिए आप डेयरी प्रोडक्ट वाला उपाय कर सकते हैं. उनका कहना है कि हरी मिर्च काटने से पहले हाथों पर दूध, दही और देसी घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट लगाने से काटने वक्त और बाद में हाथ में जलन नहीं होती है. 

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जलन के पीछे का विज्ञान क्या है? 

मिर्च में जलन का असली विलेन कैप्साइसिन (Capsaicin) नाम का एक केमिकल कंपाउंड होता है. आइए समझते हैं कि डेयरी प्रोडक्ट्स इस पर कैसे काम करते हैं.

मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन एक तेल बेस्ड कंपाउंड है. यही कारण है कि इसे सिर्फ पानी से धोने पर आराम नहीं मिलता, क्योंकि तेल और पानी आपस में नहीं मिलते. 

हरी-लाल मिर्च

जलन से कैसे बचाते हैं हेयरी प्रोडक्ट

मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने जो नुस्खा बताया है, उसके पीछे का विज्ञान काफी दिलचस्प और सटीक है. यहां डेयरी प्रोडक्ट्स दो तरह से काम करते हैं-

दूध और दही में 'कैसियोन' नाम का प्रोटीन पाया जाता है, यह प्रोटीन एक 'डिटर्जेंट' की तरह काम करता है. यह कैप्साइसिन के अणुओं को जकड़ लेता है और उन्हें स्किन के रिसेप्टर्स से अलग कर देता है.

दूसरा कारण यह है कि कैप्साइसिन फैट-सॉल्युबल होता है, जब आप अपने हाथ पर घी या मलाई लगाते हैं, तो मिर्च का तीखा तेल आपकी स्किन में समाने के बजाय घी के साथ मिल जाता है, जिसे बाद में आसानी से पोंछा या धोया जा सकता है. 

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