लोकपाल चयन को बैठक आज, 'विशेष आमंत्रित' खड़गे का शामिल होने से इनकार

दरअसल कांग्रेस की आपत्ति इस बात को लेकर है कि लोकपाल के चयन को लेकर जो बैठक बुलाई गई है उसमें खड़गे को नेता प्रतिपक्ष की जगह स्पेशल आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाया गया है.

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खड़गे का सरकार पर वार खड़गे का सरकार पर वार

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस आमने-सामने हैं. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार के उस निमंत्रण को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्हें लोकपाल नियुक्ति को लेकर होने वाली बैठक में बुलाया गया था. लोकपाल की नियुक्ति की बैठक आज ही है. बता दें कि 5 मार्च से संसद का बजट सत्र का दूसरा भाग शुरू हो रहा है. दरअसल कांग्रेस की आपत्ति इस बात को लेकर है कि लोकपाल के चयन को लेकर जो बैठक बुलाई गई है उसमें खड़गे को नेता प्रतिपक्ष की जगह स्पेशल आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाया गया है.

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मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है. विपक्ष को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जा रहा है. खड़गे ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी का बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री जो ट्रैक रिकॉर्ड है वह बताता है कि वह लोकपाल जैसी संस्था के बारे में सीरियस नहीं हैं. कांग्रेस के इस रुख के साथ ही एक बार फिर लोकपाल की नियुक्ति पर संकट छा गया है.

संसद सत्र के शुरू होने के चार दिन पहले ही सरकार ने लोकपाल के लिए चयन समिति की बैठक बुलाई है ताकि लोकपाल के नाम पर सहमति बनाई जा सके. लोकपाल की सेलेक्शन कमेटी में पीएम मोदी, लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन, देश के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (स्पेशल गेस्ट) शामिल हैं.

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खड़गे ने लिखा कि अगर इस बैठक में मेरा वोट, विचार और तर्क मायने नहीं होगा तो बतौर 'स्पेशल गेस्ट' बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लोकपाल बिल पास किया था, लेकिन उसके बावजूद मोदी सरकार आजतक लोकपाल की नियुक्ति नहीं कर पाई है.

आपको बता दें कि लोकपाल बिल को 13 दिसंबर 2013 को राज्यसभा में पेश किया गया था, जो 17 दिसंबर 2013 को पारित हो गया था. इसके बाद 18 दिसंबर 2013 को लोकसभा ने भी इस बिल को पास कर दिया था. इसके बाद 18 दिसंबर को पीएम मोदी (उस दौरान गुजरात सीएम) ने ट्वीट कर इस बिल को पारित कराने का श्रेय सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के साथ बीजेपी सांसदों को दिया था.

गौरतलब है कि समाजसेवी अन्ना हजारे की अगुवाई में 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में काफी बड़ा आंदोलन हुआ था. जिसके बाद लोकपाल बिल चर्चा में आया था. इसके बाद 27 अगस्त 2011 को भारतीय संसद में ‘Sense of the House’ से रिज्युलेशन पास किया गया था. इसमें केंद्र में लोकपाल और हर राज्यों में लोकायुक्त व सिटिजन चार्टर पर जल्द से जल्द कानून बनाने का निर्णय किया गया था. इसके बाद अन्ना हजारे ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था.

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