उत्तराखंड: बागेश्वर में लगता है खास नस्ल के हिमालयन डॉग्स का बाजार, इन कुत्तों की मांग सबसे ज्यादा

बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में हिमालयी कुत्तों की खास बाजार लोगों का ध्यान खींच रही है. पहाड़ी इलाकों से आए व्यापारी हिमालयन शीपडॉग बेच रहे हैं, जिनकी कीमत 5,000 से 25,000 रुपये तक है. ये कुत्ते अपनी वफादारी और साहस के लिए जाने जाते हैं और जंगली जानवरों से भी मुकाबला करते हैं. पहले ग्रामीण इलाकों तक सीमित यह नस्ल अब शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

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हिमालयी कुत्ते की कीमत 5,000 से 25,000 रुपये तक है. (Photo: Screengrab) हिमालयी कुत्ते की कीमत 5,000 से 25,000 रुपये तक है. (Photo: Screengrab)

जगदीश पाण्डेय

  • बागेश्वर,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:35 AM IST

बाबा बागनाथ की पावन नगरी बागेश्वर में धूमधाम से चल रहे उत्तरायणी मेले में विविधता भरी बाजारें सजी हुई हैं. इनमें एक ऐसी बाजार भी है जो केवल हिमालयी कुत्तों के व्यापार के लिए समर्पित है. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों जैसे बाछम, मुनस्यारी, खलझूनी, बदियाकोट और शामा से आए स्थानीय लोग यहां हिमालयी कुत्तों की दुकानें लगाए हैं, जहां दूर-दूर से लोग अपने मनपसंद के पिल्ले खरीदने पहुंच रहे हैं.

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इन हिमालयी कुत्तों की लोकप्रियता का राज उनकी बेजोड़ वफादारी और साहस में छिपा है. ये कुत्ते वफादारी में सबसे आगे होते हैं और वक्त आने पर तेंदुओं जैसे खूंखार जंगली जानवरों से भी भिड़ जाते हैं. अपने मालिक पर आते खतरे को भांपते ही ये खुद आगे होकर लड़ाई लड़ते हैं, जिससे इन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में हर किसी की पहली पसंद बनाया जाता है. मेले में एक हिमालयी कुत्ते की कीमत 5,000 से 25,000 रुपये तक बताई जा रही है, जो इनकी उपयोगिता और मांग को दर्शाती है.

क्या कहते हैं दुकानदार?
हिमालयी कुत्ता बेचने वाले दुकानदार भुवन पांडे का कहना है कि यहां पर हिमालयी कुत्तों का व्यापार करते हुए करीब 15 साल हो चुके हैं और इन हिमालयी कुत्तों को हम बाछम, मुनस्यारी, खलझूनी, मिक्लाखलपट्टा, बदियाकोट जगह से खरीद कर लाते हैं. जिस नस्ल का कुत्ता होगा उसकी रमक उस तरह तय की जाती है.

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वहीं खरीददारी करने आये गोकुल परिहार का कहना है की वे हिमालायी कुत्ते खरीदने आए हैं, क्योंकि ये कुत्ते पहरेदारी में अन्य कुत्तों के मुकाबले ज्यादा वफ़ादार होते हैं, जो बाघ आदि जंगली जानवरों से भी लड़ जाते हैं.

पीढ़ियों से निभाया जा रहा पारंपरिक व्यवसाय
मेले में आए एक व्यापारी ने बताया कि वह हर वर्ष नियमित रूप से उत्तरायणी मेले में आते हैं. उनके मुताबिक यह कारोबार उनके परिवार में पीढ़ियों से चलता आ रहा है, जिसे वह आज भी उसी लगन और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. दुर्गा सिंह के पास हिमालयन शीपडॉग की अलग-अलग उम्र और कीमत वाले कई विकल्प मौजूद हैं. उनका कहना है कि कभी कारोबार बेहतर रहता है तो कभी सामान्य, लेकिन इस बार मेले में खरीदारों की रुचि काफी उत्साहजनक नजर आ रही है.

शहरों तक पहुंची हिमालयन शीपडॉग की लोकप्रियता
उत्तरायणी मेले में हिमालयन शीपडॉग खरीदने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंच रहे हैं. पहले यह नस्ल मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में ही पाली जाती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. लोग इसे घर और पशुओं की सुरक्षा के लिए बेहद भरोसेमंद मानते हैं.

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