जब गर्मियों का सीजन शुरू होता है तो एसी और सर्दी में हीटर की डिमांड बढ़ जाती है. इसके साथ ही बिजली के बिल का खर्च भी बढ़ जाता है. लेकिन, विदेश में कुछ लोग ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, जिससे एक बार खर्चा होता है और फिर एसी-हीटर दोनों का काम ये सिस्टम कर देता है. अब भारत में भी इसका इस्तेमाल बढ़ने लगा है और ये दोनों का काम करता है. अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे हो सकता है, तो समझते हैं कि आखिर ये सिस्टम है क्या और कैसे काम करता है. किन घरों में इसे लगाया जा सकता है. तो जानिए हर एक सवाल का जवाब...
क्या है ये सिस्टम?
दरअसल, ये सिस्टम हीट पर काम करता है और इसे हीट पंप सिस्टम काम कहा जाता है. इस सिस्टम में घर में पाइप के जरिए गर्म और ठंडी हवा भेजी जाती है. इसके लिए एक सिस्टम बनाया जाता है, जिसमें एक तरफ से गर्म या ठंडी हवा भेजी जाती है और दूसरी तरफ से गर्म या ठंडी हवा को निकाला जाता है. यानी घर के बाहर के पाइप लगाया जाता है, जिसमें से हवा को भेजा जाता है और ये पाइप घर के नीचे जमीन में अंदर घुसा होता है और जमीन का काफी नीचे इसे गाड़ दिया जाता है और फिर दूसरा हिस्से घर के अंदर घुलता है.
इससे जब घर के बाहर लगे पाइप में गर्मियों में गर्म हवा जाती है तो वो जमीन के नीचे से ट्रैवल होते हुए बाहर आती है और दूसरा हिस्सा घर में होता है. जमीन के नीचे ट्रेवल करने से ये हवा ठंडी हो जाती है और फिर दूसरी तरह से ठंडी हवा निकलती है, इससे पूरा घर ठंडा हो जाता है. ये गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करता है, न कि खुद पैदा करता है. सर्दी में ये उल्टा काम करता है और इससे ठंडी हवा अंदर जाती है और घर में गर्म हवा निकलती है.
हीट पंप कैसे काम करता है?
इसके तीन हिस्से होते हैं. एक हिस्सा एवापोरेटर का होता है, जो बाहर की हवा को बाहर से खींचकर पाइप में डालने का काम करता है. फिर एक कंप्रेसर लगा होता है, जिससे उसका तापमान कम ज्यादा किया जाता है. इसके बाद कंडेंसर होता है, जो यह गर्म या ठंडी हवा को घर के अंदर छोड़ता है. ये एसी की तरह ही काम करता है, लेकिन ये काफी किफायती होता है. बता दें कि जमीन के नीचे का तापमान सालभर लगभग स्टेबल रहता है, इसकी वजह से ये दोनों मौसम में कारगर रहता है. इसकी मशीनें जमीन से गर्मी खींचते या छोड़ते हैं.
किन घरों में लगा सकते हैं?
इस लगाने के लिए घर के बाहर पर्याप्त जगह होनी चाहिए और घर थोड़ा बड़ा होना चाहिए. जो लोग फ्लैट में रह रहे हैं, उनके लिए ये फायदेमंद नहीं है. इसके लिए अलग से खुदाई करवानी होती है. जो प्लांड बड़े घर हैं, उनमें ये कारगर होता है और इससे 30 से 40 फीसदी तक बिजली बचाई जा सकती है. इसे लगाने के लिए 80 हजार से 2 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं.
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