प्रयागराज में मिली सुरंग, महाभारत काल के लाक्षागृह के रहस्य से उठेगा पर्दा!

तीर्थ नगरी प्रयागराज में महाभारत काल का लाक्षागृह नाम का जंगल फिर से चर्चा में आ गया है. कुछ दिन पहले खुदाई में इस खंडहर में पत्थरों की एक सुरंग देखी गई. लोग कह रहे हैं कि यह वही सुरंग है जिसमें द्वापर युग में पांडवों ने छिपकर अपनी जान बचाई थी.

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प्रयागराज में मिली सुरंग (Photo- aajtak) प्रयागराज में मिली सुरंग (Photo- aajtak)

कुमार अभिषेक

  • प्रयागराज,
  • 16 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

  • प्रयागराज में मिली सुरंग पर चर्चा
  • लोगों ने कहा- महाभारत काल है
  • सुरंग को सुरक्षित करने की मांग

तीर्थ नगरी प्रयागराज में महाभारत काल का लाक्षागृह नाम का जंगल फिर से चर्चा में आ गया है. कुछ दिन पहले खुदाई में इस खंडहर में पत्थरों की एक सुरंग देखी गई. यह सुरंग करीब चार से पांच फिट चौड़ी है, लेकिन अभी सुरंग का कुछ हिस्सा ही दिखाई दे रहा है. बाकी हिस्सा मिट्टी में दबा हुआ है.

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सुरंग को लेकर लोग कह रहे हैं कि यह वही सुरंग है जिससे द्वापर युग में पांडवों ने छिपकर अपनी जान बचाई थी, जब वे लाख के महल में फंसे थे. अब सुरंग मिलने के बाद खंडहर को फिर से महाभारत काल का लाक्षागृह घोषित किए जाने की मांग होने लगी है.

गौरतलब है कि दुर्योधन ने पांडवों को जीवित जलाने के लिए गंगा के किनारे एक लाख का महल तैयार कराया था जिसकी जानकरी विदुर को हुई और उन्होंने पांडवों को दुर्योधन की इस मंशा की जानकारी दी थी. जानकारी मिलने के बाद पांडवों ने एक सुरंग बनाई और उसमें से वे लोग चुपचाप बाहर निकल आए और उनकी जान बच गई.

महाभारत में उसका उल्लेख भी है, लेकिन लाक्षागृह कहां बना था इसकी सही जानकारी नहीं मिल सकी है. प्रयागराज से 50 किलोमीटर गंगा किनारे एक जंगल में खंडहर है जिसे लाक्षागृह के नाम से जाना जाता है. सरकारी कागजों में भी इस जगह का नाम लाक्षागृह दर्ज है. सुरंग मिलने के बाद लोग इसे सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, इस सुरंग में क्या है और यह कैसी सुरंग है, इसपर संसय बरकरार है.

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