'देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद न बने', याचिका पर आ गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी. इस याचिका में याचिकाकर्ता ने यह मांग की थी कि बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम से देशभर में किसी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाई जानी चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका (Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका (Photo: ITG)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी. इस याचिका में यह मांग की गई थी कि देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद न बने. सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला भी सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद बनने या नहीं बनने को लेकर स्थिति साफ हो गई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी यह जनहित याचिका खारिज कर दी है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई थी कि बाबर आक्रमणकारी था. उसके नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जानी चाहिए और ना ही किसी मस्जिद का नाम उसके नाम पर रखा जाना चाहिए.

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याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील भी दी गई कि बाबर ने हिंदुओं को गुलाम कहा था. याचिकाकर्ता की मांग थी कि ऐसे कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही बाबरी मस्जिद बनने देने या नहीं बनने देने को ले कर जारी चर्चा थमने की उम्मीदें जताई जा रही हैं.

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गौरतलब है कि टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद के निर्माण का शिलान्यास करने की घोषणा की थी. 6 दिसंबर को प्रतीकात्मक तौर पर बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य की नींव रख भी दी गई. 11 फरवरी से निर्माण कार्य शुरू भी हो गया, लेकिन इसे लेकर बंगाल से यूपी तक सियासी पारा चढ़ गया था.

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