नेपाल में महीने में दो बार सैलरी, तो कहीं हर हफ्ते आता है पैसा...ये हैं वेतन के अनोखे सिस्टम

नेपाल में नए-नए प्रधानमंत्री बने बालेन शाह ने अब कर्मचारियों को महीने में दो बार सैलरी देने की घोषणा की है. नेपाल में होने वाले इस बदलाव की काफी चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं नेपाल के अलावा और कहां सैलरी की टाइमिंग काफी अलग और स्पेशल कंडीशन वाले हैं.

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दुनिया के कई देशों में महीने में चार बार मिलती है सैलरी (Photo - Pexels) दुनिया के कई देशों में महीने में चार बार मिलती है सैलरी (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने देश में कामगारों को महीने में दो बार सैलरी देने का ऐलान किया है. भारत जैसे देश के लिए ये अनूठी बात हो सकती है, जहां सैलरी की टाइमिंग मंथली बेसिस होती है. लेकिन, दुनिया में ऐसे भी कई देश हैं, जहां नेपाल की तरह की महीने में दो बार वेतन मिलता है. कहीं-कहीं तो साप्ताहिक वेतन भुगतान का भी प्रावधान है. वहीं कुछ ऐसे भी देश हैं जहां सैलरी की एक फिक्स टाइमिंग है.

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अमेरिका में भारत के काफी लोग रहते हैं. हमारे आसपास कोई न कोई ऐसा परिवार रहता है, जिनके फैमिली मेंबर यूएस में रह रहे हो. फिर भी हमनें शायद ही कभी यूएस की सैलरी टाइमिंग पर ध्यान दिया होगा. अमेरिका में वेतन भुगतान कई प्रकार से होता है. जिस तरह भारत में मंथली सैलरी आती है, यूएस में दो सप्ताह में एक बार सैलरी का भुगतान आम बात है. वहां व्यापक रूप से 15 दिनों में सैलरी मिलती है या फिर मंथली वेतन भुगतान होता है. वहां के कुछ स्टेट में साप्ताहिक सैलरी भुगतान पर रोक है. वहां व्यापक तौर पर हर दूसरे शुक्रवार को सैलरी मिलती है या महीने की  15वीं और आखिरी तारीख को.

UK के इन सेक्टर में महीने में चार बार मिलती है सैलरी 
इसी तरह यूके यानी ब्रिटेन में सैलरी की टाइमिंग अलग-अलग है. वहां कुछ सेक्टर में साप्ताहिक सैलरी दी जाती है. हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और ट्रेड सेक्टर में साप्ताहिक वेतन आम है, जबकि प्रोफेशनल सेक्टर में मासिक वेतन का प्रचलन अधिक है. वहां सैलरी मिलने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं है. इसके लिए कोई राष्ट्रीय नियम नहीं है. भुगतान की तारीखें कंपनी की नीति या उद्योग के स्टैंडर्ड द्वारा तय की जाती हैं.

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इन देशों में महीने में 2 या 4 बार आती है सैलरी
इसी तरह अर्जेंटीना, फिनलैंड, जॉर्जिया, होंडुरस, आयरलैंड और अंगोला, जैसे देशों में साप्ताहिक, अर्धमासिक, द्विसाप्ताहिक और मासिक सभी विकल्प मान्य हैं. इन देशों में महीने की आखिरी तारीख या 15वें दिन सैलरी क्रेडिट हो जाती है. अंगोला में तो 25 या 26 तारीख तक सैलरी देना तय है.    

कहीं साप्ताहिक तो कहीं पाक्षिक वेतन पर पाबंदी
इसी तरह आर्मीनिया में अर्धमासिक, पाक्षिक और मासिक सैलरी की अनुमति है. सरकार व कई कंपनियां इसका अनुपालन करती है. लेकिन, यहां  साप्ताहिक भुगतान की अनुमति नहीं है. वहीं ऑस्ट्रेलिया में साप्ताहिक और मंथली बेसिस पर सैलरी मिलती है, लेकिन अर्धमासिक भुगतान की अनुमति नहीं है. 

इस देश में दो बार सैलरी देना अनिवार्य
वहीं बेलोरूस में सैलरी देने को लेकर अजीब नियम है. यहां कानूनी तौर पर, वेतन का भुगतान महीने में दो बार किया जाना चाहिए और दो भुगतानों के बीच 15 दिनों से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए. बेलारूस में आमतौर पर महीने की पंद्रहवीं और आखिरी तारीख को सैलरी मिलती है. 

कंबोडिया में सिर्फ अर्धमासिक वेतन भुगतान का प्रावधान है. कानूनी रूप से यही एकमात्र मान्य विकल्प है. यहां मासिक या साप्ताहिक तौर पर सैलरी नहीं मिल सकती है. महीने के पंद्रहवें और आखिरी दिन सैलरी क्रेडिट हो जाती है. वहीं कनाडा, डेनमार्क, डोमिनिकन गणराज्य, इजिप्ट, मेक्सिको, रूस जैसे देशों में सैलरी की टाइमिंग को लेकर काफी फ्लेक्सिब्लिटी है. यहां अर्धमासिक और द्विसाप्ताहिक भुगतान सबसे आम हैं. इसके अलावा साप्ताहिक और मंथली सैलरी भी दी जाती है.

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