गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोगों की खानपान की आदतों में भी बड़ा बदलाव आ जाता है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर को ठंडक देने वाली चीजों की मांग भी बढ़ जाती है. तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत पाने के लिए लोग ठंडी चीजें ज्यादा खाते और पीते हैं. गर्मी आते ही दही, कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम जैसी चीजों की खपत अचानक बढ़ जाती है. सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली चीज आइसक्रीम होती है. गर्मी में आइसक्रीम सिर्फ एक खाने की चीज नहीं, बल्कि एक तरह से राहत का जरिया बन जाती है. चाहे चॉकलेट हो, वनीला हो या कोई और फ्लेवर—हर कोई अपनी पसंद के अनुसार इसका आनंद लेता है.
खास बात यह है कि ये चीजें सिर्फ किसी एक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं. बच्चे तो आइसक्रीम और ठंडी ड्रिंक्स के सबसे बड़े शौकीन होते ही हैं, लेकिन बड़े और बुजुर्ग भी गर्मी से राहत पाने के लिए इन्हें उतना ही पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आइसक्रीम वाले भैया को एक 10 रुपये की चोकोबार कितने की मिलती है. चलिए जानते हैं पूरा हिसाब-किताब. आपको बता दें कि 10 रुपये की चोकोबार (ice cream) ठेले वाले भैया को कितने में मिलती है. यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है. किसी भी प्रोडक्ट के रेट में कंपनी, शहर, सप्लाई चेन और मुनाफे का मार्जिन सब शामिल होता है.
सबसे पहले जानिए MRP क्या होता है?
जो कीमत आप देते हैं (जैसे ₹10), उसे MRP (Maximum Retail Price) कहते हैं. इसमें कंपनी का खर्च (production + packaging), ट्रांसपोर्ट का खर्च डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर का मार्जिन शामिल होता है. यानी ₹10 पूरी तरह ठेले वाले की कमाई नहीं होती.
तो ठेले वाले को कितने में मिलती है?
आमतौर पर ₹10 वाली चोकोबार का रेट कुछ इस तरह होता है. कंपनी से डिस्ट्रीब्यूटर को ₹10 वाली चोकोबार ₹6–7 में मिलता है. डिस्ट्रीब्यूटर ₹10 वाली चोकोबार ठेले वालों को ₹7–8 में देता है. यानी ठेले वाले भैया को यह लगभग ₹7–₹8 में पड़ती है.
ठेले वाले का मुनाफा कितना होगा ?
अगर वह ₹10 में बेचते हैं तो ₹7–₹8 में खरीदारी में लगा था, तो उनको एक आईसक्रीम पर 2-3 रुपया बचेगा.
असली खर्च जो दिखता नहीं
ठेले वाले की पूरी कमाई यही ₹2–₹3 नहीं होती, क्योंकि उन्हें और खर्च भी उठाने पड़ते हैं. जैसे- बर्फ/फ्रीजर का खर्च, आइसक्रीम को ठंडा रखने के लिए बर्फ या बैटरी फ्रीजर चाहिए
बिजली या बैटरी
कुछ लोग बैटरी से चलने वाला फ्रीजर इस्तेमाल करते हैं. इस बिजनेस में फायदे के साथ-साथ काफी नुकसान भी है. अगर आइसक्रीम पिघल गई तो कई बार काफी नुकसान होता है. रोज़ का खर्च, ठेला, किराया, मेहनत सबके बाद असली बचत और कम हो जाती है.
एक दिन की कमाई का अंदाज़ा
मान लीजिए एक ठेले वाला रोज़ 100 चोकोबार बेचता है, तो प्रति पीस कमाई ₹2 होगी. कुल कमाई ₹200 होगी. अब इसमें से बर्फ/खर्च ₹50–₹80. तो बचत लगभग ₹120–₹150 प्रतिदिन होगा. मान लीजिए आपने ₹10 की आइसक्रीम खरीदी, उसमें से ₹7–₹8 कंपनी और सप्लाई में गया, ₹2–₹3 ठेले वाले को मिला और उसी ₹2–₹3 में उसे पूरा दिन का खर्च भी निकालना होता है. तो इस हिसाब से ₹10 की चोकोबार ठेले वाले को लगभग ₹7–₹8 में मिलती है. प्रति पीस मुनाफा ₹2–₹3 होता है. असली बचत खर्च निकालने के बाद और कम हो जाती है. इसलिए अगली बार जब आप ₹10 की चोकोबार खरीदें, तो समझिए कि ठेले वाले भैया की कमाई बहुत ज्यादा नहीं होती—वो मेहनत से कमाते हैं.
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