अक्सर कहा जाता है कि 'पैसा पेड़ों पर नहीं उगता', लेकिन विज्ञान की दुनिया में हो रहे कुछ रिसर्च इस कहावत को थोड़ा चुनौती देते नजर आते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि सीधे पेड़ों पर सोना तो नहीं उगता, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में पौधों की मदद से मिट्टी से सोने के कण हासिल किए जा सकते हैं. यही वजह है कि दुनिया भर के शोधकर्ता इस अनोखी तकनीक पर लगातार स्टडी कर रहे हैं. इस प्रोसेस में देखा गया है कि कुछ पौधों में मिट्टी से मेटल को अपने अंदर जमा करने की विशेष क्षमता होती है. जब ये पौधे धातु से भरपूर मिट्टी में उगते हैं, तो उनकी जड़ें मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों के साथ-साथ मेचल के सूक्ष्म कणों ( Tiny particle) को भी सोख लेती हैं. धीरे-धीरे ये मेटल पौधों के तनों, पत्तियों और अन्य हिस्सों में जमा होने लगती है. बाद में इन पौधों को काटकर उनकी बायोमास (जैविक सामग्री) से धातु को अलग किया जा सकता है.
बहुत कम मात्रा में पाया जाता है सोना
इसी तकनीक को Phytomining कहा जाता है. यह पारंपरिक खनन का एक वैकल्पिक तरीका माना जाता है, जिसमें भारी मशीनों से जमीन खोदने की बजाय पौधों की मदद से मेटल को इकट्ठा किया जाता है. हालांकि सोना मिट्टी में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और यह आसानी से पानी में घुलता भी नहीं है, इसलिए पौधों के लिए इसे सीधे सोखना मुश्किल होता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने प्रयोगों में पाया है कि अगर मिट्टी में कुछ खास रसायन मिलाए जाएं, तो सोना घुलनशील रूप में आ सकता है. ऐसी स्थिति में पौधे जड़ों के जरिए सोने के बेहद छोटे कणों को भी अपने अंदर खींच सकते हैं. यही वजह है कि कई वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में फाइटोमाइनिंग तकनीक कम गुणवत्ता वाली खदानों, खनन के कचरे (माइन टेलिंग्स) और धातु से भरपूर मिट्टी से सोना निकालने का एक पर्यावरण-अनुकूल और अपेक्षाकृत सस्ता तरीका बन सकती है. हालांकि अभी यह तकनीक बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में नहीं आई है, लेकिन इस पर तेजी से रिसर्च जारी है.
पौधे कैसे खींचते हैं मेटल
वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ पौधों में मिट्टी से मेटल को जड़ों के जरिए सोखने की खास क्षमता होती है. इन्हें हाइपर एक्यूमुलेटर (Hyperaccumulator plants) कहा जाता है. ये पौधे अपने पत्तों और तनों में मेटल जमा कर लेते हैं. बाद में इन पौधों को काटकर उनकी राख से धातु निकाली जा सकती है. रिसर्च वेबसाइटों के अनुसार, कई पौधे निकल, जिंक, कैडमियम जैसी धातुओं को आसानी से जमा कर लेते हैं. उदाहरण के लिए Noccaea caerulescens नाम का पौधा जिंक और कैडमियम जैसी धातुओं को बड़ी मात्रा में सोख सकता है.
क्या पौधे सोना भी सकते हैं?
वैज्ञानिकों का कहना है कि सोना मिट्टी में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और यह पानी में आसानी से घुलता भी नहीं है. इसी वजह से पौधों के लिए सीधे सोना खींचना मुश्किल होता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने प्रयोगों में दिखाया है कि अगर मिट्टी में खास रसायन मिलाए जाएं, तो सोना घुलनशील बन सकता है. ऐसी स्थिति में कुछ तेज़ी से बढ़ने वाले पौधे सोने के छोटे-छोटे कणों को जड़ों के जरिए अपने अंदर खींच सकते हैं. करीब 15 साल पहले न्यूजीलैंड की Massey University से जुड़े वैज्ञानिक Chris Anderson ने एक प्रयोग में दिखाया था कि सरसों जैसे पौधे रासायनिक रूप से तैयार मिट्टी से सोने के कण खींच सकते हैं. उदाहरण के तौर पर Brassica juncea यानी सरसों के पौधे का इस्तेमाल इस प्रयोग में किया गया था.
रिसर्च में क्या सामने आया?
चीन की Sun Yat-sen University के वैज्ञानिकों ने भी कुछ पौधों में सोने के बेहद छोटे कण यानी गोल्ड नैनोपार्टिकल्स पाए जाने की जानकारी दी है. इससे यह समझने में मदद मिली कि पौधे पर्यावरण से धातुओं को कैसे अवशोषित ( Extract) करते हैं.
खदानों में भी हो सकता है इस्तेमाल
फाइट माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल खासकर उन जगहों पर किया जा सकता है जहां खदानों के आसपास मिट्टी में थोड़ा-बहुत सोना बचा रह जाता है. पारंपरिक खनन में अक्सर सारा सोना नहीं निकल पाता और काफी मात्रा में धातु मिट्टी या खदान के कचरे में रह जाती है. ऐसे में वैज्ञानिक तेजी से बढ़ने वाले पौधे जैसे सरसों, सूरजमुखी या तंबाकू उगाते हैं. जब पौधे पूरी तरह बढ़ जाते हैं, तब मिट्टी में केमिकल मिलाए जाते हैं ताकि सोना घुल सके. इसके बाद पौधे पानी के साथ सोने के कण भी सोख लेते हैं और अपनी पत्तियों और तनों में जमा कर लेते हैं. बाद में पौधों को काटकर उनसे सोना निकाला जाता है.
पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प
पारंपरिक खनन में भारी मशीनें, बड़े गड्ढे और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान भी पहुंचता है. इसके मुकाबले फाइट माइनिंग को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक माना जाता है. पौधे मिट्टी को स्थिर रखते हैं, जिससे कटाव भी कम होता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक खदानों के कचरे या कम गुणवत्ता वाली मिट्टी से कीमती धातुएं निकालने का एक पर्यावरण-अनुकूल तरीका बन सकती है.
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