Coconut Chutney Authentic Recipe: साउथ इंडियन फूड्स जैसे डोसा, इडली, वड़ा, अप्पम, उत्तपम आदि का जिक्र आते ही उनके साथ मिलने वाली सफेद नारियल की चटनी का स्वाद जुबान पर आ जाता है. वैसे तो आजकल मिक्सर ग्राइंडर का जमाना है लेकिन जो स्वाद सिलबट्टे पर पिसी हुई चटनी में आता है, वह मशीनों में मुमकिन नहीं. हाल ही में नोएडा में पिछले 15 साल से साउथ इंडियन स्टॉल लगाने वाले संजय कुमार ने उनकी चटनी की सीक्रेट रेसिपी बताई है जो उन्हें एक अलग पहचान देती है. उनकी चटनी में इतना स्वाद इसलिए आता है क्योंकि वो आज भी चटनी बनाने के लिए पुराने पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. अगर आप भी घर पर वही उनकी स्टाइल में चटनी और उसका ऑथेंटिक स्वाद पाना चाहते हैं तो उनका ये तरीका काफी काम आएगा.
संजय कुमार ने बताया कि नारियल की चटनी बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है, बस कुछ ही चीजों की जरूरत होती है. इसके लिए आपको नीचे कुछ बेसिक सामान चाहिए, जैसे...
तैयारी के लिए सबसे पहले नारियल को छोटे टुकड़ों में काट लें ताकि सिलबट्टे पर पीसने में आसानी हो. चने की दाल को 10 मिनट के लिए भिगो दें, इससे चटनी का बेस काफी स्मूथ बनता है.
चटनी बनाने की शुरुआत में सबसे पहले आप भीगी हुई चने की दाल और नारियल से करें. इसे पीसते समय पानी का इस्तेमाल बहुत कम करें ताकि अच्छे से पीस सकें. पानी की जगह आप 1 चम्मच दही भी डाल सकते हैं ताकि चटनी का रंग भी बरकरार रहेगा. पत्थर के दबाव से जब नारियल अपना तेल छोड़ता है तो चटनी में एक नेचुरल चमक आएगी. जब मिश्रण बारीक होने लगे तो उसके बाद उसमें कटी हुई हरी मिर्च डाल लें. मिश्रण को हल्का सा दरदरा छोड़ दें और फिर तड़के के लिए तैयार रहें.
तड़का लगाने के लिए एक फ्राई पैन लेकर उसमें तेल गर्म करें और फिर उसमें काली सरसों और लाल सूखी हुई खड़ी मिर्च डालें. इसके बाद निकाली हुई चटनी में तड़का लगाएं और स्वादानुसार नमक डालें. आपकी चटनी खाने के लिए तैयार है.
आजकल की बिजी लाइफ में लोग स्वाद की अपेक्षा सुविदा को अधिक महत्व देते हैं. लेकिन जब मिक्सी की तेज ब्लेड्स नारियल और मसालों को काटती हैं तो घर्षण (Friction) की वजह से पैदा होने वाली गर्मी चटनी के असली स्वाद और उसके प्राकृतिक तेल को सुखा देती है.
वहीं सिलबट्टे पर जब किसी भी चीज को पीसा जाता है तो उसका फ्लेवर वैसा का वैसा ही रहती है इसलिए सिलबट्टे ही उस पर बनी चटनी में स्वाद, सोंधापन, टेक्सचर बना रहता है.
मृदुल राजपूत