कपाट खुलते ही शुरू हुई चारधाम यात्रा, श्रद्धालुओं के स्वागत में सजा पूरा धाम

यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:35 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खुले तो पूरा धाम “जय मां यमुना” के जयकारों से गूंज उठा. देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु नाच-गाकर खुशियां मनाते नजर आए. प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं कीं और चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ पूरे क्षेत्र में आस्था और उत्साह का माहौल बन गया.

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धाम में गूंजे मंत्र और जयकारे.(Photo: Onkar Bahuguna/ITG) धाम में गूंजे मंत्र और जयकारे.(Photo: Onkar Bahuguna/ITG)

ओंकार बहुगुणा

  • उत्तरकाशी,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:16 PM IST

हिमालय की गोद में बसे यमुनोत्री धाम में रविवार का दिन आस्था और उल्लास से भरा रहा. ठीक दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप ग्रीष्मकाल के लिए कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए. जैसे ही कपाट खुले, पूरा धाम “जय मां यमुना” के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया.

सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी था. देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए उत्साह से भरे नजर आए. स्थानीय ग्रामीणों ने भी पारंपरिक तरीके से इस शुभ अवसर को मनाया.

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कपाट खुलते ही श्रद्धालु नाच-गा कर अपनी खुशियां व्यक्त करते दिखे. हर चेहरे पर आस्था की चमक और मन में मां यमुना के दर्शन का भाव साफ झलक रहा था.

भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम

कपाट उद्घाटन के पावन अवसर पर श्री यमुनोत्री मंदिर समिति, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तीर्थ यात्रियों का भव्य स्वागत किया. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिला.

प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि यात्रा निर्विघ्न रूप से चल सके. धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ भी हो गया.

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पूरे क्षेत्र में आस्था और उत्साह का माहौल है. स्थानीय व्यापारी और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भी यात्रा सीजन को लेकर आशान्वित हैं.

सुरक्षित और सुखद यात्रा की अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान मौसम, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें. पर्वतीय क्षेत्र में बदलते मौसम को देखते हुए सतर्कता बरतना आवश्यक बताया गया है.

भक्तों के लिए यह क्षण केवल कपाट खुलने का नहीं, बल्कि आस्था के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है. मां यमुना के धाम में गूंजते जयकारों के बीच श्रद्धा और विश्वास का यह संगम लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

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