ईरान युद्ध के बाद भारत में भी गैस सप्लाई चिंता का विषय बन रही है. कई शहरों से गैस सप्लाई कमी होने की खबरें आ रही हैं. इसी बीच, भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है. इसके तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने और कुछ खास हाइड्रोकार्बन को LPG बनाने के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये ECA है क्या और इसे लागू होने के बाद क्या बदलाव होगा...
क्या है ECA?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) भारत सरकार का एक कानून है, जो जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करता है. इसका उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोककर उचित कीमतों पर आवश्यक वस्तुएं सुनिश्चित करना है. इसके तहत सरकार स्टॉक सीमा तय कर सकती है.
ये अधिनियम कहता है, 'सरकार को आवश्यक वस्तुओं के प्रोडक्शन, सप्लाई, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने के लिए आदेश जारी करने का अधिकार है, जो कि आर्थिक संरक्षण अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आता है. केंद्र सरकार ने 12 फरवरी, 2007 को इस अधिनियम में कई चीजों को अपडेट किया था, जिसमें ड्रग्स, उर्वरक (जैविक, अजैविक), खाद्य पदार्थ (खाद्य तेल बीज और तेल शामिल), पूरी तरह से कपास से बना हैंक यार्न, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, कच्चा जूट और जूट वस्त्र और कई तरह बीज, सब्जियां शामिल हैं.
सीधे शब्दों में कहें तो कुछ परिस्थितियों में सरकार इस अधिनियम के जरिए कुछ अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति को आम आदमी तक बनाए रखने के लिए कुछ नियमों में बदलाव करती है और कोशिश करती है सप्लाई चेन प्रभावित ना हो.
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 सरकार को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण आदि को नियंत्रित करने का अधिकार देती है. इसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर धारा 7 के तहत दंड का भी उल्लेख है. यानी सरकार समय समय पर इस कानून का इस्तेमाल कर कुछ परिस्थितियों में आवश्यक सामान के भंडारण आदि पर रोक लगाती है. कई बार सरकार गेहूं के भंडार पर प्रतिबंध लगाती है, उसमें व्यापारी, खुदरा व्यापारी के आधार पर एक लिमिट सेट की जाती है.
सरकार ने और क्या आदेश दिए?
सरकार ने आदेश दिया है कि रिफाइनरियां और पेट्रोकेमिकल प्लांट गैसों का इस्तेमाल अब पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट या दूसरे औद्योगिक कामों के लिए नहीं कर सकेंगे. यानी इन गैसों को सीधे LPG बनाने में ही लगाया जाएगा, ताकि घरों में रसोई गैस की कमी न हो. साथ ही सरकार का कहना है कि LPG भारत में घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी ईंधन है, इसलिए इसकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है.
साथ ही तेल मार्केटिंग कंपनियों को भी निर्देश दिया गया है कि इस व्यवस्था के तहत मिलने वाली LPG सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को ही दी जाए. यह नया आदेश 5 मार्च को जारी पुराने आदेश की जगह लेगा और अगले आदेश तक लागू रहेगा.
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