सबरीमाला सहित महिलाओं के अधिकार से जुड़े मामलों में पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षकारों से 14 मार्च तक लिखित दलीलें कोर्ट को सौंपने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दोनों पक्ष से एक-एक नोडल पर्सन भी नियुक्त कर दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से एक-एक वकील को नोडल पर्सन नियुक्त किया है. यानी सभी पक्षकार अपने-अपने पक्ष के नोडल पर्सन (एडवोकेट) को अपनी दलीलें लिखित तौर पर देंगे. सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त नोडल एडवोकेट उन दलीलों को तरतीब से सारणीबद्ध कर कोर्ट तक पहुंचाएंगे.
जिन मामलों में सुनवाई होनी है, उनमें सबरीमला मंदिर में खास उम्र वर्ग की महिलाओं के प्रवेश, दाऊद बोहरा मुस्लिम समाज में लड़कियों के खतने, पारसी महिलाओं के विरासत के अधिकार जैसे मामले शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में दाखिल होने संबंधित मामले भी विचाराधीन हैं.
यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ हेट स्पीच याचिका खारिज की, असम हाईकोर्ट भेजा
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इन याचिकाओं पर नौ जजों की बेंच के सामने खुली अदालत में सुनवाई की बात तय की है. सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने खुली सुनवाई की बात तय की है, उसमें जस्टिस जॉय माल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे.
यह भी पढ़ें: धर्म की 'जरूरी प्रथा' कौन तय करेगा? सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट में होगा बड़ा संवैधानिक मंथन
गौरतलब है कि 10 फरवरी 2020 को सबरीमला सहित अन्य याचिकाओं पर पिछली बार नौ जजों की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी. अब छह साल बाद उस पीठ में से सिर्फ जस्टिस सूर्यकांत ही कार्यरत हैं. बाकी सभी आठ जज रिटायर हो चुके हैं. लिहाजा नौ जजों की नई पीठ की अगुआई भी सीजेआई स्वयं कर सकते हैं.
संजय शर्मा