प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील करने के बाद एक बड़ा फैसला लिया है. पीएम मोदी ने अपने काफिले को आधा करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही काफिले में इलेक्ट्रॉनिक कारों को शामिल करने के लिए कहा गया है. इस फैसले के बाद पीएम मोदी के काफिले की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर पीएम के काफिले में कितनी कारें होती हैं और उनके काफिले को लेकर क्या प्रोटोकॉल रहता है.
प्रधानमंत्री के काफिला में कितनी कार होंगी, किस फॉरमेशन में चलेगी ये एसपीजी प्रोटोकॉल के जरिए तय होता है और गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत पूरा काफिला चलता है. पीएम के काफिले में स्टेट पुलिस भी होती है और एसपीजी सिक्योरिटी होती है. ये दोनों पीएम काफिले में सिक्योरिटी का काम करते हैं.
कितनी गाड़ियां होती हैं?
पीएम काफिले में कितनी गाड़ियां होती हैं, ये तय नंबर नहीं है. यह संख्या स्थान, खतरे के आकलन, वहां की परिस्थितियों के आधार पर तय होता है. जैसे अगर पीएम रोड शो कर रहे हैं तो काफिला अलग हो सकता है और अगर वो दिल्ली में आवास से संसद जा रहे हैं तो काफिला अलग हो सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री के काफिले में आमतौर पर 13 से 17 वाहन शामिल होते हैं. यह संख्या बदलती रहती है.
इस काफिले में बुलेटप्रूफ रेंज रोवर आदि हाई-एंड सिक्योरिटी कार होती हैं, जिनमें पीएम सफर करते हैं. इसके अलावा जैमर से लैस टोयोटा फॉर्च्युनर, कम्युनिकेशन वाहन, एम्बुलेंस और सपोर्ट वैन शामिल होती हैं. साथ ही इसमें रूट क्लियरेंस गाड़ियां होती हैं, जो एसडीएम, डीसीपी आदि देखते हैं. ये सिक्योरिटी प्रोटोकॉल हर जगह होता है. ये सभी गाड़ियां काले रंग की होती है. इसके अलावा भी पीएम काफिले में कई कार होती हैं.
कैसा होता है काफिला?
पीएम काफिले का हर वाहन एक तय प्रोटोकॉल के तहत चलता है. टीओआई में एक सिक्योरिटी ऑफिसर के हवाले से बताया गया है कि शुरुआत एक पायलट वाहन से होती है, जिसे दिल्ली या संबंधित राज्य पुलिस का एसीपी रैंक का अधिकारी चलता है. इसके बाद इसके बाद एक और सिक्योरिटी कार होती है, जो पुलिस की सुरक्षा विंग से जुड़ी रहती है.
आगे पुलिस की गाड़ियां होती हैं, जो हर राज्य में बदलती रहती हैं. इसके बाद पीएम बॉक्स होता है, जिसमें प्रधानमंत्री की कार समेत कुछ गाडि़यां होती हैं, जो आमतौर पर काले रंग की होती हैं. इसी हिस्से में पीएम के साथ एसपीजी के कमांडो, स्टाफ और जरूरी सुरक्षा कर्मी होते हैं.
इसके बाद एक रूट इंसपेक्शन वाहन चलता है, जिसमें दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर होता है जो आगे के रास्ते की निगरानी करता है. फिर एक और सुरक्षा वाहन काफिले को सपोर्ट देता है. सबसे आखिर में चलता है टेल कार, जिसमें ट्रैफिक पुलिस के ऑफिसर होते हैं, जो पूरे काफिले की सुरक्षा और समन्वय की अंतिम जिम्मेदारी संभालते हैं.
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