बादल ही नहीं, पेड़ भी करवाते हैं बारिश! अमेजन जंगल का ये रहस्य

क्या पेड़ भी बारिश करवा सकते हैं? दक्षिण अमेरिका में फैला अमेजन रेनफॉरेस्ट ऐसा ही एक प्राकृतिक चमत्कार माना जाता है, जहां अरबों पेड़ हवा में इतनी नमी छोड़ते हैं कि बादल बनते हैं जिससे बारिश शुरू हो जाती है. वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को 'फ्लाइंग रिवर्स' कहते हैं, जिसमें जंगल खुद अपने लिए बारिश का सिस्टम तैयार करता है.

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कुछ वैज्ञानिक इसे “बायोटिक पंप थ्योरी” भी कहते हैं कुछ वैज्ञानिक इसे “बायोटिक पंप थ्योरी” भी कहते हैं

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:09 AM IST

बारिश होती है तो बचपन से यही सिखाया जाता है कि बादल पानी बरसाते हैं. साइंस भी यही कहती है कि समुद्र, नदियों और झीलों से पानी भाप बनकर ऊपर जाता है, बादल बनते हैं और फिर बारिश होती है. लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह भी है, जहां सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि पेड़ भी बारिश करवाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यह जगह है अमेजन रेनफॉरेस्ट, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा जंगल माना जाता है.

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करीब 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह जंगल 'धरती के फेफड़े' के नाम से मशहूर है. इसका सबसे बड़ा हिस्सा ब्राजील में है, लेकिन यह पेरू, कोलंबिया समेत 9 देशों तक फैला हुआ है. इसी जंगल के बीच से अमेजन नदी बहती है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में गिना जाता है.

पेड़ कैसे बनाते हैं बारिश?

वैज्ञानिकों के मुताबिक अमेजन के जंगल में करीब 390 अरब पेड़ हैं और यही पेड़ इस पूरे इलाके के मौसम को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. पेड़ों की जड़ें जमीन से पानी खींचती हैं. इसके बाद पेड़ों की पत्तियां उस पानी को बेहद महीन जलवाष्प यानी वॉटर वेपर के रूप में हवा में छोड़ती हैं. इस प्रक्रिया को 'ट्रांसपिरेशन' कहा जाता है.

हैरानी की बात यह है कि एक बड़ा पेड़ रोजाना 300 से 400 लीटर तक पानी हवा में छोड़ सकता है. जब अरबों पेड़ ऐसा करते हैं तो आसमान में नमी की विशाल परत बन जाती है. यही नमी बादलों में बदलती है और फिर बारिश होती है.

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आसमान में बहती हैं ‘फ्लाइंग रिवर्स’

वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को “फ्लाइंग रिवर्स” कहते हैं. यानी आसमान में बहने वाली अदृश्य नदियां. अमेजन के पेड़ इतनी ज्यादा नमी पैदा करते हैं कि हवा इन जलवाष्प को हजारों किलोमीटर दूर तक ले जाती है. यह नमी बाद में दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में बारिश करवाती है.

कुछ वैज्ञानिक इसे “बायोटिक पंप थ्योरी” भी कहते हैं. इस थ्योरी के अनुसार जंगल सिर्फ बारिश ही नहीं बनाते, बल्कि समुद्र से आने वाली नमी भरी हवाओं को अपनी ओर खींचने में भी मदद करते हैं. यानी जंगल खुद अपने लिए बारिश का सिस्टम तैयार करते हैं.

अमेजन खुद शुरू कर देता है बारिश का मौसम

NASA की एक स्टडी के अनुसार अमेजन का जंगल कई बार सूखे मौसम के आखिर में खुद ही बारिश की शुरुआत कर देता है. यानी समुद्र से भारी बारिश वाली हवाएं आने से पहले ही जंगल के ऊपर बादल बनने लगते हैं.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेजन के पेड़ हवा में जितनी नमी छोड़ते हैं, वह कई बार अमेजन नदी में बहने वाले पानी के बराबर या उससे भी ज्यादा मानी जाती है.

अगर जंगल खत्म हुए तो क्या होगा?

वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर अमेजन के जंगल तेजी से कटते रहे, तो यह पूरा सिस्टम कमजोर पड़ सकता है. पेड़ कम होंगे तो हवा में नमी कम जाएगी, बादल कम बनेंगे और बारिश भी घटने लगेगी.

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इसका असर सिर्फ जंगल तक सीमित नहीं रहेगा. दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों की खेती, मौसम और पानी का संतुलन बिगड़ सकता है. कुछ वैज्ञानिक तो यहां तक कह रहे हैं कि अगर जंगलों की कटाई नहीं रुकी, तो अमेजन का बड़ा हिस्सा भविष्य में सूखे घास के मैदान या रेगिस्तान जैसी स्थिति में बदल सकता है.

प्रकृति का सबसे बड़ा ‘वॉटर पंप’

अमेजन का जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि यह धरती का एक विशाल प्राकृतिक वॉटर पंप है. यह जंगल खुद पानी बनाता है, खुद बादल तैयार करता है और खुद बारिश करवाने में मदद करता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक अमेजन को सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि पृथ्वी के मौसम को संतुलित रखने वाली सबसे बड़ी प्राकृतिक मशीनों में से एक मानते हैं.

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