'दीपक कुमार जैसे हिंदू आ गए तो बीजेपी...', कोटद्वार मामले पर आया ओवैसी का बयान

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कोटद्वार के दीपक कुमार का समर्थन करते हुए बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि दीपक कुमार जैसे लोग आगे आए तो बीजेपी-आरएसएस की सरकार खत्म हो सकती है. ओवैसी ने उन्हें सामाजिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज बताया और संविधान व बराबरी की बात करने वालों का साथ देने की जरूरत कही. बयान के बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है, जबकि बीजेपी की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है.

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असदुद्दीन ओवैसी ने दीपक कुमार की तारीफ की है. (Photo: ITG) असदुद्दीन ओवैसी ने दीपक कुमार की तारीफ की है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कोटद्वार के दीपक कुमार का समर्थन करते हुए केंद्र की बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है. ओवैसी ने एक बयान में कहा कि “दीपक कुमार जैसे हिंदू अगर आगे आ गए तो देश से बीजेपी-RSS की सरकार खत्म हो जाएगी.”

ओवैसी का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने दीपक कुमार को सामाजिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज बताते हुए कहा कि देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो संविधान और बराबरी की बात करें.

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हालांकि, बीजेपी की ओर से इस बयान पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह बयान आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए दिया गया है और इससे सियासी बहस और तेज हो सकती है.

क्या है कोटद्वार का पूरा मामला?
उत्तराखंड का शांत और आपसी सौहार्द के लिए जाना जाने वाला शहर कोटद्वार हाल की एक घटना के बाद अचानक चर्चा में आ गया. मामला किसी बड़े आंदोलन या राजनीतिक रैली का नहीं, बल्कि तनावपूर्ण हालात में एक युवक की सूझबूझ से जुड़ा है. स्थिति तब बिगड़ने लगी जब एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ भीड़ के बीच अपमानजनक व्यवहार हो रहा था और माहौल लगातार गर्म होता जा रहा था. उसी दौरान एक हिंदू युवक, दीपक कुमार, ने खुद को “मोहम्मद दीपक” बताकर भीड़ का ध्यान भटकाने और तनाव कम करने की कोशिश की, जिससे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया.

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दीपक ने बताई पूरी कहानी
दीपक के मुताबिक, उस दिन देहरादून से बड़ी संख्या में लोग कोटद्वार पहुंचे थे. करीब डेढ़ से दो सौ लोगों के समूह के आने से इलाके का माहौल अचानक बदल गया. नारेबाजी, अपशब्द और तीखी बहस का दौर शुरू हो गया. दीपक बताते हैं कि उनके साथ उस समय कुछ ही लोग थे, जबकि सामने भीड़ ज्यादा थी. कई घंटों तक तीखी भाषा और गाली-गलौज होती रही और बात परिवार तक पहुंच गई. उनका कहना है कि हालात इतने संवेदनशील हो चुके थे कि छोटी सी चिंगारी भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती थी.

दुकान का नाम बदलने की जिद्द
विवाद की जड़ एक दुकान के नाम को लेकर उठा तनाव था. “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर” नाम की दुकान चलाने वाले लगभग 70 वर्षीय वकील अहमद पर नाम बदलने का दबाव बनाया जा रहा था. दीपक का कहना है कि जिस तरीके से बुजुर्ग से बात की जा रही थी, वह उन्हें अनुचित लगा. उनके अनुसार, बिना किसी आधिकारिक नोटिस या कागजी प्रक्रिया के सिर्फ दबाव बनाकर नाम बदलने को कहा जा रहा था, जिसने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया.

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