ईरान जंग का असर, किन देशों में शुरू हुआ WFH और कहां-कहां लगी ये पाबंदियां?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सप्लाई में रुकावट के बीच इसका असर अब भारत समेत दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है. भारत में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. वहीं ईरान-इजरायल जंग के बीच कुछ देशों ने ऊर्जा बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. आइए जानते हैं उन देशों के बारे में, जहां यह व्यवस्था लागू की गई है.

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थाईलैंड ने ऊर्जा बचत के लिए सरकारी दफ्तरों में कई नियम लागू किए हैं (Photo: Reuters) थाईलैंड ने ऊर्जा बचत के लिए सरकारी दफ्तरों में कई नियम लागू किए हैं (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. युद्ध लंबा खिंचने के साथ तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में रुकावट और खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण दुनिया के कई देशों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है.

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हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. अनुमान है कि वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ता है.

हालात को देखते हुए कई एशियाई देशों ने ऊर्जा बचाने और ईंधन की खपत कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. कहीं वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो कहीं सरकारी खर्च और ऊर्जा उपयोग पर नियंत्रण लगाया जा रहा है.

वियतनाम: कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह

ऊर्जा खपत कम करने के लिए वियतनाम सरकार ने कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है. सरकार का मानना है कि इससे ऑफिस आने-जाने में लगने वाला ईंधन बचेगा.

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इसके साथ ही सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कुछ ईंधन आयातों पर लगे टैरिफ भी कम या खत्म करने का फैसला किया है. वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने खाड़ी देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश भी की है.

थाईलैंड: लिफ्ट की जगह सीढ़ियां, AC कम चलाने के निर्देश

थाईलैंड ने ऊर्जा बचत के लिए सरकारी दफ्तरों में कई नियम लागू किए हैं. कर्मचारियों को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने को कहा गया है.

साथ ही कर्मचारियों को औपचारिक सूट-टाई पहनने से भी मना किया गया है ताकि एयर कंडीशनर के इस्तेमाल को कम किया जा सके. सरकार ने एसी का तापमान 26-27 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने का निर्देश दिया है.इसके अलावा सरकारी विदेश यात्राओं को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और ऊर्जा बचत के अन्य उपाय भी लागू किए जा रहे हैं.

पाकिस्तान: सरकारी खर्च में कटौती और वर्क फ्रॉम होम

पाकिस्तान सरकार ने बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए खर्च कम करने की योजना लागू की है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि सरकारी कार्यालय सप्ताह में केवल चार दिन खुलेंगे और कुछ कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे.

इसके अलावा मंत्रियों और सलाहकारों के विदेशी दौरों पर रोक लगा दी गई है. सरकारी वाहनों के ईंधन उपयोग में भी कमी की जा रही है और कई विभागों को अपने खर्च में कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं.

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बांग्लादेश: यूनिवर्सिटी बंद, पढ़ाई ऑनलाइन

बांग्लादेश में ऊर्जा बचाने के लिए सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है. इसके साथ ही ईद की छुट्टियों को भी पहले घोषित कर दिया गया.

सरकार का मानना है कि इससे बिजली और ईंधन की खपत कम होगी. देश में ईंधन को लेकर बढ़ती चिंता के कारण कुछ जगहों पर जमाखोरी की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने ईंधन बिक्री पर सीमा तय कर दी.

चीन: तेल भंडार मजबूत करने में जुटा

चीन ने संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. रिपोर्टों के मुताबिक सरकार रणनीतिक तेल भंडार को मजबूत कर रही है.

इसके साथ ही रिफाइनरियों को नए ईंधन निर्यात समझौते करने से बचने और कुछ शिपमेंट रोकने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो.

साउथ कोरिया: ईंधन कीमतों पर नियंत्रण की तैयारी

दक्षिण कोरिया भी बढ़ती तेल कीमतों से निपटने के लिए कदम उठा रहा है. सरकार लगभग तीन दशक बाद ईंधन कीमतों पर कैप लगाने की संभावना पर विचार कर रही है.

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना और उपभोक्ताओं को राहत देना है. इसके साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश भी तेज कर दी गई है.

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जापान: राष्ट्रीय तेल भंडार इस्तेमाल के लिए तैयार

जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार को लेकर तैयारी बढ़ा दी है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय भंडार से कच्चा तेल जारी किया जा सकता है.सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक आपूर्ति में बाधा आने पर भी घरेलू बाजार में ऊर्जा की कमी न हो.

भारत पर कितना असर?

भारत में फिलहाल ऊर्जा संकट जैसी स्थिति नहीं बनी है. हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का असर यहां भी पड़ सकता है.विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में ऊर्जा बचत, वैकल्पिक स्रोतों और बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम या ऑनलाइन काम-काज जैसे विकल्प भी ईंधन की खपत कम करने में मदद कर सकते हैं.

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