यूपी की जेलों में कोरोना पर काबू! पिछले साल की तुलना में बहुत कम केस आए

उत्तर प्रदेश कारागार व सुधार विभाग के आंकड़ों की माने तो बीते साल राज्य की जेलों में 14,214 कैदी व बंदी रक्षक संक्रमित हुए थे लेकिन इस दूसरी लहर में अभी तक मात्र 1,869 कैदी ही कोरोना की चपेट में आए हैं.

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एक जेल की वर्कशॉप (फोटो-PTI) एक जेल की वर्कशॉप (फोटो-PTI)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 28 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST
  • कोरोना से बचने के लिए पिछले साल बनाईं थीं अस्थाई जेल
  • इस बार अस्थायी जेलों की भी संख्या कम
  • जेल प्रशासन ने कैदियों को बिना मास्क बाहर निकलने दिया

यूपी के जेल प्रशासन की सक्रियता के कारण कोरोना की दूसरी लहर का जेलों में असर कम ही हो पाया है. पिछले साल कोरोना की पहली लहर में यूपी की जेलों में 14,000 से ज्यादा कैदियों को कोरोना हुआ था, लेकिन इस बार महज 1800 कैदी संक्रमित हुए हैं.

साल 2020 में कोरोना की पहली दस्तक से ज्यादा दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है. संक्रमण तेजी से फैल रहा है, अस्पतालों में बेड कम पड़ गए और श्मशान घाट तक में जगह नहीं है. देश के तमाम प्रबंध तंत्र कोरोना की इस दूसरी लहर में हवा हो गए तो वहीं उत्तर प्रदेश की जेलों में मार्च 2020 से लगाई गई पाबंदियों के दम पर कोरोना अब तक जेलों के गेट पर ही रोक लिया गया है.

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उत्तर प्रदेश कारागार व सुधार विभाग के आंकड़ों की माने तो बीते साल उत्तर प्रदेश की जेलों में 14,214 कैदी व बंदी रक्षक संक्रमित हुए थे लेकिन इस दूसरी लहर में अभी तक मात्र 1,869 कैदी ही कोरोना की चपेट में आए हैं. बीते साल बस्ती और झांसी जैसे छोटे जिलों की जेलों में संक्रमित कैदियों की संख्या 450 और 200 से अधिक थी तो वहीं इस बार सबसे ज्यादा संक्रमित गाजीपुर जेल में 75 और सबसे कम मेरठ जेल में हैं. मेरठ जेल में केवल एक कैदी संक्रमित हुआ है.

पिछले साल से कम अस्थाई जेल

आज प्रदेश की 72 जेलों में 1,12,065 कैदी बंद हैं, जिनमें 1,09,002 कैदी स्थाई जेल में हैं और 3,063 कैदी अस्थाई जेल में हैं. यह भी तब है जब गृह विभाग के आदेश के बावजूद सिर्फ 42 अस्थाई जेलें ही काम कर रही हैं. जबकि बीते साल कोरोना की शुरुआत पर 83 अस्थाई जेलें बनाई गई थीं.

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कोरोना की इस दूसरी लहर को रोकने के लिए जेल प्रशासन ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी. 23 मार्च 2020 से बंद हुई जेलों में मुलाकात की व्यवस्था अब तक लागू है. मतलब 1 साल 1 महीने में किसी भी कैदी से कोई बाहरी व्यक्ति या उसका परिजन मिला ही नहीं.

जेलों के अंदर पहुंच रहे नए कैदियों के लिए अस्थाई जेल में कोरोना की टेस्टिंग और 14 दिन का क्वारनटाइन और उसके बाद जेल पहुंच कर भी अलग से बैरक में क्वारनटाइन की व्यवस्था की गई है. इसी के दम पर ही यूपी की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के बावजूद संक्रमण नहीं फैल सका.

यूपी की 29 जेलों में क्षमता से 2 गुना और 3 गुना कैदी बंद हैं, जहां अस्थाई जेलें नहीं होने पर कैदी को सीधे जेल के आइसोलेशन बैरक में भेजा जा रहा है. उनमें लखनऊ जिला जेल, आगरा जिला जेल, आगरा सेंट्रल जेल, अलीगढ़, बस्ती, जौनपुर, अयोध्या, बहराइच की जिला जेल शामिल है.

डीजी जेल आनंद कुमार का कहना है कि हमने पहले लॉकडाउन के साथ ही जेलों के अंदर कोविड प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करवाया. जेलों में मिलाई पूरी तरह से बंद रखी गई. बिना मास्क के किसी भी कैदी को उसके सेल या बैरक से बाहर ही नहीं निकलने दिया गया, समय-समय पर बैरेक में सैनिटाइजेशन हुआ, कैदियों का हेल्थ चेकअप होता रहा और अब टीकाकरण का अभियान भी तेजी से चल रहा है, जिसका नतीजा है कि इस महामारी की दूसरी लहर में यूपी की जेल कुछ हद तक बची हुई हैं.

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