वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में है दुनिया का सबसे बड़ा तानपुरा, जानिए इसकी खासियत

वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत और कला संकाय में 10 फीट का तानपुरा है जो पूरा मेटल से बनाया गया है. इतना बड़ा तानपुरा केवल बीएचयू में है. यहां अनोखा म्यूजियम है.

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में है दुनिया का सबसे बड़ा तानपुरा काशी हिंदू विश्वविद्यालय में है दुनिया का सबसे बड़ा तानपुरा

aajtak.in

  • वाराणसी,
  • 01 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST
  • संग्रहालय में रखे हैं कई इंस्ट्रूमेंट
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास को बयां करता है

वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत और कला संकाय में विश्व का अनोखा म्यूजियम है. इस म्यूजियम में विश्व का सबसे बड़ा तानपुरा है. यह म्यूजियम पंडित लालमणि मिश्र वाद संग्रहालय में संरक्षित और सुरक्षित रखा गया है. यह संग्रहालय संगीत प्रेमियों को अपनी और आकर्षित करता है और बनारस संगीत घराने और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास को बयां करता है.

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संग्रहालय में रखे हैं कई इंस्ट्रूमेंट
प्रोफेसर  शशि कुमार ने बताया कि संग्रहालय का नाम पंडित लालमणि मिश्रा है उनके समय में ही इसका निर्माण कराया गया था. जब संकाय के वह प्रमुख थे. बहुत से इंस्ट्रूमेंट यही की है और बहुत से बाहर से भी दिए गए, जैसे सितार, संदूर, विचित्र वीणा, सरस्वती ,वीणा, तबला, झांझ, शहनाई, झुनझुना, ढ़ोलक, तुड़गुड़ा, सितार, और जल तरंग है. 

संग्रहालय में रखे हैं कई इंस्ट्रूमेंट

10 फीट का तानपुरा है जो पूरा मेटल से बनाया गया है. इतना बड़ा तानपुरा केवल बीएचयू में है. तानपुरा की बात करें तो इसकी लंबाई 10 फीट और इसका व्यास 4 फिट का है. इस तानपुरा को खड़ा होकर बजाया जा सकता है.

संग्रहालय में रखे हैं कई इंस्ट्रूमेंट

बता दें कि बीएचयू के संगीत सोम मंच कला संकाय संग्रहालय में आम नागरिकों के लिए प्रवेश निषेध है. इस म्यूजियम में रखे वाद्य यंत्र बजाए जाने योग्य है. कुछ वाद्य यंत्रों की रिपेयरिंग करनी है. यहां 50 वर्ष से अधिक पुराने वाद्य यंत्र मौजूद हैं.

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BHU को एक मिलियन डॉलर का दान
अमेरिका के उद्यमी देशपांडे और उनकी पत्नी जयश्री देशपांडे ने अपने पिता के सम्मान में पिछले दिनों आईआईटी (बीएचयू) को एक मिलियन डॉलर (7,76,30,000 रूपये) का दान किया. 1948 बैच के छात्र रहे श्रीनिवास देशपांडे के नाम पर आईआईटी के मुख्य पुस्तकालय का नाम होगा.

देशपांडे ने कहा, 'बीएचयू के प्राचार्य डॉ. गोडबोले के साथ एक संयोगवश मुलाकात ने मेरे पिता को इस विश्वविद्यालय में शिक्षा के लिए प्रेरित किया और इस विश्‍वविद्यालय ने उनका और हमारे परिवार का जीवन बदल दिया. हमें उम्मीद है कि इस विनम्र उपहार से भविष्य में पुस्तकालय के सैकड़ों लोगों के जीवन पर समान प्रभाव पड़ेगा.'

देशपांडे के पिता श्रीनिवास देशपांडे का जन्म- 2 मार्च, 1925 को हुआ. उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से 1948 में औद्योगिक रसायन विज्ञान में प्रथम श्रेणी में बीएससी पूरा किया, फिर अगले 31 साल तक सार्वजनिक क्षेत्र में काम करते हुए 1980 में संयुक्त श्रम आयुक्त के रूप से कर्नाटक सरकार से सेवानिवृत्त हुए.

ब्रिजेश कुमार की रिपोर्ट
 

 

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