वंदे मातरम् पर नए नियम जान लीजिए... किन-किन परिस्थितियों में हो सकती है जेल?

अब वंदे मातरम् को भी राष्ट्रगान के बराबर दर्जा मिलने वाला है, जिसके बाद से वंदे मातरम् के अपमान पर जेल भी हो सकती है. तो जानते हैं कि आखिर इसके नए नियम हैं क्या?

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वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाएगा. (Photo: AI Generated) वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाएगा. (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

अब वंदे मातरम् के प्रोटोकॉल को लेकर भारत सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. सरकार ने अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके बाद से बंकिम चंद्र चटर्जी रचित ‘वंदे मातरम्’ पर वही नियम और प्रतिबंध लागू होंगे जो अभी राष्ट्रगान के लिए हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर अब वंदे मातरम् के गायन को लेकर क्या-क्या नियम होंगे और उन नियम का पालन ना करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है. 

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सरकार ने क्या फैसला लिया है?

दरअसल, सरकार ने सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. इस अधिनियम में अब वंदे मातरम् को भी शामिल कर लिया जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा मिलेगा. अभी प्रस्ताव स्वीकार किया गया है और जैसे ही संशोधन लागू होगा, तब से नए नियम भी लागू हो जाएंगे. बता दें कि  ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में  राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े नियम हैं और उनका अपमान अपराध माना जाता है. 

ये अधिनियम क्या कहता है?

1971 के राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम में राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के साथ राष्ट्रगान के लिए नियम हैं. इनमें राष्ट्रगान के लिए कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति जानबूझकर भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में व्यवधान पैदा करता है उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा. 

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अगर कोई दूसरी बार ये अपराध करता है तो उसके लिए जेल का प्रावधान है. अधिनियम के अनुसार, जो कोई व्यक्ति, जिसे धारा 2 या धारा 3 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध ठहराया गया हो, ऐसे किसी अपराध के लिए फिर से दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो उसे दूसरी बार के या उसके बाद के हर बार के अपराध के लिए कम से कम एक वर्ष के कारावास से दंडित किया जा सकेगा. 

राष्ट्रीय ध्वज के लिए क्या कहा गया है?

वंदे मातरम् की स्थिति में क्या होगा?

अब जब वंदे मातरम् भी इस अधिनियम में शामिल हो जाएगा तो राष्ट्रगान वाले नियम इस पर लागू होंगे. यानी इसके अपमान पर सजा का भी प्रावधान है.  अब जानते हैं कि इसे लेकर नियम क्या है...

- दिशा-निर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है. इसे प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए. इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं. 

- एक जरूरी बात यह है कि अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’. दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें. 

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- जब वंदे मातरम् का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए.

- सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है. फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम् बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी. 

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