EXCLUSIVE: जेएनयू में देशद्रोही आयोजन के मास्टरमाइंड की प्रोफाइल

जांच के नतीजे में देशद्रोही आयोजन के पीछे मास्टरमाइंड के बतौर उमर खालिद और अनिर्बाण भट्टाचार्य का नाम उभर कर सामने आया है.

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देश तोड़ने की नारेबाजी उमर खालिद और उसके दोस्तों ने की थी देश तोड़ने की नारेबाजी उमर खालिद और उसके दोस्तों ने की थी

केशव कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में लगे देशविरोधी नारेबाजी मामले की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब तक आए इसके नतीजे में देशद्रोही आयोजन के पीछे मास्टरमाइंड के बतौर उमर खालिद और अनिर्बाण भट्टाचार्य का नाम उभर कर सामने आया है.

कन्हैया ने भी बताया उमर को मास्टरमाइंड
की जांच में जुटी दिल्ली पुलिस ने यूपी, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर राज्यों में स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की है. इस दौरान खुलासा हुआ है कि उमर खालिद देश के 18 यूनिवर्सिटी में ऐसे आयोजन करने का प्लान बना चुका था. पुलिस की पूछताछ में जेएनएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने भी बताया है कि वह सिर्फ घटनास्थल पर मौजूद था, लेकिन देश विरोधी नारे नहीं लगाए. देश को तोड़ने, और अफजल के सपने पूरे करने की नारेबाजी उमर खालिद और उसके दोस्तों ने की थी.

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जांच में सामने आया उमर-अनिर्बाण का नाम
समारोह के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन से इजाजत मांगने के लिए दिए आवेदन में भी उसीका नाम मुख्य आयोजक की जगह था. उसके साथ अनिर्बाण भट्टाचार्य, रियाजुल हक और रुबीना सैफी का भी नाम सामने आया. जेएनयू में बातचीत के दौरान का नाम ही आयोजन के मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आ रहा है. इन दोनों की एक्सक्लूसिव प्रोफाइल तलाश की गई है.

एक और आरोपी रियाजुल हक की सोशल साइट से ली गई तस्वीर ( ज्यादातर आरोपियों ने सोशल साइट पर अपने एकाउंट/हैंडल डिएक्टिवेट कर लिए हैं.)

उमर खालिद -

कश्मीरी और पूर्वोत्तर के अलगाववादी संगठनों और नक्सलियों से जुड़ा संगठन डेमोक्रोटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) का सदस्य है.

जेएनयू में प्रोफेसर संगीता दासगुप्ता के निर्देशन में इतिहास विषय में पीएचडी कर रहा है.

साल 2011 में उसने एम फिल. के लिए जेएनयू में दाखिला लिया था और 2013 में इसे ए ग्रेड (फर्स्ट क्लास) के साथ पूरा किया.

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इसके बाद पीएचडी करने के लिए उसने पढ़ाई यहीं जारी रखी.

सहपाठियों के मुताबिक वह नियमित क्लास नहीं करता. छात्रों के बीच राजनीतिक गतिविधियों में एक अति सक्रिय एक्टिविस्ट के बतौर मशहूर है.

जेएनयू के ताप्ति हॉस्टल में उसे 168 नंबर का कमरा आवंटित किया गया है. मगर वह इसमें नहीं रहता.

हॉस्टल के दूसरे छात्रों को तो यह भी नहीं मालूम कि यह कमरा किसके नाम है और हमेशा बंद क्यों रहता है?

कुछ साल पहले उसके दोस्त अनिर्बाण को इसी हॉस्टल में कमरा मिला. इसके बाद उमर भी लगातार हॉस्टल आने लगा था.

कुछ दिनों के बाद अनिर्बाण ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में शिफ्ट हो गया. फिर उमर खालिद ने भी ताप्ति जाना छोड़ दिया.

दूसरे छात्रों ने बताया कि वह जेएनयू कैंपस के बाहर रहता है.

उमर खालिद मूल रूप से महाराष्ट्र के अमरावती जिले में संपूर्णा तहसील के तालेगांव का रहने वाला है.

अनिर्बाण भट्टाचार्य -

यह उमर खालिद का काफी नजदीकी दोस्त है.

यह भी जेएनयू में प्रोफेसर तनिका सरकार के निर्देशन में इतिहास में पीएचडी कर रहा है.

जेएनयू के ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में उसे कमरा मिला हुआ है.

अनिर्बाण भी रेडिकल और प्रतिक्रियावादी संगठन से जुड़ा हुआ है.

साल 2009 में उसने एम.फिल करने के लिए जेएनयू में दाखिला लिया था.

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मूल रूप से वह 45, गेसो रोड, दमदम, कोलकाता-28 का रहनेवाला है.

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