स्ट्रीट डॉग्स और पशुओं को लेकर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के तहत जानवरों को भी दया, सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है. हर जानवर एक संवेदनशील प्राणी है. इसलिए उनकी सुरक्षा का दायित्व सभी का है. कोर्ट ने ये भी कहा कि स्ट्रीट डॉग्स का खाने का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है.
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार को कहा, "हर जानवर को कानून के तहत दया, सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है. हर जानवर एक संवेदनशील प्राणी है. इसलिए उनकी सुरक्षा का दायित्व न सिर्फ सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों बल्कि हर नागरिक का है."
हाईकोर्ट ने कहा, "जानवरों को कोई दर्द या पीड़ा नहीं होनी चाहिए. जानवरों के प्रति क्रूरता उन्हें मानसिक पीड़ा देती है. जानवर भी हमारी तरह सांस लेते हैं और उनके पास भी हमारी जैसी भावनाएं हैं. जानवरों को खाना, पीना, शेल्टर, अच्छे बर्ताव, मेडिकल केयर की जरूरत होती है." कोर्ट ने कहा, "स्ट्रीट डॉग्स को खाने का अधिकार है और लोगों को उन्हें खिलाने का अधिकार है, लेकिन यहां ये भी ध्यान रखना होगा कि इसके लिए किसी दूसरे के अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा."
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दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) की ओर से स्ट्रीट डॉग्स और पेट डॉग्स को खाना खिलाने को लेकर 26 फरवरी 2015 को बनाई गई गाइडलाइंस को ठीक से लागू करने के निर्देश दिए हैं.
कोर्ट ने कहा कि सभी कानूनी एजेसियों इस बात सुनिश्चित करेंगी कि स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वाले व्यक्ति के साथ कोई उत्पीड़न या रोक-टोक न हो. कोर्ट ने कहा, "हर डॉग एक क्षेत्रीय प्राणी है, इसलिए उसे गली में ऐसी जगह पर खाना खिलाना और रखा जाना चाहिए, जहां लोग न रहते हों या कम आते-जाते हों या फिर जिन जगहों का आम लोग कम से कम इस्तेमाल करते हों."
संजय शर्मा