दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को बड़ी अंतरिम राहत दी है. अदालत ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से हिमायनी पुरी को जोड़ने वाले ऑनलाइन कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि पहली नजर में ये मामला हिमायनी पुरी के पक्ष में नजर आता है.
हिमायनी पुरी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि सभी आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटा दिया जाए. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर कंटेंट तुरंत नहीं हटाया जाता है, तो मध्यस्थ प्लेटफार्मों को अगले 24 घंटों के भीतर इसे हटाना होगा.
अदालत ने बताया कि ये आदेश वर्तमान में भारतीय न्यायक्षेत्र के भीतर अपलोड किए गए कंटेंट पर लागू होता है. कोर्ट ने मध्यस्थ प्लेटफार्मों सहित सभी डिफेंडेंट को समन जारी करते हुए कहा कि उनके जवाब आने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा.
हिमायनी पूरी ने आरोपों को बताया 'झूठा'
हिमायनी पुरी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ये आरोप उनकी छवि खराब करने के लिए एक सुनियोजित हमले का हिस्सा हैं. हिमायनी ने कहा, 'झूठे आरोपों का असली स्वरूप एक सजायाफ्ता अपराधी के साथ नाता जोड़ना है. मेरा उससे कोई संबंध नहीं है. मैं एक कैबिनेट मंत्री की बेटी होने की वजह से इस हमले का शिकार बनी हूं. मुझे इसमें राजनीतिक द्वेष का शक है.'
वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि कुछ विशिष्ट URL की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है. उन्होंने कहा कि हमने अदालत के सामने सही तस्वीर और तथ्य पेश कर दिए हैं.
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आरोपों से छवि को नुकसान
न्यूयॉर्क में रहने वाली हिमायनी पुरी की ओर से ये भी दलील दी गई कि इन आरोपों से विदेश में उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है. उनके वकील ने हिमायनी की तरफ से कहा, 'मैं वहां एक वित्तीय विश्लेषक, बैंकर और निवेशक हूं, इसलिए मुझे अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा की रक्षा करनी है.'
वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने की मांग
इसी आधार पर उन्होंने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने की मांग की. हालांकि, सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने बताया कि वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने का मामला फिलहाल एक बेंच के पास लंबित है. उन्होंने कहा कि अभी हम सिर्फ भारत के भीतर ही कंटेंट हटा सकते हैं.
मेटा की ओर से पेश वकील ने अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारतीय अदालत वैश्विक आदेश जारी कर सकती है? उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक आदेश मांगा जाता है, तो उन्हें इसका जवाब दाखिल करना होगा.
पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा की मांग
कुछ पत्रकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने तर्क दिया कि एपस्टीन से जुड़ी वर्ल्ड लेवल पर जांच चल रही है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि कुछ वीडियो और पोस्ट सिर्फ सवाल उठा रहे थे और सार्वजनिक रूप से तथ्यों का हवाला दे रहे थे.
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कोर्ट का रुख
अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए ये साफ कर दिया कि वर्ल्ड लेवल पर कंटेंट हटाने का सवाल अभी खुला है. कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
सृष्टि ओझा