नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने सिस्टम के तमाम झूठे दावों की पोल खोलकर रख दी. इसके उलट, अमेरिका के वर्जीनिया बीच से एक घटना सामने आई है, जहां लोगों के साहस दिखाने के चलते एक महिला की जान बच गई. यह एक मार्मिक तुलना है कि कैसे दुनिया के दो कोनों में दो समान हादसे हुए, लेकिन एक जगह सूझबूझ और बहादुरी ने जान बचा ली, जबकि दूसरी जगह व्यवस्था की लापरवाही एक होनहार युवक को निगल गई.
दरअसल, ताजा मामला वर्जीनिया बीच पर हुआ, जहां एक महिला की एसयूवी (SUV) अनियंत्रित होकर कड़ाके की ठंड और बर्फीले पानी से भरे जलाशय में जा गिरी. पानी इतना ठंडा था कि शरीर जम जाए और कार के दरवाजे लॉक हो चुके थे. मौत सामने खड़ी थी, लेकिन तभी वहां मौजूद राहगीर 'देवदूत' बनकर सामने आए.
वहां मौजूद लोगों ने बिना प्रशासन का इंतजार किए खुद मोर्चा संभाला. संयोगवश, बचाव करने वालों में अमेरिकी नौसेना का एक पूर्व रेस्क्यू स्विमर भी मौजूद था. एक शख्स ने बहादुरी दिखाते हुए कार का पिछला शीशा तोड़ा, डूबती कार के अंदर घुसा और महिला को सुरक्षित बाहर खींच लिया. बर्फीले पानी की चुनौतियों के बावजूद आम नागरिकों की इस त्वरित हिम्मत ने एक जिंदगी बचा ली.
नोएडा में लापरवाही के चलते गई युवराज की जान
17 जनवरी की आधी रात के बाद गुरुग्राम से घर लौट रहे युवराज मेहता की कार घने कोहरे में सड़क किनारे पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई. सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट A-3 के पास सड़क किनारे बने नाले की बाउंड्री कमजोर थी. कार बाउंड्री तोड़ते हुए उस गहरे गड्ढे में जा गिरी, जो एक अंडर-कंस्ट्रक्शन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट के लिए खोदा गया था.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवराज करीब दो घंटे तक कार में फंसे रहे और मदद के लिए गुहार लगाते रहे. पुलिस और बचाव दल बिना तैयारी मौके पर पहुंचे. आरोप है कि ठंडे पानी, कीचड़ और गड्ढे में सरिया होने के डर से कोई नीचे नहीं उतरा. बस इसी लापरवाही के चलते एक होनहार की मौत हो गई. शनिवार को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कार्रवाई के बाद शव बरामद किया जा सका. कार को निकालने में भी तीन दिन लग गए.
सिस्टम की विफलता या नागरिकों की उदासीनता?
दो घटनाएं यह साफ करती हैं कि हादसे किस्मत नहीं, बल्कि तैयारी और प्रतिक्रिया से तय होते हैं. नोएडा में प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कमजोर इमरजेंसी सिस्टम ने एक युवा की जान ले ली. वहीं वर्जीनिया बीच में जागरूक नागरिक, प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया ने एक जिंदगी बचा ली. नोएडा की घटना केवल एक निर्माणाधीन कंपनी की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह उस पूरे तंत्र की विफलता है जो सुरक्षा बाड़ (Barricading) और चेतावनी बोर्ड जैसे सामान्य नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में अक्षम रहा.
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