दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है, जिसमें मेट्रो में 100 फीसदी क्षमता से लोगों को बैठने की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि मेट्रो का इस्तेमाल करना अनिवार्य नहीं है. आप चाहें तो इस्तेमाल न करें. इसी के साथ यह तय हो गया है कि फिलहाल दिल्ली मेट्रो 100 फीसदी सीटिंग कैपेसिटी के साथ ही रफ्तार भरती रहेगी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हमें नीतिगत मामले में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? कोर्ट ने कहा कि यह देखना अधिकारियों का काम है. कोर्ट ने यह भी कहा कि आप आज कह रहे हैं कि क्षमता 50 फीसद होनी चाहिए. कल कोई और आकर 20 फीसद व्यवस्था की मांग करेगा. फिर क्या करेंगे?
26 जुलाई से पूरी क्षमता के साथ चली दिल्ली मेट्रो
कोविड-19 की स्थिति में सुधार के मद्देनजर 26 जुलाई से दिल्ली मेट्रो ने पूर्ण क्षमता के साथ परिचालन शुरू कर दिया यानी अब सभी सीटों पर बैठकर लोग यात्रा कर सकते हैं, लेकिन खड़े होकर यात्रा करने पर अब भी पाबंदी है. इससे पहले सात जून को 50 प्रतिशत सीट क्षमता के साथ ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया था.
यात्रियों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर 16 मेट्रो स्टेशन पर 16 अतिरिक्त द्वार भी खोल दिए गए हैं, ताकि यात्रियों की आवाजाही को सुलभ बनाया जा सके. डीएमआरसी ने बताया कि जिन स्टेशनों पर अतिरिक्त द्वार खोले गए हैं, उनमें जनकपुरी पश्चिम, करोल बाग, वैशाली, कश्मीरी गेट, केन्द्रीय सचिवालय और एमजी रोड शामिल हैं.
दिल्ली में अप्रैल और मई महीने में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों और मौत की संख्या में वृद्धि देखी गई थी. हालांकि, जुलाई महीने से स्थिति में सुधार आया है, जिसके बाद सरकार चरणबद्ध तरीके से शहर को दोबारा खोल रही है. नवीनतम अनलॉक दिशानिर्देश के तहत राष्ट्रीय राजधानी की जीवनरेखा दिल्ली मेट्रो का परिचालन शत प्रतिशत सीट क्षमता के साथ करने की घोषणा की गई, लेकिन यात्रियों को खड़े होकर सफर करने की अनुमति नहीं दी गयी है.
ट्विटर पर एक प्रयोक्ता द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिखा कि कोच के भीतर कई यात्री खड़े होकर सफर कर रहे थे. इसके अलावा, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, कश्मीरी गेट जैसे स्टेशनों पर अब भी भीड़ लग रही है लेकिन डीएमआरसी के अधिकारियों ने कहा कि कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए भीड़ घटाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
डीएमआरसी ने एक बयान में कहा, ‘‘कुछ ट्वीट, फोटो और वीडियो में दिखा है कि लोग ट्रेन के भीतर खड़े होकर यात्रा कर रहे थे, लेकिन अब से संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक खड़े होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं है.’’ डीएमआरसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि कई लोगों को ऐसा लगा कि सीटों की पूरी क्षमता से परिचालन का मतलब मेट्रो को पूरी तरह खोल दिया गया है. इस कारण से सीटों से ज्यादा संख्या में लोग कोच के भीतर चले गए.
संजय शर्मा