बस WhatsApp पर बात, स्टोर रूम न जाना... कैश कांड में इन वजहों से फंसते चले गए जस्टिस वर्मा?

होली की रात 14 मार्च को दिल्ली के तुगलक क्रेसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी. उस वक्त वे और उनकी पत्नी भोपाल में थे. घर पर उनकी बेटी और बुजुर्ग मां मौजूद थीं. आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन कर्मियों ने एक स्टोर रूम में नकदी से भरे बोरों में आग लगी हुई देखी. इसके बाद घटनास्थल से दो वीडियो सामने आने पर मामले ने तूल पकड़ा.

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जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास में दिखे थे जले हुए नोट. जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास में दिखे थे जले हुए नोट.

नलिनी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 19 जून 2025,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से जली हुई नकदी की घटना को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि उनके संदिग्ध और अस्वाभाविक व्यवहार ने जांच समिति को उनके विरुद्ध फैसला लेने के लिए मजबूर किया. समिति की रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जो न्यायपालिका में गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

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दरअसल, होली की रात 14 मार्च को दिल्ली के तुगलक क्रेसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी. उस वक्त वे और उनकी पत्नी भोपाल में थे. घर पर उनकी बेटी और बुजुर्ग मां मौजूद थीं. आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन कर्मियों ने एक स्टोर रूम में नकदी से भरे बोरों में आग लगी हुई देखी. इसके बाद घटनास्थल से दो वीडियो सामने आने पर मामले ने तूल पकड़ा.

इस सनसनी के बाद CJI संजीव खन्ना ने 22 मार्च को जांच समिति का गठन किया, जिसमें पंजाब-हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल थे. समिति ने 42 दिनों की जांच के बाद जो रिपोर्ट सौंपी. समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि घटना वाले दिन न्यायाधीश वर्मा के आवास के स्टोर रूम में भारी मात्रा में नकदी मौजूद थी. यह निष्कर्ष जस्टिस वर्मा के उस दावे के खिलाफ था, जिसमें उन्होंने किसी भी नकदी की मौजूदगी से इनकार किया था. 

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रिपोर्ट के मुख्य बिंदु जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ गए-

1. रहस्यमयी व्हाट्सएप चैट: जांच के दौरान जस्टिस वर्मा के स्टाफ ने बताया कि 14-15 मार्च की रात उनसे केवल व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क हुआ. ये संवाद एन्क्रिप्टेड थे, जिससे डाटा रिकवर नहीं हो सका. समिति ने इसे असामान्य और जानबूझकर सीमित संपर्क का संकेत माना.

2. दिल्ली लौटने के बाद भी स्टोर रूम नहीं देखा: जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी दिल्ली लौटने के बाद भी स्टोर रूम एक बार भी देखने नहीं गए, जहां घटना हुई थी. उन्होंने इसे परिवार की चिंता से जोड़ा, पर समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति नुकसान का जायजा जरूर लेता.

3. षड्यंत्र का दावा, पर कोई शिकायत नहीं: रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस वर्मा ने घटना को साजिश बताया लेकिन न पुलिस, न हाईकोर्ट, न ही सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई, न ही किसी तरह की औपचारिक जांच की मांग की.

4. चुपचाप ट्रांसफर स्वीकार किया: जांच रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने अपने ट्रांसफर आदेश को उसी दिन मंजूर कर लिया, जिस दिन उसे प्रस्तावित किया गया था. उन्हें अगली सुबह तक जवाब देने का समय था, लेकिन उन्होंने बिना कोई सवाल पूछे तुरन्त स्वीकार कर लिया.

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अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-

- सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे: जिस स्टोर रूम में आग लगी, वहां निगरानी रखने वाले सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे. जस्टिस वर्मा ने कहा कि ये कैमरे सुरक्षा विभाग के नियंत्रण में थे और उन्हें नहीं पता कि वे क्यों बंद थे.

- वीडियो सबूत में दिखे नोट ही नोट: 15 मार्च की आधी रात को HC सुनील कुमार ने अपने मोबाइल से एक 11 सेकंड का वीडियो बनाया. इसमें स्टोर रूम के दरवाज़े के सामने और पीछे बड़ी मात्रा में नोट पड़े हुए दिख रहे हैं. वीडियो में एक शख्स की आवाज़ आती है – "नोट ही नोट हैं... देखो दिख रहे हैं."

- दूसरा वीडियो जिसमें कहा गया सारे जल गए साहब: पहले वीडियो के करीब 20 सेकंड बाद, एक और 22 सेकंड का वीडियो शूट किया गया. इसमें एक व्यक्ति एक अधिकारी से कहता है, 'सारे बर्न हो गए साहब', यानी कि सारे नोट जल चुके हैं.

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