ट्रंप-नेतन्याहू के लिए आसान नहीं है ईरान के खर्ग पर फतह! ऐसी है वहां की सिक्योरिटी

क्या अमेरिका और इजरायल ईरान के खर्ग आइलैंड को निशाना बनाने की तैयारी में है? तो जानते हैं इस द्वीप पर कैसी सिक्योरिटी है...

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खर्ग आईलैंड को अब अमेरिका का अगला निशाना माना जा रहा है. (Photo: Getty) खर्ग आईलैंड को अब अमेरिका का अगला निशाना माना जा रहा है. (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

मिडिल ईस्ट की जंग में अब सबसे ज्यादा चर्चा में है खर्ग द्वीप, जिसे ईरान की लाइफ लाइन कहा जाता है. अब अमेरिका और इजरायल यहां हमला करना चाहता है. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना की ओर से यहां हमले की बात भी कही गई है. हालांकि ईरान का कहना है कि अगर खर्ग पर हमला होता है तो अमेरिका के साथ काम करने वाली कंपनियों से संबंधित तेल और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट कर दिया जाएगा. 

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इसी बीच, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि खर्ग द्वीप पर ईरान की काफी ज्यादा सिक्योरिटी है और उस पर कब्जा करना काफी मुश्किल है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ईरान के खर्ग द्वीप पर कैसी सिक्योरिटी है और जब ईरान-इराक में जंग हुई थी, उस वक्त यहां क्या हुआ था...

कैसी है खर्ग द्वीप की सिक्योरिटी?

Iranintl की रिपोर्ट के अनुसार, खर्ग आईलैंड सिर्फ एक आर्थिक संपत्ति है, बल्कि ये एक महत्वपूर्ण सैन्य स्थान भी है. इस रिपोर्ट के अनुसार, इस आईलैंड की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के पास है. आईआरजीसी नौसेना की भी वहां मौजूदगी है, जिसमें 112वीं ज़ोल्फ़ाघर सरफेस कॉम्बैट ब्रिगेड भी शामिल है, जो फारस की खाड़ी में नौसैनिक युद्ध के लिए डिजाइन की गई नावों का संचालन करती है.

इसके अलावा उनके पास खास तरह के पोत भी हैं, जो जहाज-रोधी मिसाइलों, रॉकेट और नौसैनिक खानों से लैस होते हैं. वे इतने खतरनाक हैं कि वे कॉमर्शियल जहाजों या आसपास के बड़े नौसैनिक जहाजों को खतरा पहुंचा सकते हैं. 

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इस आइलैंड के आसपास के सैन्य बुनियादी ढांचे में तटीय मिसाइल लॉन्चर, रडार सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और ड्रोन सुविधाएं शामिल हैं, जिनका उपयोग उत्तरी फारस की खाड़ी में होने वाली गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जाता है. ईरान की नियमित नौसेना, जिसे आर्मी नेवी के नाम से जाना जाता है, वो भी बुशहर-खर्ग क्षेत्र में एक्टिव है और बारूदी सुरंग बिछाने के अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर और नौकाओं का उपयोग करती है. 

क्या कोई टनल भी है?

कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जाता है कि वहां कुछ खास टनल है, जिसमें आईआरजीसी के जवान हैं और उनमें मिलिट्री से जुड़ी कई सुविधाएं हैं.  इसके साथ ही यहां अंडरग्राउंड टनल्स या बंकर का जिक्र भी होता है. कहा जाता है कि यहां नेवल माइन्स, मिसाइल स्टोरेज और अन्य मिलिट्री इक्विपमेंट के लिए अंडरग्राउंड टनल्स है. हालांकि, टनल या बंकर से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. 

ईराक की जंग में क्या हुआ था?

1985 की कई न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित ईरान के मुख्य तेल टर्मिनल खर्ग द्वीप को इराकी हवाई हमलों से काफी हद तक बचाया गया था. उस वक्त भी ईरान ने वहां जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और एक हवाई अड्डे के साथ एक मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम वहां तैनात किया हुआ था. रिपोर्ट्स के अनुसार, 1984 के शुरुआती हमलों में खर्ग के टर्मिनल और कार्गो हैंडलिंग जेट्टीज को नुकसान पहुंचा था .उस वक्त लोडिंग कैपेसिटी 6.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbd) से घटकर 2.5 मिलियन mbd रह गई थी. इराक ने यहां काफी नुकसान होने का दावा किया था, लेकिन ईरान ने इसे कुछ ही दिन फिर तैयार कर लिया था. इसके बाद से यहां सिक्योरिटी को काफी बढ़ा दिया था.

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उस वक्त यहां 1,000 आर्मी जवान थे. 1960 में बना विसाल तेल परिसर उस वक्त भी ईरान के 90 प्रतिशत से अधिक तेल निर्यात को संभालता था. यहां चार गहरे पानी के बर्थ हैं, जहां 500,000 टन क्षमता वाले टैंकर आ सकते हैं. 

कैसा है खर्ग द्वीप?
बता दें कि इस आईलैंड का नाम स्थानीय बोलियों और यूरोपीय मानचित्रों में बदलता रहा है, जिसे खर्ग, खारक, खाराज और खारेज के रूप में दर्ज किया गया है. यूरोपीय औपनिवेशिक काल के दौरान, पुर्तगालियों ने सबसे पहले खार्ग और अन्य खाड़ी द्वीपों पर कब्जा किया था. डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने हितों की रक्षा के लिए एक भारी सैन्य सुरक्षा वाला किला बनवाया था. 

बता दें कि खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट से महज 25 किलोमीटर (15 मील) दूर स्थित है. अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, बुशहर बंदरगाह से 55 किमी (34 मील) उत्तर-पश्चिम में और ईरानी मुख्य भूमि से करीब 28 किमी के बराबर की दूरी पर स्थित, खर्ग द्वीप ईरान की आर्थिक रीढ़ है. यहां हर रोज अहवाज़, मारुन और गचसरन से तेल आता है औरतेल पाइपलाइनों के माध्यम से उस इस द्वीप तक पहुंचता है. यह ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का 90% तेल प्रोसेस किया जाता है. 

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यहां गहराई ज्यादा होने की वजह से विशालकाय सुपरटैंकर सुरक्षित रूप से डॉक कर सकते हैं और मुख्य रूप से एशियाई बाजारों के लिए कच्चे तेल को लोड कर सकते हैं, जिसमें चीन अग्रणी आयातक है. 

ईरान के लिए कितना जरूरी है खर्ग द्वीप?

अपने छोटे आकार के बावजूद, खर्ग द्वीप ईरान के लिए एक आर्थिक जीवन रेखा है, क्योंकि यह देश के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा संभालता है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यह द्वीप लंबे समय से ईरान की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है. 1984 के एक सीआईए दस्तावेज़ में कहा गया था कि ये सुविधाएं "ईरान की तेल प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण हैं, और इनका निरंतर संचालन ईरान की आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक है.

रॉयटर्स के अनुसार, ईरान वैश्विक तेल की आपूर्ति का लगभग 4.5% हिस्सा प्रदान करता है, जो प्रतिदिन 3.3 मिलियन बैरल कच्चे तेल और 1.3 मिलियन बैरल कंडेनसेट और अन्य तरल पदार्थों का उत्पादन करता है. 
 

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