आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है. अगर आप मुझसे पूछें कि एक हफ्ते या दो हफ्ते बाद दुनिया में क्या होने वाला है, तो ईमानदारी से कहूं तो हमें भी नहीं पता. ऐसे समय में सवाल उठता है कि उद्यमिता (entrepreneurship) का मतलब क्या है?
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में आंत्रप्रन्योरशिप की फ्रोफेसर क्रिस्टीना एम वालेस 'Build or Break: वैश्विक उथल-पुथल और तकनीकी सुनामी के बीच फलने-फूलने के लिए हार्वर्ड की रणनीति' विषय पर अपने विचारों और अनुभवों को साझा किया.
उन्होंने कहा कि हमारे माता पिता के दौर में दुनिया में बदलाव देर से होते थे. तब दुनिया को बदल देने वाले घटनाक्रम एक दशक में होता था. फिर ये हर साल होने लगा. और अब हर दो तीन घंटे में होता है. इन अनिश्चितता की हालत में उद्यमिता या आंत्रप्रन्योरशिप की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि जब अवसर की खोज ही उद्यमिता है. उद्यमिता का मतलब है कि आप इस अनिश्चितता के बीच भी अवसर देखते हैं. जहां दूसरे लोग जोखिम देखते हैं, वहां उद्यमी संभावना देखते हैं.
उन्होंने कहा कि आपको हमेशा नए डेटा के साथ तैयार रहना होगा ये साबित करने के लिए आप किस थ्योरी में यकीन करते हैं और किस थ्योरी में यकीन नहीं करते हैं.
फ्रोफेसर क्रिस्टीना एम वालेस ने कहा कि अमेरिका में हम खुद को अपने काम के जरिये समझते हैं. आप जितना कामयाब होते जाते हैं ये उतना ही और भी सच होते जाता है. और जब अचानक आपकी जिंदगी में कुछ ऐसा हो जाता है जिससे आपकी पूरी जिंदगी में उथल पुथल मच जाता है, इसके बाद आप अपनी पहचान और नौकरी दोनों ही खो बैठते हैं. यह परिस्थिति बेहद परेशान करने वाली होती है.
बातचीत के दौरान प्रोफेसर क्रिस्टीना ने बताया कि AI के दौर में उद्यमियों यानी कि आंत्रप्रेन्योर को क्या करना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक काम है जो AI नहीं कर सकता है. वो काम है कि स्टोरी टेलिंग. यानी कि कहानी कहने की कला.
उन्होंने कहा, "कहानी सुनाना सबसे अहम हुनर है. AI के इस दौर में कहानी सुनाना ही इंसानों का आखिरी काम है. AI निश्चित रूप से लिख सकता है, चीजों को फॉर्म्युलेट कर सकता है... AI निश्चित तौर पर इंसानों को नहीं समझता, और न ही कभी समझ पाएगा." उन्होंने कहा कि आंत्रप्रन्योरशिप का एक बड़ा काम सपना बेचना है. आप ग्राहकों को भी अपने प्रोडक्ट को लेकर कहानियां बतानी होगी. ये बहुत कुछ कम्युनिकेशन पर निर्भर करता है. और ये कम्युनिकेशन अनुभव, भाव पर निर्भर करता है. आज जो कर रहे हैं वो सिर्फ फैक्ट और डेटा पर निभर्र नहीं करता है. उन्होंने कहा कि उठापटक के दौर में कम्युनिकेशन की धारण सबसे अहम है.
कॉरपोरेट वर्ल्ड में AI के रोल पर प्रोफेसर क्रिस्टीना एम वालेस ने कहा कि हर नई टेक्नोलॉजी ऐसी चीजें लाती है जिन्हें हम पूरी तरह समझ नहीं पाते. AI अपनी स्पीड को देखते हुए खास तौर पर डरावना है. आप इससे जितना ज़्यादा डरेंगे, आपको उतना ही ज़्यादा सीखने की जरूरत होगी.
इस कार्यक्रम के दौरान जब प्रोफेसर क्रिस्टीना से पूछा गया कि जब संगठनों को किसी बड़े बदलाव का सामना करना पड़ता है, तो बड़ा जोखिम क्या होता है- गलत चीज बनाना, या फिर बिल्कुल भी बदलाव नही करना?
इसके जवाब में उन्होंने कहा कि बड़ा जोखिम है बिल्कुल भी बदलाव नहीं करना. इसके बारे में मैं अपने स्टूडेंट्स से बात करती हूं, वो समझते हैं कि गलत चीज बनाना नाकामी है. मैं उनको समझाती हूं कि अभी तक आपके पास कोई नई जानकारी नहीं है. अगर आप किसी भी डायरेक्शन में एक भी कदम बढ़ाते हैं तो अब आपके पास नई जानकारी है. और आप उस डायरेक्शन में बहुत आगे नहीं जा रहे हैं. आप रुकते हैं फिर दूसरी दिशा में जाते हैं. इसलिए अगर एक कंपनी कुछ लॉन्च करने जा रही है और सोचती है कि क्या होगा अगर ये प्रयोग गलत हो जाएगा लेकिन आप तक नहीं जानेंगे कि ये सही था या गलत जबतक आपका प्रोडक्ट मार्केट में नहीं आएगा. इसलिए थोड़ा सा ही सही नई दिशा में भी कुछ करना चाहिए.
प्रोफेसर क्रिस्टीना ने कहा कि कुछ कंपनियों में बड़े ऑफिसर होते हैं, जैसे चीफ डिस्रपटिव ऑफिसर, चीफ एक्सपीरियंस ऑफिसर, ये ऑफिसर कंपनी में कुछ नहीं करते हैं लेकिन वाइव्स क्रिएट करते हैं.
aajtak.in