नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को आयोजित हुई नीट 2026 की परीक्षा को पेपर लीक की चर्चाओं के बीच रद्द कर दिया है. नीट की परीक्षा रद्द होने के बाद राजस्थान चर्चा में है, क्योंकि पेपर लीक के तार राजस्थान से ही जुड़े हैं. इससे पहले भी राजस्थान कई पेपर लीक के मामलों को लेकर खबरों में रह चुका है. इस बीच, 2009 का वो दौर याद आता है, जब यहां बोर्ड परीक्षा का पेपर परीक्षा शुरू होने से कई घंटे पहले स्टूडेंट्स, पैरेंट्स के पास आ जाता था. एक-दो नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षा के कई पेपर परीक्षा से पहले ही लोगों तक पहुंच जाते थे.
उस वक्त सोशल मीडिया नहीं था, टेलीग्राम चैनल नहीं थे, वॉट्सऐप भी नहीं थी… लेकिन फिर भी पेपर काफी तेजी से फैलते थे और परीक्षा की टाइमिंग से पहले सर्कुलेट हो जाते थे. दरअसल, ये बात है राजस्थान बोर्ड के दसवीं के पेपर्स की और साल 2009 में परीक्षा से पहले ही पेपर मिल जाते थे. हालात इतने खराब थे कि दोपहर 3 बजे होने वाली परीक्षा का पेपर सुबह 8 बजे तक शहरों और कस्बों में घूमने लगता था. छात्र परीक्षा केंद्र जाने से पहले ही सवालों के जवाब रट चुके होते थे और परीक्षा केंद्र में पता चलता कि वो ही 26 सवाल हैं, जो सुबह मिला था.
फोटोकॉपी दुकानों पर तैनात थी पुलिस
उस वक्त सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि फोटोकॉपी की दुकानों पर सुबह-सुबह पेपर फोटोकॉपी करवाने वाले लोग मिल जाया करते थे और कई मौके तो ऐसे भी थे, जब दुकान वाले भैया के पास पहले से वो पेपर होता था. कई लोग 50 और 100 रुपये में बोर्ड परीक्षा के पेपर बेचते मिल जाते थे. छात्रों और अभिभावकों के बीच एक अजीब डर भी था और लालच भी “अगर बाकी सबके पास पेपर है, तो हमारा बच्चा पीछे क्यों रहे?
स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि सरकार को फोटोकॉपी की दुकानों पर पुलिस तैनात करनी पड़ी. अब आप अंदाजा लगा लीजिए कि परीक्षा के पेपर इतने सर्कुलेट हो रहे थे कि पुलिस को फोटोकॉपी दुकानों की निगरानी करनी पड़ रही थी. ये किसी फिल्म का दृश्य नहीं था, बल्कि उस वक्त पेपर लीक की कहानी थी. उस साल पेपर परीक्षा से पहले इतने कॉमन हो गए कि बोर्ड ने ये माना कि 4 पेपर लीक हो गए हैं और दसवीं बोर्ड के 4 पेपर फिर से हुए.
आज NEET को लेकर जो बहस चल रही है, उसमें राजस्थान का नाम बार-बार सामने आ रहा है. लेकिन सच ये है कि राजस्थान का पेपर लीक से रिश्ता नया नहीं है और 2009 की वो घटना इस बात का बड़ा उदाहरण थी.
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