जयललिता अस्वस्थ हैं. चिकित्सक उन्हें बेहतर स्थिति में लाने की कोशिश में लगे हैं. लेकिन इस दौरान अगर किसी बात को लेकर लोगों के बीच चिंता है तो वो है कि ऐसी सेहत और संकट में क्या उनके लिए पार्टी और सरकार को संभाल पाना संभव रह पाएगा.
और अगर नहीं तो फिर क्या हैं विकल्प, कौन हैं वो चेहरे जिनमें जयललिता देख सकती हैं वफादारी और जनता देख सकती है विश्वास. जो सियासी उत्तराधिकार से लेकर पार्टी तक जयललिता और उनके समर्थकों की उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं. ऐसे ही कुछ चेहरों के बारे में आइए जानते हैं जो हो सकते हैं एक सक्षम विकल्प-
ओ. पनीरसेलवम
पनीरसेल्वम की पहचान जयललिता के ‘भक्त’ के रूप में है. में पनीरसेल्वम ही कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे हैं. 65 साल के पनीरसेल्वम पहले भी दो बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनके जेल जाने पर सार्वजनिक मंच पर आंसू नहीं रोक पाए थे.
पानरुति रामचंद्रन
78 साल के रामचंद्रन ने 2013 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था. इन्हें के रूप में भी जाना जाता है. अपोलो अस्पताल में उन्हें सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.
एम. थम्बीदुरई
लोकसभा के उप सभापति की योग्यता पर भी कोई सवाल नहीं उठा सकता. में उनकी मौजूदगी जरूर होती है. 69 साल के थम्बीदुरई को राजनीति का लंबा अनुभव है.
इडापड्डी पलानीस्वामी
पेशे से इंजीनियर पलानीस्वामी सरकार के शक्तिशाली मंत्रियों में से एक हैं. 57 साल के पलानीस्वामी ताकतवर गौंडार समुदाय से ताल्लकु रखते हैं.
मा फोई पांडियाराजन
अन्नाद्रमुक के उभरते सितारे रह चुके हैं. 57 साल के पांडियाराजन सदन में अंग्रेजी बोलने वाले चुनिंदा विधायकों में से एक हैं.
अजित कुमार
एआईएडीएमके का दावा है कि जयललिता ने अपने उत्तराधिकारी और तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर को चुन लिया था. कहा जा रहा है कि उत्तराधिकारी को लेकर यह फैसला जयललिता की वसीयत में लिखा हुआ है और इस वसीयत से जयललिता के बेहद भरोसमंद सहयोगी अच्छी तरह अवगत भी है. लेकिन, अजित को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उन्हें सियासत का कोई अनुभव नहीं है.