कुद्स डे... क्यों रमजान के इस दिन ही ईरान में हुआ हमला, इजरायल से कनेक्शन!

ईरान में रमजान के अंतिम शुक्रवार को कुद्स डे मनाया जाता है. इसे यरुशलम पर इजरायल के कब्जे के विरोध का प्रतीक माना जाता है. आज इसी कुद्स डे के मौके पर जब विरोध जुलूस निकाला गया था तो एयर स्ट्राइक हो गया. ऐसे में जानते हैं ये कुद्स डे और इससे जुड़ा कुद्स फोर्स क्या है.

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कुद्स डे पर ईरान में बड़ा हवाई हमला हुआ, इसमें वहां के सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल अली लारीजानी भी शामिल थे (फोटो - ITG) कुद्स डे पर ईरान में बड़ा हवाई हमला हुआ, इसमें वहां के सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल अली लारीजानी भी शामिल थे (फोटो - ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

ईरान में आजादी स्क्वायर पर कुद्स दिवस को लेकर जुलूस निकाला गया था, जहां  जोरदार हवाई हमला हुआ. कुद्स दिवस यरुशलम पर इजरायल के कब्जे के विरोध स्वरूप रमजान के अंतिम जुमे को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत इस्लामी क्रांति के बाद फिलीस्तीन के समर्थन में हुई थी.  उस दौर में कुद्स दिवस के साथ ही आईआरजीसी और कुद्स फोर्स जैसे संगठन की भी नींव पड़ी थी. 

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इसी कुद्स दिवस के दौरान आज तेहरान के आजादी स्क्वायर पर विरोध जुलूस निकाला गया था. इसमें ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल अली लारीजानी सहित कई सीनियर अधिकारी शामिल थे. तभी वहां एयर स्ट्राइक हो गया.  इस क़ुद्स दिवस की रवायत 1979 में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खोमैनी ने फिलिस्तीन-समर्थक और जायोनी-विरोधी विरोध दिवस के तौर पर की थी.

कुद्स डे का इजरायल से कनेक्शन
यह दिन फिलिस्तीनियों के प्रति एकजुटता का प्रतीक है.  इसका मकसद यरुशलम पर इजरायल के नियंत्रण और फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर उसके कब्जे का विरोध जताना है.  एक तरह से ये इजरायल के प्रति विरोध जताने का दिन माना गया. यह रमजान के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है. कुद्स यरुशलम का अरबी नाम है. इसलिए इसे यरुशल दिवस भी कहा जाता है.  इसी कुद्स दिवस की तरह ही ईरान में इस्लामिक शासन ने कुद्स फोर्स की भी शुरुआत की थी. इस कुद्स डे और कुद्स फोर्स  के जरिए ईरान अपनी सीमा से बाहर मिडिल ईस्ट में इजरायल के विरुद्ध एक प्रॉक्सी लड़ाई  छेड़े हुए है.

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कुद्स फोर्स क्या है
Quads Force एक तरह से IRGC की ही एक स्पेशल विदेशी ब्रांच है.  1989 में अली खामनेई ने इसका गठन किया था.  1979 की इस्लामी क्रांति के तुरंत बाद वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमौनी ने आईआरजीसी का गठन इस्लामिक शासन की रक्षा के लिए किया था. इसकी जिम्मेदारी ईरान के इस्लामिक शासन को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाना था. यह वहां एक 'डीप स्टेट' तरह काम करता है और ईरान के अलावा दूसरे देशों में भी अलग-अलग नाम से इसके ब्रांच एक्टिव हैं. इनमें से ही एक है कुद्स फोर्स. 

शुरुआत में आईआरजीसी ने एक घरेलू सेना के रूप में काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे इसने ईरान की सीमा से बाहर भी अपनी एक्टिविटी बढ़ानी शुरू कर दी और शिया  बहुल इलाकों में अपने मिशन पर लग गया. ईरान से बाहर अपने अभियानों को अंजाम देने के लिए इसने एक विशेष शाखा तैयार की, जिसका नाम कुद्स फोर्स है. कुद्स फोर्स आईआरजीसी की एक विदेशी शाखा है, जो ईरान के बाहर के ऑपरेशन को अंजाम देती है.

कुद्स फोर्स ही लेबनान में हिजबुल्लाह और गाजा में हमास की मदद करता है. इनकी जिम्मेदारी हिजबुल्लाह और हमास के लड़ाके को ट्रेनिंग देना और हथियार से लेकर पैसे तक, हर तरह से उनकी मदद करना है.  कुद्स फोर्स पर लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूती और हमास को संसाधन और ट्रेनिंग मुहैया कराने के आरोप लगते रहे हैं. ये सभी शिया मिलिशिया संगठन हैं. 

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DW की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी और कुद्स फोर्स इस्लामिक क्रांति के संरक्षक हैं और ये अपने सर्वोच्च लीडर के प्रति वफादार हैं. यही वजह है कि ईरान में आईआरजीसी और  लेबनान, सीरिया, इराक, यमन में कुद्स फोर्स के माध्यम से इनकी दखल हिजबुल्लाह, हूती और हमास जैसे संगठनों के गाइड और सहयोगी के तौर पर है.

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