कौन होते हैं Naturist, जो कहीं भी जाए कपड़े नहीं पहनते हैं!

प्रकृतिवादियों को केवल कपड़े न पहनने की आदत के रूप में देखना इसकी अधूरी तस्वीर है. ऐसे लोग शरीर के प्रति सहजता, सामाजिक बराबरी और प्रकृति के करीब रहने की सोच से जोड़कर इस देखते हैं. दिलचस्प बात यह है कि ऐसे लोगों का पहला दर्ज क्लब भारत में बना था.

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प्रकृति के बीच प्राकृतिक अवस्था में रहना पसंद करते हैं ये लोग (Photo - ITG) प्रकृति के बीच प्राकृतिक अवस्था में रहना पसंद करते हैं ये लोग (Photo - ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

दुनिया में ऐसे लोगों की भी एक बड़ी आबादी है जो मानती है कि इंसान का शरीर किसी शर्म या संकोच की चीज नहीं, बल्कि प्रकृति का सामान्य हिस्सा है. ऐसे लोगों को Naturist यानी प्रकृतिवादी कहा जाता है. 

इनका मानना है कि इंसान को अपने शरीर को उसी सहजता से स्वीकार करना चाहिए, जैसे वह प्रकृति के बाकी हिस्सों को स्वीकार करता है. यही वजह है कि ये लोग कुछ खास जगहों और परिस्थितियों में बिना कपड़ों के रहना पसंद करते हैं. 

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हालांकि, इसे लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग इसे अश्लीलता या ऐसे प्रदर्शन से जोड़कर देखते हैं.  जबकि, प्रकृतिवादी कार्यक्रमों में ऐसा कुछ नहीं होता है. बिना कपड़ों के रहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे किसी तरह की अश्लीलता या भड़काऊ व्यवहार को बढ़ावा देते हैं. यह समुदाय खुद को एक सामाजिक और जीवनशैली आधारित आंदोलन मानता है, जिसका मकसद शरीर को लेकर झिझक कम करना और प्रकृति के करीब रहना है. 

आखिर क्यों नहीं पहनते कपड़े?
नैचुरिस्ट लोगों के मुताबिक कपड़े पहनना या न पहनना उनके लिए फैशन का नहीं, बल्कि सोच का विषय है. उनका मानना है कि इंसान पैदा होते समय किसी पहचान, पद या सामाजिक हैसियत के साथ नहीं आता. कपड़े कई बार समाज में आर्थिक और सामाजिक अंतर को दिखाने का माध्यम बन जाते हैं, जबकि बिना कपड़ों के सभी लोग बराबर नजर आते हैं.

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द सन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल  ब्रिटिश नेचुरिज्म नामक एक समूह  क्रिसमस लंच का आयोजन किया था. इसमें शामिल होने वाले लोग नाम मात्र या बिना कपड़ों के आए थे.  हैम्पशायर के एक पब में आयोजित इस इवेंट में 60 लोग शामिल हुए थे. इसमें साल की हेलेन भी आई थीं. उन्होंने बताया कि अपने जन्म के समय के कपड़ों के अलावा कुछ भी पहने बिना इसे जश्न का हमलोगों ने आनंद  लिया. 

उन्होंने बताया कि हमें क्रिसमस का लंच पूरी तरह बिना कपड़ों के  खाना बहुत पसंद है . इससे हमें सही मायने में उत्सव का माहौल महसूस होता है. हेलेन के हमख्याल पति साइमन केंट के ब्रोमली से हैं. दोनों प्रकृतिवादी हैं और उनका कहना है कि क्रिसमस जैसे फेस्टिवल को मनाने का इससे बेहतर कोई तरीका हमारे लिए नहीं है.

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उन्होंने बताया कि यह हमारी दूसरी यात्रा थी और यह हमारे साल के सबसे यादगार पलों में से एक है. हमें बिना कपड़ों के रहना पसंद है. यह ज्यादा आजादी भरा होता है. ऐसे माहौल में कोई यह नहीं देख रहा कि आपने क्या पहना है और आपके कपड़ों से आपका आकलन नहीं कर रहा है. ऐसी जगह हर कोई बराबर होता है.

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इसी तरह कई नैचुरिस्ट  यह भी कहते हैं कि खुली हवा, धूप और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने से उन्हें मानसिक रूप से ज्यादा सहज महसूस होता है. इसलिए वे इसे प्रकृति के करीब रहने का तरीका मानते हैं.

क्या ये लोग हमेशा बिना कपड़ों के रहते हैं?
ऐसा बिल्कुल नहीं कि प्रकृतिवादी हमेशा बिना कपड़ों के रहते हैं. यह शायद प्रकृतिवाद को लेकर सबसे आम गलतफहमी है. अधिकांश ऐसे लोग सामान्य जीवन में बाकी लोगों की तरह ही कपड़े पहनते हैं. नौकरी करते हैं, बाजार जाते हैं और परिवार के साथ रहते हैं.

