'मैं हूं घोड़ा ये है गाड़ी मेरी रिक्शा सबसे निराली...' महमूद पर फिल्माया गया मशहूर फिल्म कुंवारा बाप का यह गाना हो या फिर 'रिक्शा पर जब बइठि के गोरिया...' मनोज तिवारी पर वाराणसी में फिल्यामा गया भोजपुरी का यह मशहूर गाना. इन दोनों ही गानों से परिवहन के पुराने साधन रिक्शा को पर्दे पर पहचान मिली थी. प्रशासन की योजना तय समय पर अमल में आ गई तो आधुनकिता की बयार में बनारसी ठाठ की पहचान से जुड़ा साइकिल रिक्शा भी बीते दिनों की बात हो जाएगा.
जानकारी के मुताबिक अगले दो से तीन महीने में साइकिल रिक्शा का परिचालन वाराणसी शहर के अंदर प्रतिबंधित कर देने की योजना है. वाराणसी प्रशासन ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी है और बाकायदा साइकिल रिक्शा चालकों और नए चालकों को ई-रिक्शा दिलवाने के लिए जिला नगरीय विकास अभिकरण यानी डूडा को जिम्मेदारी भी दे दी है.
वाराणसी प्रशासन के मुताबिक यह फैसला शहर की सुस्त ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और रिक्शा चालकों की सेहत और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के मकसद से लिया गया है. अगले दो से तीन महीनों में शहर को साइकिल रिक्शा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय कर दिया गया है. खांटी बनारसी मुंह में पान घुलाकर, रेशम का कुर्ता पहनकर रिक्शे की सवारी करना अपनी शान समझते हैं लेकिन अब कुछ ही महीने बाद ये सब किस्से-कहानियों तक ही सिमटकर रह जाएगा.
वाराणसी प्रशासन के फैसले की जानकारी देते हुए जिला नगरीय विकास अभिकरण यानी डूडा की परियोजना अधिकारी जया सिंह बताती हैं कि भविष्य की परियोजनाओं के तहत डूडा और नगर निगम को जिलाधिकारी और कमिश्नर ने को साइकिल रिक्शा मुक्त काशी बनाने और ई रिक्शा पर शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी दी है. इसके लिए सूचनाएं प्रकाशित भी कराई गई हैं ताकि साइकिल रिक्शा वाले ई रिक्शा के लिए डूडा की योजना के तहत लोन के लिए आवेदन करें. इसपर ब्याज नहीं लगेगा साथ ही सब्सिडी के जरिए रिबेट भी दिलाया जाएगा.
डूडा की परियोजना अधिकारी ने कहा कि साइकिल रिक्शा चालकों को ई-रिक्शे दिए जाएंगे. इससे ना केवल साइकिल रिक्शा चालकों का स्वास्थ्य सुधरेगा और उनकी आमदनी भी बढ़ेगी. उन्होंने आगे कहा कि वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में हजारों रिक्शा चालक हैं. उनकी सूची जैसे ही नगर निगम से प्राप्त होगी, उन रिक्शा चालकों से संपर्क करके ई-रिक्शा के लिए मोटिवेट किया जाएगा. इस अभियान के तहत साइकिल रिक्शे जब्त कर नगर निगम की ओर से कार्रवाई भी की जाएगी. अगले 2-3 महीनों में इस कार्य योजना को पूरी तरह से मूर्त रूप दे दिया जाएगा.
क्या कहते हैं रिक्शा चालक?
करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय से वाराणसी की गलियों में रिक्शा चला रहे अमित कहते हैं कि लोन लेकर ई-रिक्शा लेने पर लोन का पैसा चुकता करना पड़ेगा. इससे बढ़िया हमारा साइकिल रिक्शा ही है. दिन भर मेहनत करके ढाई-तीन सौ रुपये कमा तो लेते हैं. वह कहते हैं कि अगर साइकिल रिक्शा पर रोक लगती है तो रिक्शा चलाना छोड़कर कोई और काम करना पड़ेगा.
अमित ने कहा कि प्रशासन ने यह गलत फैसला लिया है. ऐसा होता है तो भुखमरी आ जाएगी और बच्चों का लालन-पालन करना भी और मुश्किल हो जाएगा. वहीं, एक अन्य रिक्शा चालक प्रदीप ने कहा कि ई-रिक्शा खरीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे? अगर लोन पर बिना पैसा लगाए ई-रिक्शा मिलता है तो ठीक है. किसी तरह रोजी-रोटी चलते रहनी चाहिए.
रोशन जायसवाल