ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो होर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा.IRGC की ओर से इस समुद्री मार्ग को बंद रखने की चेतावनी को विशेषज्ञों ने दुनिया के लिए बड़ी चिंता बताया है. उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है
दुनिया के नक्शे पर जमीन के दो हिस्सों के बीच मौजूद एक संकरा समुद्री रास्ता इन दिनों वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है. यह रास्ता होर्मुज स्ट्रेट कहलाता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच यह समुद्री मार्ग बार-बार चर्चा में आता है, क्योंकि दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है.
यह समुद्री मार्ग पर्शियन गल्फ को अरबियन सी से जोड़ता है. इसकी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है, लेकिन इतने छोटे रास्ते से ही दुनिया के लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्रूड ऑयल की सप्लाई गुजरती है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में नेचुरल गैस भी इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना तेल इसी रास्ते से निर्यात करते हैं.
अगर भारत की बात करें तो देश के कुल आयातित तेल का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है. इसलिए अगर कभी होर्मुज में संकट पैदा होता है तो भारत समेत कई देशों में तेल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है.
दुनिया का तेल सिर्फ होर्मुज से नहीं गुजरता
पूरी दुनिया को रोजाना करीब 100 मिलियन बैरल ऑयल की जरूरत पड़ती है. इसमें से करीब 20–25 प्रतिशत ऑयल होर्मुज से होकर गुजरता है, जबकि बाकी तेल कई दूसरे समुद्री रास्तों और पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग देशों तक पहुंचाया जाता है. ऊर्जा व्यापार में इन महत्वपूर्ण मार्गों को ऑयल चोकपॉइंट्स कहा जाता है.
स्ट्रेट ऑफ मलक्का: एशिया का अहम समुद्री मार्ग
स्ट्रेट ऑफ मलक्का मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच स्थित है और इसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में गिना जाता है. वर्ष 2025 में यहां से रोजाना लगभग 23 मिलियन बैरल ऑयल गुजरा. अफ्रीका, अमेरिका और रूस से एशिया जाने वाले कई तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं.
सुएज कैनाल: यूरोप के लिए छोटा रास्ता
सुएज कैनाल रेड सी को मेडिटेरेनियन सी से जोड़ती है. यह मार्ग यूरोप और अमेरिका तक तेल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. अफ्रीका के देशों जैसे नाइजीरिया और अंगोला का तेल भी इसी रास्ते से यूरोप तक पहुंचता है.
बाब एल-मंदेब: रेड सी का प्रवेश द्वार
बाब एल-मंदेब स्ट्रेट यमन और जिबूती के बीच स्थित समुद्री रास्ता है. यह सुएज कैनाल की ओर जाने वाला मुख्य प्रवेश मार्ग है और यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल के टैंकर गुजरते हैं.
तुर्किश स्ट्रेट्स: रूस का समुद्री रास्ता
तुर्किश स्ट्रेट्स ब्लैक सी को मेडिटेरेनियन सी से जोड़ते हैं. रूस, कजाकिस्तान और अज़रबैजान का तेल अक्सर इसी मार्ग से यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है. यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिहाज से काफी अहम माना जाता है.
डेनिश स्ट्रेट्स और नॉर्थ सी का रास्ता
डेनिश स्ट्रेट्स के जरिए नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम के तेल का निर्यात होता है. यह रास्ता यूरोप के ऊर्जा बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
केप ऑफ गुड होप: वैकल्पिक समुद्री रास्ता
केप ऑफ गुड होप रूट अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर स्थित समुद्री रास्ता है. जब रेड सी या सुएज कैनाल में किसी कारण से समस्या आती है, तो कई तेल टैंकर इसी रास्ते से घूमकर यूरोप और एशिया तक पहुंचते हैं.
होर्मुज बाइपास पाइपलाइन
कुछ देशों ने होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन भी विकसित की हैं. इनमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की हबशन-फुजैराह पाइपलाइन शामिल हैं. इन पाइपलाइनों के जरिए रोजाना लाखों बैरल तेल सीधे रेड सी या गल्फ ऑफ ओमान तक पहुंचाया जा सकता है.
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