जब होर्मुज की हुई थी नाकेबंदी, फंस गए थे ईरान के सारे जहाज... क्या फिर होगा नाटो और अमेरिका से टकराव?

कभी अंग्रेजों ने ईरान को सबक सिखाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था. इस वजह से ईरान और ब्रिटेन-अमेरिका में टकराव भी हुआ और इसके परिणाम स्वरूप वहां सत्ता बदल गई. एक बार फिर से कुछ ऐसे ही हालात बन रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फिर से ब्रिटेन सहित नाटो देश या अमेरिका होर्मुज के लिए ईरान की नाकाबंदी करेंगे.

Advertisement
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अंग्रेजों ने कर लिया था कब्जा (Photo - AP) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अंग्रेजों ने कर लिया था कब्जा (Photo - AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 20 मील चौड़ा है. इेस वजह से यह ईरान, इराक, कुवैत और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले टैंकरों के लिए एक भौगोलिक 'चोक पॉइंट' बन जाता है. यही कारण है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जिसका भी नियंत्रण होता है, वह वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है.

Advertisement

1979 की ईरानी क्रांति के बाद से, जब  शाह को सत्ता से बेदखल कर ईरान में इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई, ईरान ने होर्मुज पर अपना अधिकार जताया है. इसके बाद  दशकों से अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के दौरान, ईरानी शासन ने बार-बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने और वैश्विक तेल बाजार में अराजकता फैलाने की धमकी देत रहे और पिछले महीने ईरान पर हमले के साथ ही यह रास्ता बंद कर दिया गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हमेशा से ईरान का कब्जा नहीं था. 

कभी ईरान के तेल पर था अंग्रेजों का कब्जा
कभी ईरान के तेल पर अंग्रेजों का एकाधिकार था. ईरान के तेल का सबसे ज्यादा दोहन ब्रिटेन ने ही किया. जब ईरान ने अपने तेल का राष्ट्रीयकरण कर दिया तो अंग्रेज बौखला गए और ईरान को सबक सिखाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी कर दी थी और ईरान के तेल वाले सारे जहाज फंस गए थे.

Advertisement

आज जो हालात बन रहे हैं और जिस तरह से नाटो देश होर्मुज को खोलने का दबाव ईरान पर डाल रहें उससे कहीं न कहीं यह सवाल जरूर उठता है कि क्या ब्रिटेन समेत दूसरे नाटो देशों का भी ईरान से टकराव होगा या अमेरिका और ईरान होर्मुज पर कब्जा करेंगे? ऐसे में जानते हैं कैसे अंग्रेजों ने ईरान को सबक सिखाने के लिए होर्मुज को बंद कर दिया था.  

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कैसे हैं हालात, वहां फंसे भारतीय ने बयां किया मंजर

1908 में ईरान में तेल की खोज के बाद अंग्रेजों ने सबसे ज्यादा इसका दोहन किया. ईरानी तेल के दोहन के लिए ब्रिटेन ने शुरुआत में  एंग्लो-पर्शियन ऑयल कंपनी बनाई जो बाद में बीपी (ब्रिटिश पेट्रोलियम) बनी. इस कंपनी ने  1933 में ईरान के तेल निर्यात पर नियंत्रण पाने के लिए एकतरफा समझौता किया था.

अंग्रेजों ने कैसे होर्मुज को बंद कर दिया था
हिस्ट्री चैनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेलावेयर विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर रुडोल्फ मैथी का कहना है कि 1951 में ईरानी प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ ने घोषणा की कि ईरान अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर रहा है, जिसमें उस समय अबादान में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी भी शामिल थी. प्रधानमंत्री मोसादेघ ने तेल का राष्ट्रीयकरण करके अंग्रेजों को चुनौती देने का दुस्साहस किया, यह तर्क देते हुए कि यह हमारा तेल है और हमें इससे अंग्रेजों की तुलना में अधिक लाभ कमाना चाहिए.

Advertisement

 ब्रिटिशों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रॉयल नेवी को अबादान बंदरगाह के चारों ओर नाकाबंदी करने और किसी भी ईरानी तेल टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने से रोकने के लिए भेजा.ब्रिटिशों ने ईरान को बाकी दुनिया से पहुंच को पूरी तरह से रोक दिया था. 

उस वक्त मोसादेघ ने जो हिम्मत दिखाई, उस वजह से वो ईरान के  राष्ट्रीय नायक बन गए. मोसादेघ के समर्थन में ईरानी प्रदर्शनकारियों ने शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया. शाह को पश्चिमी तेल कंपनियों के हाथों की कठपुतली के तौर पर ईरान में देखा जाता था. 

तेल के लिए ईरान में करवा दिया था तख्तापलट
इसके बाद 1953 में, ब्रिटिश और अमेरिकियों ने सीआईए की मदद से ईरान में तख्तापलट करके मोसादेघ को सत्ता से हटा दिया और शाह को फिर से सत्ता में बैठा दिया था. इसके परिणामस्वरूप एक समझौता हुआ जिसके तहत तेल से होने वाले मुनाफे को ईरान और पश्चिमी तेल कंपनियों के बीच बराबर-बराबर बांटा गया.

यह भी पढ़ें: क्या होर्मुज में जहाजों को टोल देना पड़ता है... इस पर किन देशों का हक, कैसे होता है मैनेजमेंट

होर्मुज हजारों वर्षों से अस्तित्व में है और यह हमेशा से समुद्री व्यापार का केंद्र रहा है, जो मिडिल ईस्ट को मुख्य रूप से भारत से जोड़ता है. ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो फारस की खाड़ी में तेल को लेकर होने वाले संघर्ष नया नहीं है. ऐसे में अब जब होर्मुज एक बार फिर बंद हो चुका है, तो इसको लेकर ब्रिटेन या दूसरे नाटो देश मिलकर दोबारा इस पर कब्जे की कोशिश कर सकता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement