ये था दुनिया का सबसे अमीर शासक, जिसे पिघलता सोना मुंह में डालकर मार दिया गया!

कभी प्राचीन ईरान यानी फारस के एक पर्थियन सेनापति ने एक रोमन शासक को ऐसी हार दी थी, जिसे यादकर सदियो बाद भी रोमन थर्रा जाते थे. कैरे के मैदान में पर्थियन सेनापति ने एक एक बड़ी रोमन सेना को न सिर्फ हराया था, बल्कि एक प्रमुख रोमन कमांडर के मुंह में पिघला सोना डालकर मार डाला था.

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गायस जूलियस सीजर के सहयोगी क्रैसस को दी गई थी ऐसी मौत (Representational Photo - Pexels) गायस जूलियस सीजर के सहयोगी क्रैसस को दी गई थी ऐसी मौत (Representational Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:06 PM IST

रोम के सबसे धनी शख्स और सम्राट जूलियस सीजर की सेना के प्रमुख जनरल मार्कस लिसिनियस क्रैसस, जिसके जिम्मे रोमन साम्राज्य के सीरियाई इलाके का शासन था. उसकी मौत सदियों तक रोमन साम्राज्य के लिए शर्मिंदगी की वजह बन गई थी. इस शख्स की लालच की वजह से न सिर्फ रोमन सेना को हार का सामना करना पड़ा, बल्कि फारसी सेनापति ने क्रेसस को एक बुरी मौत दी थी. ज्यादा लालची होने की सजा के तौर पर क्रैसस के मुंह में पिघला हुआ सोना डालकर उसे मौत के घाट उतार दिया था.

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रोमन को हराने के बाद उसके सेनापति क्रैसस के मुंह में प्राचीन ईरान के पर्थियन राजा ने मुंह में पिघला हुआ सोना डालकर मार डाला था. फारसी साम्राज्य ने रोमन को कैरे के युद्ध में करारी हार दी थी. रोमन सेनापति क्रैसस जूलियस सीजर का विदेशी राजदूत था और सोने और धन का बहुत बड़ा लालची था. अपनी लालच की वजह से ही उसने पर्शियन सम्राज्य पर धावा बोला था और उसे मुंह की खानी पड़ी थी. 

रोमन साम्राज्य और फारस के पर्थियन सेना के बीच हुए  युद्ध के परिणाम काफी भयावह हुए. इस युद्ध में सिर्फ रोमन सेना की हार ही नहीं हुई थी, बल्कि उनके सेनाध्यक्ष क्रैसस को इतनी बुरी तरह से मारा गया था कि सदियों तक यह घटना रोमनों के लिए एक शर्मिंदगी की वजह बनी रही. इस हार के बाद रोमन राजाओं ने लंबे समय तक फारसी साम्राज्य की तरफ नजर उठाकर नहीं देखा था.

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ईसा पूर्व 60 में मार्कस लिसिनियस क्रैसस रोम के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक थे. एक सैन्य कमांडर के रूप में उन्होंने दास विद्रोह को कुचल दिया था. अपनी चतुराई और निर्ममता के बल पर उन्होंने रोम में सबसे बड़ी संपत्ति अर्जित की थी. जूलियस सीजर ने क्रैसस और ग्नियस पोम्पेयस मैग्नस के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया था. इन तीनों ने मिलकर एक समय रोमन साम्राज्य पर राज किया.

लालच की वजह से पर्थिया पर क्रैसस ने किया था हमला
क्रैसस और पोम्पे के साथ हुए समझौते के अनुसार, सीजर ने अपना वाणिज्य दूतावास का कार्यकाल समाप्त होने पर गॉल में रोमन सेनाओं की कमान संभाली. इसी प्रकार, 55 ईसा पूर्व में पोम्पे को हिस्पानिया और अफ्रीका के क्षेत्रों की कमान मिली और  क्रैसस सीरियाई प्रांतों के राज्यपाल बने. लगभग 60 वर्ष के क्रैसस को अभी भी सैन्य गौरव की लालसा थी और उन्होंने फारसी साम्राज्य पार्थिया और उसके राजा ओरोडेस द्वितीय पर अपनी नज़रें गड़ा दीं. क्रैसस ने 53 ईसा पूर्व में  पर्थिया अपना आक्रमण शुरू किया, लेकिन पार्थियन आसानी से पराजित नहीं हुए.

क्रैसस ने कई गलतियां कीं, जिनमें आर्मेनिया के राजा द्वारा दिए गए उस प्रस्ताव को ठुकराना भी शामिल था, जिसमें पार्थिया पर आक्रमण करने के बदले में और सैनिक देने की पेशकश की गई थी. इसके बजाय, क्रैसस ने रेगिस्तान से होकर आगे बढ़ने का विकल्प चुना, जिसके कारण उसके 43,000 सैनिक थके-हारे और कुपोषित हो गए.

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 वर्तमान तुर्की में स्थित कैरहे नामक शहर के पास, क्रैसस का पार्थियाई सेना से सामना हुआ, जिसका नेतृत्व जनरल सुरेनास कर रहे थे. उन्होंने चतुराई और धैर्य से लड़ाई लड़ी. सुरेनास ने क्रैसस को करारी हार दी. इस जंग में बीस हजार सैनिक मारे गए और दस हजार को जीवित पकड़ा गया. मृतकों में क्रैसस का अपना बेटा भी शामिल था.

मुंह में डाल दिया था पिघला हुआ सोना
जिंदा पकड़े जाने पर, क्रैसस की हत्या सुरेनास के हाथों हुई. सुरेनास ने क्रैसस का सिर और एक हाथ राजा ओरोडेस द्वितीय को भेजा. क्रैसस की अत्यधिक धन की लालसा की वजह से  पार्थियनों ने उपहास के रूप में उनके मुंह में पिघला हुआ सोना डाल दिया था और जलकर क्रैसस की मौत हो गई थी. 

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