दुनिया के सबसे लंबे साइकिलिंग टूर पर निकले नरपत सिंह, पर्यावरण संरक्षण में ऐसे दे रहे योगदान

राजस्थान (Rajasthan) के रहने वाले नरपत सिंह इन दिनों दुनिया के सबसे बड़े साइकिलिंग टूर (cycling tour) पर हैं. वे आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे. यहां सेना भर्ती मुख्यालय पर उनका आर्मी अफसर ने स्वागत किया. नरपत सिंह​ ने यहां 3 पौधे लगाए. वे अब तक 93 हजार पौधे लगा चुके हैं.

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दुनिया के सबसे लंबे साइकिलिंग टूर पर निकले नरपत सिंह पहुंचे लखनऊ.  (Photo: Aajtak) दुनिया के सबसे लंबे साइकिलिंग टूर पर निकले नरपत सिंह पहुंचे लखनऊ. (Photo: Aajtak)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 03 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST
  • अब तक 93 हजार पौधे लगा चुके हैं नरपत सिंह
  • 30 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी करना है लक्ष्य

राजस्थान (Rajasthan) के रहने वाले 34 साल के नरपत सिंह दुनिया के सबसे लंबे साइकिलिंग टूर (cycling tour) पर निकले हैं. वे आज लखनऊ पहुंचे तो उनका स्वागत आर्मी अफसरों ने किया. नरपत सिंह पर्यावरण और जल संरक्षण (Environment and water conservation) के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं. वे अपनी यात्रा के दौरान प्रतिदिन दो पौधे लगाते हैं. नरपत सिंह अब तक 93 हजार पौधे लगा चुके हैं.

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जानकारी के मुताबिक, नरपत सिंह राजस्थान के रहने वाले हैं. वे इन दिनों दुनिया के सबसे लंबी साइकिल यात्रा पर हैं. इनका उद्देश्य समाज में पर्यावरण, जल संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक करना है. लखनऊ कैंट में नरपत सिंह लखनऊ छावनी स्थित सेना भर्ती मुख्यालय में पहुंचे, जहां उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सेना भर्ती मुख्यालय के अपर महानिदेशक मेजर जनरल ने नरपत सिंह राजपुरोहित का गर्मजोशी से स्वागत किया.

सेना भर्ती मुख्यालय में लगाए 3 पौधे

नरपत सिंह ने मेजर जनरल राजपुरोहित की उपस्थिति में सेना भर्ती मुख्यालय के प्रांगण में तीन पौधे लगाकर  पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. नरपत सिंह राजपुरोहित ने 27 जनवरी 2019 को जम्मू हवाई अड्डे से अपनी यात्रा शुरू की थी. इस साइकिलिंग टूर का लक्ष्य 30,000 किमी से अधिक की दूरी तय करना है. अब तक उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित 29 राज्यों को कवर किया है और 29,422 किमी की यात्रा की है.

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एक पैर में 38 टांके होने के बावजूद दिखाई हिम्मत

नरपत सिंह ने अपनी यात्रा के दौरान प्रतिदिन दो पौधे लगाने का संकल्प लिया है. यात्रा के दौरान उन्होंने अब तक 93,000 से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण व जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. एक पैर में 38 टांके लगने के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और अपनी यात्रा को सफल बनाने का संकल्प लिया. उनकी यात्रा जयपुर में समाप्त होगी.

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