...जलियांवाला बाग की वो वहशियत जिसपर 100 साल बाद ब्रिटेन को आई शर्म

जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश इतिहास का वो बदनुमा पन्ना है जिसका जिक्र ही अंग्रेजों के लिए शर्मिंदगी का सबब है. जो अंग्रेज भारतीयों को सभ्य बनाने का ढोंग रचकर भारत पर शासन करने आए, उन्होंने जलियांवाला बाग जैसे बर्बर, असभ्य और जघन्य नरसंहार को अंजाम दिया. वक्त का पहिया घूमते-घूमते 100 साल पार कर गया, आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए 100 साल पूरे हो गए.

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जलियांवाला बाग में मौजूद गोलियों के निशान (फाइल फोटो) जलियांवाला बाग में मौजूद गोलियों के निशान (फाइल फोटो)

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 12:29 AM IST

आज 13 अप्रैल है. आज से ठीक 100 साल पहले 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था. ये वो दिन था जब कायर डायर ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां बरसाई थीं. जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश इतिहास का वो बदनुमा पन्ना है जिसका जिक्र ही अंग्रेजों के लिए शर्मिंदगी का सबब है. जो अंग्रेज भारतीयों को सभ्य बनाने का ढोंग रचकर भारत पर शासन करने आए, उन्होंने जलियांवाला बाग जैसे बर्बर, असभ्य और जघन्य नरसंहार को अंजाम दिया. वक्त का पहिया घूमते-घूमते 100 साल पार कर चुका है. 100 साल में लंदन की टेम्स नदी से न जाने कितना पानी बह गया, भारत की गंगा भी न जाने कितने बदलावों का गवाह बनी. अब जाकर ब्रिटिश सत्ता को जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अफसोस का एहसास हुआ है.

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ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने 10 अप्रैल को इस घटना के लिए पश्चाताप प्रकट किया. थेरेसा में ने इस घटना को ब्रिटेन के भारतीय इतिहास का शर्मनाक अध्याय करार दिया. हालांकि उन्होंने इस घटना के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी.

ब्रिटेन की सांसद हाउस ऑफ कॉमंस में थेरेसा मे ने कहा, " 1919 का जालियांवाला बाग कांड ब्रिटिश इंडियन इतिहास पर शर्मनाक दाग है, जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 14 अक्टूबर 1997 में जलियांवाला बाग दौरे के पहले कहा था यह हमारे भारत के साथ इतिहास का दुखद उदाहरण है."

साल 1919 में बैसाखी 13 अप्रैल को थी. पंजाब समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अमृतसर पहुंचे थे. अमृतसर में एक दिन पहले ही ब्रिटिश हुकूमत ने कर्फ्यू लगा दिया. सरकार ने ऐलान कर दिया कि लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं. फिर आई बैसाखी की सुबह. गोल्डन टेंपल में दर्शन के बाद धीरे-धीरे लोग जलियांवाला बाग में जुटने लगे. कुछ वक्त में हजारों की भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी.

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जनरल डायर (फोटो-आजतक)

इस घटना के खलनायक ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल डायर को मालूम चला कि जलियांवाला बाग में कोई मीटिंग होने वाली है. जनरल डायर जलियांवाला बाग की तरफ पुलिस के साथ बढ़ चला. जलियांवाला बाग के गेट का वो संकरा रास्ता पुलिस के सिपाहियों से भर चुका था. जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के सिर्फ एक शब्द FIRE कहा इसके बाद बाग में मौजूद लोगों पर गोलियों की बौछार होने लगी.

लोग बताते हैं कि फायर से बचने के लिए औरतें बाग में बने कुएं में कूद गई. जब फायरिंग बंद हुई तो इस कुएं से 120 लाशें निकाली गईं.

जलियांवाला बाग में मौजूद कुआं (फोटो-आजतक)

कुएं के बगल में लगी स्मारिका (फोटो-आजतक)

कुछ लोगों ने दीवारों पर चढ़कर बाग से बचकर निकलने की कोशिश की लेकिन हत्यारी ब्रिटिश पुलिस ने इन पर भी फायरिंग की. गोलियों के निशान बाग की दीवारों पर आज तक मौजूद हैं. ईंट की दीवारों पर 100 साल पहले बने गोलियों के ये निशान आज कोटरों में तब्दील हो चुके हैं. सफेद चॉक से घिरे हुए गोलियों के निशान हर हिन्दुस्तानी के सीने में खंजर की तरह चुभते हैं. 

जालियांवाला बाग में लगे गोलियों के निशान (फोटो-आजतक)

इस हत्याकांड पर ब्रिटेन ही नहीं पूरी दुनिया में हंगामा मचा. इस मामले की जांच करने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने डिसऑर्डर इनक्वायरी कमेटी का गठन किया. इस कमेटी के सामने बयान देते हुए जनरल डायर ने कहा था, "मैंने गोलियां चलाई और तबतक चलवाता रहा जबतक की भीड़ तीतर बितर नहीं हो गई". जनरल डायर इन्क्वायरी कमीशन के सामने कहता है कि सवाल सिर्फ भीड़ को भगाने का नहीं था, बल्कि लोगों के दिमाग पर असर पैदा करने का था."

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जनरल डायर के बयान का एक अंश

जनरल डायर के आदेश पर उसके मातहत सिपाहियों ने 10 मिनट तक 1650 राउंड गोलिया बरसाई गईं थी. ब्रिटिश सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक अंग्रेजी सरकार की कार्रवाई में 379 लोग मारे गए, इनमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं भी शामिल थीं, तकरीबन 1200 लोग घायल हुए. आज 100 साल बाद भी जलियांवाला बाग सैकड़ों भारतीयों की सिसकियों का जीता-जागता गवाह है. जलियावाला बाग मानव इतिहास की वो घटना है जिसकी चर्चा जब-जब होगी, सत्ता के मद में चूर एक औपनिवेशक शक्ति के वहशी बन जाने की घटना याद आएगी.

According to the British government records, 379 people, inc ..

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