वे केवल विशेष क्लबों, रिसॉर्ट्स, समुद्र तटों या निजी आयोजनों में ही इस जीवनशैली का पालन करते हैं.  हेलेन कहती हैं कि जब उनकी मुलाकात साइमन से हुई और उन्होंने अपने नैचुरिस्ट जीवनशैली के बारे में बताया तो मुझे घिन आने लगी. क्योंकि, वह घर आने के बाद निजी रूप से बिना कपड़ों के रहता था. इसके अलावा सिर्फ प्रकृतिवादियों के लिए सुरक्षित जगहों या कार्यक्रमों में जाने पर कपड़े उतारता था. बाकी समय प्रकृतिवादी भी कपड़े पहने रहते हैं. 

हेलेन साइमन के जीवन जीने के तरीके के बारे में और अधिक जिज्ञासु हो गई और धीरे-धीरे वह भी साइमन के रंग में रंगने लगी. वह बताती हैं कि जब भी हमल नैचुरिस्ट माहौल में अपने जैसे लोगों के बीच जाते हैं तो वहां कोई आपको जज करने वाला या आपके बारे में राय बनाने वाला नहीं होता है. 

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उन्होंने बताया कि  प्रकृतिवाद की खासियत यह है कि ज्यादातर लोग अविश्वसनीय रूप से मिलनसार होते हैं और बेशक, बातचीत शुरू करने से पहले ही हम सभी में कुछ न कुछ समानता होती है.

नैचुरिस्ट समुदाय में क्या होता है?
अगर किसी को लगता है कि ऐसे आयोजनों में कुछ असामान्य गतिविधियां होती होंगी, तो हकीकत इससे काफी अलग है. इन समुदायों में लोग छुट्टियां मनाते हैं, तैराकी करते हैं, खेलकूद में हिस्सा लेते हैं, योग करते हैं, कैंपिंग पर जाते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं. यानी गतिविधियां लगभग वही होती हैं जो किसी सामान्य पर्यटन स्थल या क्लब में देखने को मिलती हैं. फर्क सिर्फ इतना होता है कि वहां शरीर को लेकर अलग तरह की सामाजिक सोच अपनाई जाती है.

इस विचार की शुरुआत कब हुई?
मानव सभ्यता के इतिहास में कई संस्कृतियों में शरीर को लेकर अलग-अलग नजरिए रहे हैं. लेकिन आधुनिक प्रकृतिवाद आंदोलन की शुरुआत 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में मानी जाती है.

उस दौर में यूरोप तेजी से औद्योगिक समाज में बदल रहा था. शहरों की भीड़, कारखानों का प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच कुछ लोगों ने प्राकृतिक जीवन, खुली हवा और स्वास्थ्य पर आधारित जीवनशैली की वकालत शुरू की. धीरे-धीरे यही विचार एक संगठित आंदोलन में बदल गया.

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क्या आप जानते हैं कि पहला नैचुरिस्ट क्लब भारत में बना था?
यह तथ्य बहुत कम लोगों को पता है कि इतिहास में दर्ज पहला संगठित प्रकृतिवादी क्लब भारत में स्थापित हुआ था. यूएसए टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1891 में महाराष्ट्र के माथेरान इलाके में 'फेलोशिप ऑफ द नेकेड ट्रस्ट' नाम का एक क्लब बनाया गया था. एक अंग्रेज अधिकारी ने इस क्लब को बनाया था.  हालांकि, यह बहुत बड़ा आंदोलन नहीं बन पाया, लेकिन इतिहास में इसे संगठित प्रकृतिवाद की शुरुआती कड़ी माना जाता है.

फिर दुनिया में कैसे फैला ये आंदोलन?
हालांकि, पहला दर्ज क्लब भारत में बना था, लेकिन इस विचार को लोकप्रिय बनाने का श्रेय जर्मनी को दिया जाता है. 20वीं सदी की शुरुआत में जर्मनी में 'फ्री बॉडी कल्चर'आंदोलन शुरू हुआ, जिसने नेचरिज्म को बड़े पैमाने पर पहचान दिलाई.
इसके बाद यह विचार फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक पहुंच गया. 

आज दुनिया के कई देशों में ऐसे संगठन, क्लब, रिसॉर्ट और विशेष समुद्र तट मौजूद हैं. जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ऐसे समुदाय काफी समय से सक्रिय हैं. इनके लिए विशेष इलाके रिजर्व होते हैं. जहां सिर्फ प्रकृतिवादी लोग ही जा सकते हैं.  फ्रांस को तो दुनिया के सबसे बड़े नैचुरिस्ट पर्यटन केंद्रों में गिना जाता है, जहां हर साल हजारों लोग ऐसे रिसॉर्ट्स और समुद्र तटों पर छुट्टियां बिताने पहुंचते हैं.

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