जगद्गुरु परमहंस आचार्य को ताजमहल में नहीं मिला प्रवेश, बोले- भगवा पहनने और ब्रह्मदण्ड की वजह से रोका गया

बताया जा रहा है कि परमहंसाचार्य के शिष्य के पास ताज महल में प्रवेश का टिकट था. जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने सीआईएसएफ जवानों को टिकट होने की बात भी बताई. लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया. इसके बाद उनके टिकट वहीं अन्य पर्यटकों को देकर पैसे वापस लौटा दिए गए.

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जगद्गुरु परमहंसाचार्य जगद्गुरु परमहंसाचार्य

बनबीर सिंह

  • आगरा,
  • 27 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST
  • अयोध्या से आगरा पहुंचे थे जगद्गुरु परमहंस
  • ताजमहल में CISF ने रोका

अयोध्या से आगरा आए जगद्गुरु परमहंसाचार्य को ताजमहल में प्रवेश नहीं दिया गया. बताया जा रहा है कि वे भगवा कपड़े पहने थे और उनके हाथ में  ब्रह्म दण्ड था. ऐसे में उन्हें ताजमहल में प्रवेश नहीं दिया गया. 

बताया जा रहा है कि परमहंसाचार्य के शिष्य के पास ताज महल में प्रवेश का टिकट था. जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने सीआईएसएफ जवानों को टिकट होने की बात भी बताई. लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया. इसके बाद उनके टिकट वहीं अन्य पर्यटकों को देकर पैसे वापस लौटा दिए गए. 

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इस घटना के बाद संत सभी को आशीर्वाद देकर वहां से वापस अयोध्या लौट गए. संतों के अपमान पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनसे क्षमा भी मांगी है.

ताजमहल वास्तव में तेजो महालय है- परमहंस

अयोध्या तपस्वी छावनी से जुड़े संत परमहंस धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा पर आगरा पहुंचे थे. संत परमहंस के मुताबिक, उन्हें भगवा कपड़े पहनने और धर्म दंड लिए होने की वजह से ताजमहल में प्रवेश नहीं मिला. हालांकि, बाद में उन्हें बिना धर्म दंड के प्रवेश की अनुमति दी गई लेकिन उन्होंने इस पर एतराज करते हुए ताजमहल गेट के भीतर प्रवेश नहीं किया. अब संत परमहंस कहते हैं की यह ताजमहल वास्तव में तेजो महालय है और इसका सही इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए. 

संत परमहंस को बताया गया कि ताजमहल के भीतर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियां प्रतिबंधित है. इस पर संत परमहंस सवाल उठा रहे हैं कि एक खास तबके को नमाज तक की अनुमति है लेकिन उन्हें भगवा कपड़े पहनने और धर्म दंड लिए होने के कारण प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं मिली!

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क्या बोले पुरातत्व विभाग के अधिकारी ...
ताजमहल के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानि एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल इस पूरे मामले की जांच की बात कह रहे हैं. उनका कहना है कि शुरुआती जानकारी ये मिली है कि संत लोहे का दंड ले जा रहे थे, जिसके कारण उन्हें प्रवेश की अनुमति शायद नहीं मिली.  उनसे दंड को प्रवेश द्वार पर रखकर भीतर जाने को कहा गया लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए. भगवा कपड़े को लेकर उन्हें नहीं रोका गया. वहीं, संत परमहंस कहते हैं की धर्म दंड लोहे का नहीं होता, वह बांस और खास लकड़ी से बना होता है और मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित होता है. 
 

हिंदू राष्ट्र की कर चुके मांग

जगद्गुरु परमहंसाचार्य  इससे पहले उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग की थी. इतना ही नहीं उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि भारत सरकार अगर 2 अक्टूबर तक हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं करती, तो वे जल समाधि ले लेंगे. हालांकि, जल समाधि लेने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. 


 

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