21 साल बाद बेस्ट बेकरी कांड के 2 आरोपियों के खिलाफ 4 मार्च को आएगा फैसला, इस केस में अबतक क्या-क्या हुआ?

21 साल पहले हुए बेस्ट बेकरी कांड में कोर्ट 4 मार्च को अपना फैसला सुनाएगी. मामला 2002 के गुजरात दंगों के दौरान वडोदरा में एक बेकरी को भीड़ द्वारा जलाए जाने से जुड़ा है. इसमें 14 लोगों की मौत हुई थी.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

विद्या

  • मुंबई,
  • 18 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने कहा कि वह दो सप्ताह बाद बेस्ट बेकरी केस का सामना कर रहे दो आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाएगी. आरोपी हर्षद रावजीभाई सोलंकी और मफत मणिलाल गोहिल पिछले 10 साल से जेल में बंद हैं. आरोपियों को 13 दिसंबर 2013 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. आरोपियों पर 19 अन्य व्यक्तियों के साथ पहले बड़ौदा फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा मुकदमा चलाया गया था और फिर 2003 में उन्हें राहत मिल गई थी.

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मामला 2002 के गुजरात दंगों के दौरान वडोदरा में एक बेकरी को भीड़ द्वारा जलाए जाने से जुड़ा है. इसमें 14 लोगों की मौत हुई थी और बेकरी मालिक की बेटी जहीरा शेख ने 21 आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. जून 2003 में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था, क्योंकि शेख सहित प्रमुख गवाह मुकर गए थे.

हालांकि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की मदद से शेख ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने शेख के आवेदन पर पुनर्जांच और पुनर्विचार का आदेश दिया और मुकदमे को मुंबई स्थानांतरित कर दिया.

सुनवाई के बीच सोलंकी और गोहिल को दो अन्य लोगों के साथ अजमेर विस्फोट मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें बेस्ट बेकरी रिट्रियल में फरार अभियुक्त के रूप में दिखाया गया. 21 आरोपियों में से 9 को दोषी ठहराया गया. गोहिल की ओर से पेश हुए वकील प्रकाश सालसिंगीकर और वकील संजीव पुनालेकर ने इस मामले में हुई मौतों को चुनौती नहीं दी थी, इसलिए अभियोजन पक्ष को केवल अभियुक्तों से संबंधित गवाहों को लाना था. मामले में 10 गवाहों को लाया गया, क्योंकि मामले के कुछ जांच अधिकारियों का भी निधन हो गया था.

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वहीं, अभियुक्तों की भूमिका साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के पास जो चार चश्मदीद गवाह थे, उनमें से वे तीन को ले आए थे. तीन चश्मदीद गवाह सोलंकी की पहचान नहीं कर सके, लेकिन एक प्रत्यक्षदर्शी ने गोहिल को पहचान लिया, लेकिन उसका नाम या उस भूमिका को याद नहीं कर सका, कि उसने दंगे में निभाई थी.

एडवोकेट सालसिंगीकर ने अदालत के सामने दलील दी कि चश्मदीद गवाह और गोहिल पड़ोस में रहते थे, इसलिए एक-दूसरे को पहचानने की संभावना ज्यादा हो जाती है, लेकिन उनका बयान उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई सबूत नहीं है.

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