अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमला होते ही वेस्ट एशिया में हालात तेजी से बदल गए. जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों—यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. 'ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4' नाम के इस हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव की नई लहर पैदा कर दी.
इस घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल फिर से सामने आया अमेरिका के सैन्य ठिकाने दुनिया के किन-किन देशों में फैले हैं, और कौन से बेस सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं?
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ओवरसीज सैन्य नेटवर्क चलाता है. विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, 70 से अधिक देशों में अमेरिकी मिलिट्री बेस मौजूद हैं. कई शोधों में यह संख्या 750 तक बताई गई है, जिनमें बड़े एयरबेस, नेवल सुविधाएं और छोटे 'लिली पैड' ऑपरेटिंग साइट्स शामिल हैं. अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खासकर मिडिल ईस्ट, यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा है.
मिडिल ईस्ट: अमेरिका की अग्रिम पंक्ति
ईरान ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया, वे खाड़ी के सबसे रणनीतिक अमेरिकी बेस हैं:
कतर – अल उदीद एयर बेस: CENTCOM का सबसे बड़ा हेडक्वार्टर, जहां हज़ारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. कतर ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया.
यूएई – अल धाफरा एयर बेस: अबू धाबी स्थित इस बेस पर 5,000 अमेरिकी सैनिक हैं. कई धमाकों और धुएँ की रिपोर्ट आई.
कुवैत – अली अल-सालेम एयर बेस: 'द रॉक' नाम से लोकप्रिय, यहां एयर-रेड सायरन तक बजे.
बहरीन – NSA Bahrain: अमेरिकी नौसेना का बड़ा कमांड सेंटर, जहां मिसाइल हमले के बाद आग और धुआं दिखाई दिया.
जॉर्डन – मुवाफ्फक अल-सालती एयर बेस: कई मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ इंटरसेप्ट की गईं.
इराक – ऐन अल-असद और अर्बिल एयर बेस: दोनों ठिकानों के पास विस्फोटों की पुष्टि हुई. क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया.
एशिया और यूरोप में अमेरिका की मजबूत पकड़
एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया में सबसे ज्यादा अमेरिकी बेस हैं. ओकिनावा और Camp Humphreys दुनिया के सबसे बड़े विदेशी यूएस बेस में शामिल हैं. फिलीपींस, सिंगापुर और गुआम में भी महत्वपूर्ण नौसैनिक और वायुसेना सुविधाएं मौजूद हैं.
यूरोप में जर्मनी, इटली, यूके, स्पेन और पोलैंड में अमेरिकी सेना तैनात है. जर्मनी का Ramstein Air Base यूरोप में अमेरिकी ताकत का मुख्य केंद्र माना जाता है.
स्थिति क्यों बनी गंभीर?
ईरान के हमलों ने साबित कर दिया है कि अमेरिकी सैन्य नेटवर्क सिर्फ जुड़ा हुआ ढांचा नहीं, बल्कि एक वैश्विक सुरक्षा संतुलन भी है. खाड़ी देशों ने सुरक्षा बढ़ा दी है, और इज़रायल व ईरान में रहने वालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. भारत ने भी अपने नागरिकों को आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है.
ईरान–अमेरिका टकराव ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि अमेरिका के सैन्य ठिकाने सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि संभावित संघर्ष की सीधी रेखा भी हैं।
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