'घर ऐसे घेर लिया, जैसे किसी आतंकी को पकड़ने आए हों', सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा के वकील की दलील

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हिमंता को संवैधानिक चरवाहा बताया. उन्होंने सर्वोच्च अदालत में यह दलील दी कि अधिकतर धाराएं जमानती हैं. असम सरकार ने पवन खेड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ को जरूरी बताया है.

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पवन खेड़ा के वकील ने सीएम हिमंता के बयानों का बार-बार किया उल्लेख (Photo: PTI) पवन खेड़ा के वकील ने सीएम हिमंता के बयानों का बार-बार किया उल्लेख (Photo: PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर दूसरे देशों के पासपोर्ट रखने और विदेश में बेनामी संपत्ति के आरोप लगा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा मुश्किलों में घिर गए हैं. असम पुलिस पवन खेड़ा की तलाश में जुटी है. वहीं, गुवाहाटी हाईकोर्ट खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है. पवन खेड़ा की राहत की उम्मीद अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है. सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही है.

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पवन खेड़ा का पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के ' पेड़ा' और 'पेलूंगा' जैसे बयानों का बार-बार जिक्र किया और कहा कि इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि पवन खेड़ा पब्लिक फिगर हैं. उनके कानून से फरार होने की आशंका नहीं है. अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे अभूतपूर्व मामला बताते हुए कहा कि गिरफ्तारी की मेरी आशंका अभियोजक ने खुद पूरी तरह से साफ कर दी है.

वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टर आंबेडकर को भी याद किया और कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह चरवाहे की तरह बोलते देख डॉक्टर आंबेडकर समाधि में भी चौंक जाएंगे. उन्होंने सर्वोच्च अदालत में यह दलील दी कि आरोप सही हैं या नहीं, यह ट्रायल का विषय है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आरोप में भी ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके लिए गिरफ्तारी की जरूरत हो. मानहानि के आरोप पर पूछताछ के लिए वह उपलब्ध हैं ही.

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उन्होंने कहा कि अब अदालत ही देखे कि खेड़ा की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने 50 से 70 पुलिसकर्मी गए और उनके निजामुद्दीन स्थित घर को घेर लेते हैं, जैसे किसी आतंकी को पकड़ने आए हों. पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को संवैधानिक रेम्बो और संवैधानिक चरवाहा बताया और कहा कि एकमात्र प्रश्न जिस पर विचार किया जाना है, इसे उसी संदर्भ के प्रकाश में देखें. उन्होंने कहा कि यह भारी पक्षपातपूर्ण है.

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पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह अदालत स्वतंत्रता का समर्थन करती है और अधिकतर धाराएं जमानती हैं. उन्होंने कहा कि ये धाराएं गिरफ्तारी निश्चित नहीं करती हैं. असम सरकार और असम पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत में पूछताछ के बिना अब तक की जांच से पता चलता है कि जो दस्तावेज दिखाए गए थे, वह फर्जी और जाली थे. ऐसा कोई पासपोर्ट किसी भी प्राधिकरण की ओर से जारी नहीं किया गया था.

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तुषार मेहता ने पवन खेड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी बताया और दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष के रूप में हम यह पता लगाना चाहते हैं कि दस्तावेजों को किसने बनाया, किसने उनकी मदद की. अगर किसी और ने दिया, तो आपको किसने दिया. यदि दस्तावेजों पर किसी देश की आधिकारिक मुहर लगी है, तो यह गंभीर है.

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