ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी मौत भोपाल स्थित उनके ससुराल में हुई थी. शव का एक बार पोस्टमार्टम भी किया जा चुका है, लेकिन मायके वाले दोबारा पोस्टमार्टम करवाना चाहते हैं. इसलिए भोपाल स्थित पोस्टमार्टम हाउस यानी मुर्दाघर में ट्विशा का शव माइनस 4 डिग्री सेल्सियस में पड़ा है. 9 दिनों से शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है. पुलिस ने शव के सड़ने की आशंका जताते हुए परिवार वालों को जल्द से जल्द बॉडी अपने कब्जे में लेने की रिक्वेस्ट भी की है. अगर और लंबे समय तक शव को संरक्षित रखाना पड़ेता है तो, माइनस 80 डिग्री वाले माहौल की आवश्यकता होगी. ऐसी व्यवस्था भोपाल पुलिस के पास नहीं है.
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर कितने दिनों में शव सड़ने लग जाता है और कब तक इसे मोर्चरी में रखा जा सकता है. यह शव लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रहती है. पोस्टमार्टम हाउस (मॉर्चरी) में शव को कितने समय तक रखा जाएगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है. जैसे मौत का कारण, कानूनी जांच, परिवार की मौजूदगी और शव की पहचान हुई है या नहीं. इसको लेकर भारत के अलग-अलग राज्यों और अस्पतालों के नियम भी थोड़ा अलग हो सकते हैं.
कब तक शव को मोर्चरी में रखा जा सकता है
पुलिस शव को मॉर्चरी में कुछ दिनों तक सुरक्षित रखती है. कई जगह यह अवधि 72 घंटे से लेकर 7 दिन तक हो सकती है. अज्ञात शवों को पहचान के उद्देश्य से कम से कम 72 घंटे तक पुलिस कांस्टेबल की निगरानी में मुर्दाघर में रखा जाता है और विशेष मामलों में पुलिस के अनुरोध पर अतिरिक्त आवश्यक अवधि के लिए भी रखा जा सकता है.
देश के कानून के अनुसार, मृत्यु के उन सभी मामलों में, जहां आगे कानूनी जांच की जरूरत होती है, शवों के संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत की पुलिस की होती है. पुलिस जांच जारी रहने तक अस्पतालों के मुर्दाघर सिर्फ शवों को संरक्षित रखने के लिए एक सहायक के रूप में कार्य करता है.
शव की हिरासत और जिम्मेदारी सीधे पुलिस की होती है. इसमें किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होता है. इसलिए पोस्टमार्टम हाउस में शव कितने दिनों तक संरक्षित रखे जा सकते हैं. यह पुलिस जांच या शव की भविष्य में क्या जरूरत है, इस पर निर्भर करता है. इस तरह जरूरत के हिसाब से 72 घंटे से लेकर महीनों तक शव संरक्षित किए जा सकते हैं. बशर्ते, जहां शव रखे गए हैं, वहां उसे लंबे समय तक संरक्षित रखने की सुविधा हो.
कैसे और क्यों शव को किया जाता है संरक्षित
कभी -कभी चिकित्सा या कानूनी मामलों में शवों को भारत और विदेशों में दूरस्थ स्थानों तक ले जाने के लिए आवश्यक होने पर शव को लंबे समय तक संरक्षित भी किया जाता है. भविष्य में अध्ययन के लिए शरीर के विच्छेदन के उद्देश्य से भी शवों को संरक्षित किया जाता है. दुर्लभ मामलों में, सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के शव का भी संरक्षण किया जाता है.
आमतौर पर पोस्टमार्टम हाउस या मोर्चरी में शव को 24 घंटे या उससे ज्यादा 72 घंटे तक सुरक्षित रखने के लिए काफी कम तापामन वाले चैंबर होते हैं. 72 घंटे से ज्यादा समय के लिए शव को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज बने होते हैं. यहां माइनस 3 या 4 डिग्री सेल्सियस टेंप्रेचर होता है. वहीं एक हफ्ते से भी ज्यादा दिनों तक शव सुरक्षित रखने के लिए डीप कोल्ड स्टोरेज यानी माइनस 50 डिग्री से भी कम टेम्प्रेचर वाले चैंबर की जरूरत होती है और लंबे समय के लिए शव को संरक्षित करने की जरूरत होने पर रसायनिक उपचार किया जाता है.
कब सड़ना शुरू हो जाता है शव
मृत्यु के कुछ घंटे बाद ही शव सड़ने लगता है. 10 से 12 घंटे में शरीर अकड़ जाता है. फिर 24 से 36 घंटे शरीर फूलने लगता है और कोशिकाएं खुद नष्ट होने लगती है. बॉडी का सेल्फ डिकंपोज प्रोसेस शुरू हो जाता है. इसके बाद बैक्टिरिया एक्टिव होकर बॉडी को खाने लगते हैं. सामान्य तापमान में 72 घंटे के बाद बॉडी से दुर्गंध आनी शुरू हो जाती है और इस दौरान शरीर का रंग काला होने जीता है. फिर पूरी बॉडी सड़ने लग जाती है.
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