महिला को MP हाईकोर्ट ने बताया ‘आदर्श भारतीय पत्नी’, कहा- 20 साल से अलग रह रहे पति को भी सहा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक तलाक मामले में पत्नी के धैर्य, निष्ठा और सहनशीलता की सराहना करते हुए उसे आदर्श भारतीय पत्नी कहा. कोर्ट ने पाया कि पति के करीब 20 साल से दूर रहने के बावजूद पत्नी ने ससुराल नहीं छोड़ा, अपने ससुर-सास की सेवा करती रही और शादी के प्रतीक नहीं त्यागे.

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक मामले में महिला को आदर्श भारतीय पत्नी कहा (Photo: Representational) मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक मामले में महिला को आदर्श भारतीय पत्नी कहा (Photo: Representational)

नलिनी शर्मा

  • भोपाल ,
  • 08 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ एक पति की अपील सुन रही थी, जिसमें उसने निचली अदालत के तलाक से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी थी. पति-पत्नी की शादी गांव पिपलाडा, इंदौर में हुई थी और 2002 में बेटे का जन्म हुआ था.

पति का आरोप था कि पत्नी उसे पसंद नहीं करती, उस पर शराब पीने और अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाती, गर्भावस्था में खुश नहीं थी और बच्चे के जन्म के बाद मायके चली गई. पत्नी ने इन आरोपों को झूठा बताया और कहा कि पति का एक महिला सहकर्मी से प्रेम संबंध था, जबकि वह हमेशा वैवाहिक दायित्व निभाने के लिए तैयार रही.

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पति ने पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप

कोर्ट ने पाया कि पति के दूर रहने के बाद भी पत्नी ससुराल में सास-ससुर और देवर-ननद के साथ संयुक्त परिवार में रही. उसने कभी घर नहीं छोड़ा, न ही पति या उसके परिवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज किया. उसने अपने विवाह के प्रतीक मंगलसूत्र और सिंदूर नहीं त्यागे और अपने कर्तव्यों को निभाती रही.

पत्नी ने विपरीत परिस्थितियों में दिखाया धैर्य

कोर्ट ने कहा कि यह पत्नी आदर्श भारतीय नारी के गुणों का प्रतीक है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और संस्कार बनाए रखती है. कोर्ट ने तलाक की याचिका खारिज करते हुए पति को अपने उपेक्षित और अनादरपूर्ण व्यवहार से लाभ लेने से रोका.

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