भारत में स्कूली पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस बार मामला National Council of Educational Research and Training (NCERT) की किताबों से जुड़ा है, जिस पर देश की सबसे बड़ी अदालत Supreme Court of India ने भी कड़ी टिप्पणी की है. कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में शामिल एक अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया है कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली टीम के तीन सदस्यों को भविष्य में नई पीढ़ी के लिए पाठ्यक्रम या किताबें बनाने की प्रक्रिया से अलग किया जाए. अदालत की इस टिप्पणी के बाद शिक्षा जगत और अकादमिक हलकों में बहस तेज हो गई है कि आखिर स्कूल की किताबें तैयार करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और जिम्मेदार होनी चाहिए.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मामला खासतौर पर कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब से जुड़ा है. इस किताब के एक अध्याय को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किताब तैयार करने वाली टीम के तीन सदस्यों को भविष्य में नई किताबें बनाने के काम से अलग कर दिया जाए.
मामला शुरू कैसे हुआ?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब NCERT की एक किताब के चैप्टर पर आपत्ति जताई गई. आरोप था कि किताब का एक हिस्सा विवादित है और उसे तैयार करने की प्रक्रिया भी सही तरीके से नहीं हुई. इस मामले को लेकर अदालत में याचिका दायर की गई. सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठा कि किताब तैयार करने वाली टीम में कौन-कौन लोग शामिल थे और उन्होंने किस तरह से पाठ्यक्रम बनाया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने इस अध्याय को तैयार किया है, उन्हें भविष्य में नई पीढ़ी के लिए पाठ्यक्रम बनाने की प्रक्रिया से अलग रखा जाए.
सुप्रीम कोर्ट किन 3 लोगों की बात कर रहा है?
अदालत ने जिन तीन लोगों को लेकर सवाल उठाए, उनमें ये नाम शामिल हैं:
इन तीनों को NCERT की किताब तैयार करने वाली टीम का हिस्सा बताया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि NCERT की किताब तैयार करने वाली टीम के तीन सदस्यों से दूरी बनाई जाए. अदालत ने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने की प्रक्रिया में इन लोगों को शामिल करने का कोई कारण नहीं दिखता. यह मामला कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब से जुड़े विवाद के बाद सामने आया. इसी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की. अदालत के अनुसार, जिन तीन लोगों को भविष्य में पाठ्यक्रम या किताब बनाने की प्रक्रिया से अलग रखने की बात कही गई है.
1. Michel Danino कौन हैं?
मिशेल डैनिनो IIT गांधीनगर में गेस्ट प्रोफेसर रह चुके हैं. वे NCERT के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम से जुड़े “Curricular Area Group” के चेयरमैन भी रहे हैं. फ्रांस में जन्मे डैनिनो 1970 के दशक में भारत आ गए थे. भारतीय सभ्यता, आध्यात्मिकता और संस्कृति में उनकी गहरी रुचि रही है. उन्होंने भारतीय सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता से जुड़े विषयों पर कई लेक्चर दिए हैं. 2010 में उन्होंने IIT कानपुर में भी इसी विषय पर लेक्चर की सीरीज दी थी. उनकी किताबों और विचारों में यह तर्क भी मिलता है कि प्राचीन हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु-सरस्वती सभ्यता’ के रूप में देखा जाना चाहिए.
2. Alok Prasanna Kumar कौन हैं?
आलोक प्रसन्न कुमार Vidhi Centre for Legal Policy के सह-संस्थापक हैं. उन्होंने NALSAR University of Law से 2008 में कानून की पढ़ाई की है. वे NCERT की किताब तैयार करने वाली टीम में इकलौते ऐसे सदस्य थे जिनकी पृष्ठभूमि कानून की है. उन्होंने न्यायपालिका और कॉलेजियम सिस्टम जैसे मुद्दों पर भी लेख लिखे हैं. 2022 में उन्होंने न्यायपालिका में पारदर्शिता की जरूरत पर भी टिप्पणी की थी.
3. Suparna Diwakar कौन हैं?
सुपर्णा दिवाकर NCERT की सामाजिक विज्ञान की किताबों के विकास से जुड़ी टीम का हिस्सा रही हैं. वे शिक्षा और विकास क्षेत्र से जुड़ी विशेषज्ञ मानी जाती हैं. उन्हें राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और किताबों के विकास में योगदान देने वाले लोगों में शामिल किया गया था. उन्होंने पहले Adhyatma Chetana नाम की एक गैर-सरकारी संस्था के साथ भी काम किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनका नई पीढ़ी के लिए पाठ्यक्रम या किताबों की तैयारी में शामिल होना उचित नहीं है, इसलिए इन्हें इस प्रक्रिया से अलग किया जाना चाहिए.
किताब बनाने की प्रक्रिया क्या होती है?
भारत में स्कूल की किताबें बनाने की एक तय प्रक्रिया होती है. पहले राष्ट्रीय पाठ्यक्रम (Curriculum) तय किया जाता है. इसके बाद विशेषज्ञों की टीम किताब का ड्राफ्ट तैयार करती है.फिर उस पर समीक्षा और संशोधन किया जाता है. अंत में किताब को स्कूलों में पढ़ाने के लिए जारी किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ और अकादमिक लोग शामिल होते हैं.
NCERT का क्या कहना है?
NCERT का कहना है कि किताब बनाने की प्रक्रिया में कई विशेषज्ञ और समितियां शामिल होती हैं. किसी भी अध्याय को तैयार करने से पहले उस पर चर्चा और समीक्षा की जाती है. हालांकि इस मामले में यह आरोप लगा कि जिस अध्याय को लेकर विवाद हुआ, उसे पूरी प्रक्रिया के तहत ठीक से चर्चा में नहीं लाया गया था.
सोशल मीडिया और राजनीति में भी बहस
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में भी बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों का कहना है कि स्कूल की किताबें बहुत सावधानी से तैयार की जानी चाहिए, क्योंकि वही बच्चों की सोच को प्रभावित करती हैं. वहीं, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि इतिहास और समाज से जुड़े विषयों पर अलग-अलग विचार हो सकते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में संतुलन जरूरी है.
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