जब सुरंग से निकाले जा रहे थे मजदूर, Live टेलीकास्ट देखकर भावुक हो गए थे PM मोदी

जिस समय रेस्क्यू ऑपरेशन अंतिम आकार ले रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेस्क्यू का लाइव टेलीकास्ट देख रहे थे. इस दौरान पीएम भावुक हो गए थे. यह बात केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कही है. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने सुरंग से निकाले जा रहे मजदूरों का लाइव टेलीकास्ट देखा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST

सत्रह दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार सभी मजदूर टनल से बाहर निकाल लिए गए. मंगलवार की शाम आई इस खुशखबरी ने देशभर में खुशी का माहौल पैदा कर दिया. टनल में फंसे 41 मजदूरों के परिवारों के लिए मंगलवार की रात दीपावली की तरह गुजरी.

इस बीच यह बात भी सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टनल में चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को लाइव देख रहे थे. पीएम के साथ पूरे कैबिनेट ने रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव टेलीकास्ट देखा. जैसे ही टनल में फंसे श्रमिक बाहर आना शुरू हुए तो पीएम बहुत भावुक हो गए.

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रेस्क्यू खत्म होते समय चल रही थी बैठक

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि मजदूरों को निकालने की प्रक्रिया के दौरान मंगलवार रात करीब 8 बजे कैबिनेट की बैठक चल रही थी, जब मजदूर बाहर आए तो पीएम मोदी काफी भावुक थे.

अस्पताल पहुंचकर मजदूरों से मिले सीएम

मजदूरों को बचाए जाने के बाद आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चिन्यालीसौड़ अस्पताल पहुंचे और श्रमिकों से मुलाकात की. यहां मजदूरों को बचाए जाने के बाद मंगलवार शाम लाया गया था. अपनी बैठक के बाद धामी ने बताया कि सभी श्रमिक अच्छी हालत में हैं. इसके बाद उन्हें एम्स ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल चेकअप हुआ.

सिल्कयारा टनल चारधाम परियोजना का हिस्सा

बता दें कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का हिस्सा सिल्कयारा टनल का कुछ भाग 12 नवंबर को लैंडस्लाइड के कारण ढह गया था. इसके बाद अगले ही दिन टनल के अंदर फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. 17 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद सभी को 28 नवंबर 2023 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

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रैट माइनर्स ने तोड़ी सुरंग की आखिरी दीवार

एक दिन पहले यानी 27 नवंबर को टनल ड्रिलिंग के लिए बुलाई गई अमेरिकी ऑगर मशीन खराब हो गई थी. उसके ब्लेड टूट गए थे. इसके बाद रैट माइनर्स को बची हुई करीब 10 मीटर की सुरंग खोदने के लिए बुलाया गया था. रेट माइनर्स ने तय समय से भी कम टाइम में सुरंग का आखिरी हिस्सा तोड़ दिया था. इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, असम (एसडीआरएफ) की एक टीम ने फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंचने के लिए स्टील शूट की मदद से प्रवेश किया था. इसके बाद सभी को वहां से निकाल लिया गया था.

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