राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर तेलंगाना की राजनीति में एक नई भूमिका में नजर आ सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक वो के. कविता (कल्वकुंतला कविता) द्वारा प्रस्तावित नई राजनीतिक पार्टी के साथ काम कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने इस नए राजनीतिक प्रयोग में सहयोग करने में दिलचस्पी दिखाई है.
सूत्रों का कहना है कि पिछले दो महीनों में प्रशांत किशोर हैदराबाद दौरे के दौरान के. कविता से दो बार मुलाकात कर चुके हैं. इन बैठकों को लेकर चर्चा उस समय और तेज हो गई, जब संक्रांति के दौरान कविता और किशोर के बीच करीब पांच दिनों तक लगातार बातचीत हुई.
इन बैठकों में के. कविता ने कथित तौर पर तेलंगाना में एक जन-केंद्रित राजनीतिक पार्टी बनाने के विचार पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत में इस बात पर जोर रहा कि आम लोग इस पार्टी को अपनी पार्टी के तौर पर कैसे देखें और पार्टी का कामकाज जनता के नजरिए से कैसे चले.
सूत्रों के अनुसार, इन चर्चाओं में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, जनसंपर्क की रणनीति और लंबी अवधि की राजनीतिक योजना जैसे अहम मुद्दे भी शामिल रहे. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर न तो प्रशांत किशोर और न ही के. कविता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे तेलंगाना की सियासत में संभावित नए बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
क्यों अहम है ये संभावित गठजोड़?
के. कविता, तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी और भारत राष्ट्र समिति (BRS) की वरिष्ठ नेता रही हैं. वो नलगोंडा से सांसद रह चुकी हैं और पार्टी के भीतर महिला व सामाजिक मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाती आई हैं. हाल के महीनों में कविता ने BRS से अलग राजनीतिक राह तलाशने के संकेत दिए हैं, खासकर तब जब पार्टी राज्य में सत्ता गंवा चुकी है.
दूसरी ओर, प्रशांत किशोर देश के सबसे चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते हैं. वे नरेंद्र मोदी (2014), नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, जगन मोहन रेड्डी और हाल में कांग्रेस की रणनीति से भी जुड़े रहे हैं. 2022 में उन्होंने सक्रिय चुनावी रणनीति से दूरी बनाने की बात कही थी, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में उनका प्रभाव अब भी बना हुआ है.
अगर के. कविता वास्तव में नई पार्टी बनाती हैं और प्रशांत किशोर उससे जुड़ते हैं तो ये तेलंगाना की राजनीति में तीसरे राजनीतिक विकल्प की जमीन तैयार कर सकता है, खासकर शहरी, युवा और महिला वोटर्स के बीच. यही वजह है कि ये संभावित साझेदारी सियासी हलकों में खास दिलचस्पी का विषय बनी हुई है.
अब्दुल बशीर